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इन 6 कारणों से हो सकती है दिल की धड़कन धीमी (Bradycardia)

हार्ट रेट का कम होना हार्ट ब्लॉकेज, एवी नॉड या hyperthyroidism का संकेत हो सकता है।
क्या आपको टैककार्डीअ (tachycardia) या बढ़ी हुई हार्ट रेट की समस्या है? तो वहीं कुछ लोगो को हार्ट रेट घटने या ब्रैडकार्डीअ ( bradycardia) की भी समस्या हो सकती है। जी हां, इसकी वजह मानी जाने वाली समस्याएं दिल के मसल्स को नुकसान पहुंचाकर दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम (electrical system) को प्रभावित कर सकती हैं। जहां साधारण हार्ट रेट एक मिनट में 60–90 बार धड़कने की है। वहीं ब्रैडकार्डीअ से परेशान लोगों का दिल एक मिनट में 35–40 बार धड़कता है। जबकि कुछ मामलों में लो हार्ट रेट साधारण बात मानी जाती है। हमारे एक्सपर्ट डॉ. संतोष कुमार डोरा (कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी एंड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, एशियन हार्ट इंस्टिट्यूट, मुंबई) बता रहे हैं ब्रैडकार्डीअ के आम कारणों के बारे में।

1. साइनस ब्रैडकार्डीअ (Sinus bradycardia)- इस समस्या में एवी नॉड (AV node) एक बीमारी के तौर पर उभरकर आता हैं जो इलेक्ट्रिकल इम्पल्स (electrical impulse) के कार्य यानि खून को पम्प करने में अड़चन डालता है। इसकी वजह से हार्ट रेट घटकर प्रति मिनट 45 धड़कन हो जाती हैं। इस स्थिति में इलेक्ट्रिकल सिग्नल दिल के ऊपरी हिस्से से गुज़रते हैं। लेकिन एवी नॉड को हुए नुकसान की वजह से दिल के निचले हिस्से में धड़कन नहीं होती। इन सबकी वजह से धड़कन की गति में रूकावट आती है।

2. एनी नॉड डिज़िज (AV node disease)- अगर आपका एवी नॉड बिल्कुल काम नहीं कर रहा लेकिन अपर चैम्बर या छाती के ऊपरी हिस्से में नॉर्मल हार्ट रेट होती है यानि हर मिनट आपका दिल 80 बार धड़कता है। जबकि निचले चैम्बर में एक मिनट में आपका दिल 40 बार धड़कता है। तो इसका मतलब यही है कि आपकी ओवरऑल हार्ट रेट कम है। इसी तरह अगर एवी नॉड को कोई नुकसान पहुंचा हो तो निचले चैम्बर की मांसपेशियों के धड़कने में सक्षम होने के बावजूद आपकी हार्ट रेट कम हो जाती है।

3. कम्पलीट हार्ट ब्लॉक (Complete heart block)- इस स्थिति में कोरोनरी से जुड़ी समस्याओं या हार्ट अटैक की वजह से दिल की मांसपेशियों को नुकसान से लेकर धमनियों में ब्लॉकेज जैसी कोई भी समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में एवी नॉड में समस्या की वजह से दिल का निचला चैम्बर सही तरीके से धड़क नही पाता। इसका परिणाम कम्पलीट हार्ट ब्लॉक भी हो सकता है, जो ख़तरनाक हो सकता है।

4. इंट्राक्रोनिअल ट्यूमर (Intracranial tumour)- हालांकि यह समस्या काफी कम होती है लेकिन इंट्राक्रोनिअल ट्यूमर की वजह से हार्ट रेट भी कम हो जाती है। अगर कैंसरस सेल्स की वजह से दिमाग के अंदर दबाव बढ़ता जाता है तो यह हार्ट रेट पर पड़नेवाले दबाव को कम करता है जिससे ब्रैडकार्डीअ हो सकता है।

5. हाइपथाइरॉइडिज़म (Hypothyroidism)- हां, थायरॉयड के बढ़े हुए स्तर से टैककार्डीअ हो जाता है, उसी तरह थायरॉयड के कम हुए स्तर से ब्रैडकार्डीअ हो जाता है। यह सायनस नॉड पर थायरॉयड हार्मोन्स के दबाव के कारण निचले चैम्बर को प्रति मिनट 40 – 50 बार धड़कने पर मज़बूर करता है। इस स्थिति में ब्रैडकार्डीअ का इलाज, हाइपथाइरॉइडिज़म के इलाज के तरीके पर निर्भर करता है।

6. दवाएं- कुछ मामलों में दिल की बीमारियों के इलाज के लिए बतायी गयी दवाएं या ब्लड प्रेशर कम करने के लिए दी जानेवाली बीटा-ब्लॉकर (beta-blockers) और एंटायरीदमिक्स (antiarrhythmics) की वजह से भी हार्ट रेट कम हो सकती है। यही नहीं, उम्र बढ़ने के साथ यह खतरा बढ़ता जाता है क्योंकि उम्र के साथ आपकी मांसपेशियां कमज़ोर होने लगती हैं।

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