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ओपन हार्ट सर्जरी को कई बार हार्ट सर्जरी भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, डॉक्टर मरीज की छाती में चीरा लगाकर उसे खोलते हैं और दिल यानी हृदय की मांसपेशियों, वाल्वों या धमनियों की सर्जरी करते हैं।
ओपन हार्ट सर्जरी के दौरान, अवरुद्ध धमनियां (Blocked Arteries) में सुधार करने के लिए डॉक्टर उन्हें नई आर्टरीज से जोड़ते हैं। इससे अवरुद्ध धमनियों को बायपास करके फ्रेश यानी ताजा खून को दिल तक पहुँचाया जाता है।
ओपन हार्ट सर्जरी को पूरा होने में आमतौर पर 3-6 घंटे का समय लगता है। ओपन हार्ट सर्जरी करने से पहले डॉक्टर मरीज को अनेक जांच करने का सुझाव देते हैं ताकि इस बात की पुष्टि की जा सके की मरीज इस सर्जरी के लिए पूर्ण रूप से तैयार है।
जांच के परिणामों के बाद जब डॉक्टर हर तरह से संतुष्ट हो जाते हैं तो सर्जरी की एक तारीख तय करते हैं, मरीज को सर्जरी से पहले की कुछ दिशा-निर्देश देते हैं और अंतत चयनित दिन पर सर्जरी को पूरा किया जाता है।
ओपन हार्ट सर्जरी में निम्न चरण शामिल हैं:
* सबसे पहले मरीज को एनेस्थीसिया देना जिससे मरीज बेहोश हो जाता है। इससे सर्जरी के दौरान मरीज को जरा भी दर्द या दूसरी परेशानियां नहीं होती है और डॉक्टर सर्जरी को आराम से पूरा करते हैं।
* एनेस्थीसिया देने के बाद, छाती पर 8-10 इंच का चीरा लगाना और मरीज के ब्रेस्टबोन को हटाकर पूरे दिल को देखना
* जब दिल पूरी तरह से दिखने लगे तो लंग बायपास मशीन से जोड़ना
* लंग को बायपास से जोड़ने के बाद, स्वस्थ नस और आर्टरी की मदद से अवरुद्ध धमनी (Blocked Artery) के लिए रास्ता बनाना
* अवरुद्ध धमनी के लिए रास्ता बनाने के बाद, ब्रेस्टबोन को वापस स्टिच करके लगाए गए चीरा को बंद करना
ओपन हार्ट सर्जरी खत्म होने के बाद मरीज की छाती में 2-3 ट्यूब लगे होते हैं जिससे फ्लूइड बाहर निकलता है। इसके अलावा, मरीज को इंट्रावेनस ट्यूब भी लगी होती है जिससे उन्हें आवश्यक पोषक पहुंचाए जाते हैं। साथ ही, कैथिटर भी लगा होता है जिससे मरीज आसानी से यूरिन पास कर पाता है।
ओपन हार्ट सर्जरी खत्म होने के बाद, मरीज को कुछ 5-7 दिनों तक आईसीयू में रखा जाता है। उसके बाद, उन्हें रेगुलर केयर में और फिर बाद में सभी रिपोर्ट्स नार्मल होने के बाद दवाएं और दिशा-निर्देशों के साथ हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
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