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7 योगासन, जो हर्निया से परेशान लोगों को दे सकते हैं आराम:-
1. नौकासन (Naukasana / Boat Pose)
नौकासन बैठकर किया जाने वाला इंटरमीडिएट लेवल या मध्यम स्तर की कठिनाई वाला योगासन है। इस आसन को करने के दौरान शरीर अंग्रेजी के अक्षर V की आकृति बना लेता है। नौकासन को सिक्स पैक योगासन का हिस्सा माना जाता है।
नौकासन आपकी
लोअर बैक
बाइसेप्स और ट्राइसेप्स
कोर (एब्स)
पैर के पंजे और टखने
क्वाड्रिसेप्स
को मजबूत बनाता है।
नौकासन के नियमित अभ्यास से पेट पर दबाव पड़ता है और एब्स मजबूत होने लगते हैं। इसीलिए ये आसन कमजोर मांसपेशियों के कारण होने वाले हर्निया के उपचार में काफी मदद कर सकता है। इसका अभ्यास 10 से 20 सेकेंड तक करने की सलाह दी जाती है।
नौकासन करने की विधि :
नौकासन के लिए योग मैट पर सीधे बैठ जाएं।
टांगें आपके सामने स्ट्रेच करके रखें।
दोनों हाथों को हिप्स से थोड़ा पीछे की तरफ फर्श पर रखें।
शरीर को ऊपर की तरफ उठाएं।
रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखें।
सांस को बाहर की तरफ छोड़ें।
पैरों को फर्श से 45 डिग्री के कोण पर उठाएं।
टेलबोन को बढ़ाएं और हिप्स को नाभि के करीब ले आएं।
घुटनों को मजबूत करें। अपने टखने को सीधा करें।
टखनों को उठाकर आंख की सीध में ले आएं।
इस दौरान आप अपने बट और टेलबोन पर बैठे होंगे।
हाथों को ऊंचा उठाएं और फर्श के समानांतर स्ट्रेच करें।
सामान्य गति से सांस लेते और छोड़ते रहें।
इसी स्थिति में 10 से 20 सेकेंड तक बने रहें।
अभ्यास हो जाने पर समय बढ़ा दें।
सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आसन को छोड़ दें।
2. उत्तानासन (Uttanasana / Standing Forward Bend Pose)
उत्तानासन मध्यम कठिनाई वाला हठ योग की शैली का आसन है। इसे करने की अवधि 15 से 30 सेकेंड के बीच होनी चाहिए। इसमें किसी दोहराव की आवश्यकता नहीं होती है। उत्तानासन के अभ्यास से हिप्स, हैमस्ट्रिंग, और काव्स पर खिंचाव आता है जबकि घुटने और जांघें मजबूत हो जाती हैं।
इसके अलावा, हर्निया की समस्या होने पर उत्तानासन योग के अभ्यास से पेट की मांसपेशियों को अच्छा स्ट्रेच मिलता है। स्ट्रेच मिलने के कारण पेट की मांसपेशियों से दिखने वाले अंग बाहर से दिखना बंद हो जाते हैं।
उत्तानासन करने की विधि :
योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हाथ हिप्स पर रख लें।
सांस को भीतर खींचते हुए घुटनों को मुलायम बनाएं।
कमर को मोड़ते हुए आगे की तरफ झुकें।
शरीर को संतुलित करने की कोशिश करें।
हिप्स और टेलबोन को हल्का सा पीछे की ओर ले जाएं।
धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर की ओर उठाएं और दबाव ऊपरी जांघों पर आने लगेगा।
अपने हाथों से टखने को पीछे की ओर से पकड़ें।
आपके पैर एक-दूसरे के समानांतर रहेंगे।
आपका सीना पैर के ऊपर छूता रहेगा।
सीने की हड्डियों और प्यूबिस के बीच चौड़ा स्पेस रहेगा।
जांघों को भीतर की तरफ दबाएं और शरीर को एड़ी के बल स्थिर बनाए रखें।
सिर को नीचे की तरफ झुकाएं और टांगों के बीच से झांककर देखते रहें।
इसी स्थिति में 15-30 सेकेंड तक स्थिर बने रहें।
जब आप इस स्थिति को छोड़ना चाहें तो पेट और नीचे के अंगों को सिकोड़ें।
सांस को भीतर की ओर खींचें और हाथों को हिप्स पर रखें।
धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठें और सामान्य होकर खड़े हो जाएं।
3. हनुमानासन (Hanumanasana / Monkey Pose)
हनुमानासन को हनुमान आसन (Hanuman Asana), मर्कटासन (Markatasana), मंकी पोज (Monkey Pose) या स्पिलट्स पोज (Splits Pose) भी कहा जाता है। ये आसन हठ और विन्यास शैली का चरम या एक्सपर्ट लेवल की कठिनाई वाला योगासन है। इसका अभ्यास 30 से 60 सेकेंड तक करने की सलाह दी जाती है।
हनुमानासन के नियमित अभ्यास से जांघों में होने वाले हर्निया की समस्या को प्रभावी रूप से दूर किया जा सकता है। हनुमानासन के अभ्यास से जांघों की मांसपेशियां जबरदस्त तरीके से मजबूत हो जाती हैं।
मांसपेशियों की मजबूती के कारण भीतर से झांकने वाला मांस या वसा की परत काफी हद तक कंट्रेाल में आ जाती है। लेकिन इस आसन का अभ्यास डाॅक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए।
हनुमानासन करने की विधि :
फर्श पर घुटने के बल बैठ जाएं।
दोनों घुटनों के बीच में थोड़ा अंतर जरूर रखें।
सांस भीतर की ओर खींचें।
दाएं पैर को आगे बढ़ाएं और पैर के निचले हिस्से को उठाकर रखें।
एड़ी का बाहरी हिस्सा फर्श को छूता रहे।
सांस को छोड़ते हुए धड़ को आगे की तरफ झुकाएं।
इसके बाद अंगुलियों के पोर से फर्श को छुएं।
अब, बाएं घुटने को पीछे की तरफ ले जाएं।
पैर के सामने का हिस्सा और घुटना फर्श को छूने न लगे।
अभी भी, दाएं पैर को आगे की तरफ खींचकर रखें।
ध्यान दें कि, टखने ऊपर की तरफ रहेंगे।
बाएं पैर को पीछे की तरफ खींचकर रखें।
बाएं पैर का टखना भी फर्श को छूता रहेगा।
दोनों हाथों को सिर से ऊपर की तरफ उठाएं।
सिर के ऊपर हथेली जोड़कर नमस्कार करें।
अब दोनों हाथों को ऊपर की तरफ खींचें।
अब धीरे-धीरे अपनी पीठ को सुविधानुसार मोड़ें।
इस स्थिति में एक मिनट तक बने रहें।
आसन से बाहर आने के लिए शरीर का भार हाथों पर शिफ्ट करें।
हाथों को फर्श पर मजबूती से फर्श की तरफ दबाएं।
दोनों पैरों को धीरे-धीरे वापस खींचते हुए पुरानी पोजिशन में ले आएं।
अब इसी आसन को अपने बाएं पैर को आगे रखते हुए करें।
4. पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana / Wind Relieving Pose)
पवनमुक्तासन पेट के पाचन तंत्र (Digestive Tract) से अनावश्यक गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। इसलिए इसे अंग्रेजी में हवा बाहर निकालने का आसन (Wind Releasing Pose) कहा जाता है। पवनमुक्तासन एक उत्कृष्ट आसन है, जो अच्छे पाचन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
पवनमुक्तासन पेट एवं कमर की मांसपेशियों के खिंचाव को (Tone) करने में मदद करता है। खराब पाचन (Indigestion) या हर्निया की समस्याओं से पीड़ित मरीजों को आमतौर पर पवनमुक्तासन करने की ही सलाह दी जाती है।
शुरुआत में इस आसन को करने में थोड़ी कठिनाई जरूर होती है, लेकिन नियमित अभ्यास से पवनमुक्तासन को बड़े आसानी से किया जा सकता है। हर्निया की समस्या को ये योगासन कारगर तरीके से दूर कर सकता है।
पवनमुक्तासन करने की विधि :
योग मैट पर पेट के बल शवासन (Shavasana) में लेट जाएं।
बाएं घुटने को मोड़ते हुए उसे पेट के पास तक ले आएं।
सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाएं।
अंगुलियों को घुटनों के नीचे रखेंगे।
अब बाएं घुटने से सीने को छूने की कोशिश कीजिए।
सिर जमीन से ऊपर उठाएं और घुटने को नाक से छूने की कोशिश करें।
नाक को घुटनों से छूने के बाद 10 से 30 सेकेंड तक इसी मुद्रा में रहें।
धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य हो जाएं।
अब यही प्रक्रिया दाएं पैर से भी कीजिए।
एक योग सेशन में 3 से 5 बार इस मुद्रा को दोहराएं।
5. हलासन (Halasana / Plough Pose)
हलासन को अंग्रेजी भाषा में Halasana और Plow Pose भी कहा जाता है। हलासन का अभ्यास 30 से 60 सेकेंड तक करने की सलाह दी जाती है। इसमें कोई दोहराव नहीं होता है।
हलासन, हठ योग का आसन है। ये साधारण कठिनाई वाला आसन माना जाता है। इसे करने की अवधि 30 से 60 सेकेंड तक बताई गई है। इसे करने के बाद किसी किस्म का दोहराव नहीं करना पड़ता है। हलासन के अभ्यास से कंधे और पसलियों को अच्छा स्ट्रेच मिलता है। जबकि ये स्पाइन और गर्दन को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।
हलासन के नियमित अभ्यास से पेट के हर्निया की समस्या में विशेष लाभ मिलता है। जब हलासन में पैरों से पीछे भूमि को स्पर्श किया जाता है तो, पेट पर विशेष दबाव पड़ता है। इस दबाव के कारण ही पेट की मांसपेशियां मजबूत और लचीली होने लगती हैं। जिससे भीतरी अंगों का बाहर से दिखना बंद हो जाता है।
हलासन करने की विधि :
योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
अपने हाथों को शरीर से सटा लें। हथेलियां जमीन की तरफ रहेंगी।
सांस भीतर की ओर खींचते हुए पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं।
टांगे कमर से 90 डिग्री का कोण बनाएंगी। दबाव पेट की मांसपेशियों पर रहेगा।
टांगों को ऊपर उठाते हुए अपने हाथों से कमर को सहारा दें।
सीधी टांगों को सिर की तरफ झुकाएं और पैरों को सिर के पीछे ले जाएं।
पैरों के अंगूठे से जमीन को छुएंगे।
हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर सीधा रख लें। हथेली नीचे की तरफ रहेगी।
कमर जमीन के समानांतर रहेगी। इसी स्थिति में एक मिनट तक बने रहें
सांसों पर ध्यान केंद्रित करें सांस छोड़ते हुए, टांगों को वापस जमीन पर ले आएं।
आसन को छोड़ते हुए जल्दबाजी न करें।
टांगों को एक समान गति से ही सामान्य स्थिति में वापस लेकर आएं।
6. विपरीत करणी (Viparita Karani / Legs Up The Wall Pose)
विपरीत करणी योगासन रीस्टोरेटिव योग का हिस्सा है जो, शरीर को हुए नुकसान की भरपाई करता है। इसमें शरीर को उल्टा रखना होता है। ये शरीर में स्ट्रेस के लेवल को कम करता है जिससे ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का लेवल कम रहता है। ये सिरदर्द को दूर रखता हैए एनर्जी को बूस्ट करता है और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करता है।
हर्निया की समस्या में ये पेट को सपोर्ट करता है। इसके नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं। खासतौर पर नाभि के आसपास के हिस्से में होने वाली हर्निया की शिकायत में ये योगासन बहुत ही प्रभावी तरीके से काम करता है। ये जांघों को भी मजबूत बनाने में सहयोग करता है।
ये आसन शरीर की निम्नलिखित मसल्स पर काम करता है :
हैमस्ट्रिंग्स
पेल्विक मसल्स
लोअर बैक
सामने का धड़
गर्दन के पीछे का हिस्सा
विपरीत करणी योग करने की विधि :
योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
दोनों हाथ और पैरों को जमीन पर सीधा रखें।
धीरे.धीरे दोनों पैरों को ऊपर उठाएं।
ऊपर के शरीर को फर्श पर ही रखा रहने दें।
दोनों पैरों को 90 डिग्री कोण तक ऊपर उठाएं।
आराम पाने के लिए कूल्हों के नीचे तकिया या कंबल को मोड़कर रख लें।
सुनिश्चित करें कि आपकी पीठ और सिर फर्श पर आराम कर रहे हैं।
आंखों को बंद करें और इस स्थिति में 5.15 मिनट के लिए रुकें।
7. पादहस्तासन (Padahastasana / Hand To Foot Pose)
पादहस्तासन मध्यम कठिनाई वाला हठ योग की शैली का आसन है। इसे करने की अवधि 15 से 30 सेकेंड के बीच होनी चाहिए। इसमें किसी दोहराव की आवश्यकता नहीं होती है। पादहस्तासन के अभ्यास से हिप्स, हैमस्ट्रिंग, और काव्स पर खिंचाव आता है जबकि घुटने और जांघें मजबूत हो जाती हैं।
इस आसन का विस्तार शरीर में पीठ के निचले, मध्य और ऊपरी हिस्से तक है, गर्दन से आसन का प्रभाव सिर तक जाता है, फिर माथे तक, और भौंहों के बीच में समाप्त होता है। इस आसन के दौरान शरीर की मांसपेशियां और संयोजी ऊतक पूरे विस्तार में फैल जाते हैं।
हर्निया की समस्या होने पर रोज इस आसन को करने की सलाह दी जाती है। पादहस्तासन के नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां सुगठित होने लगती हैं। पेट की सुगठित मांसपेशियां भीतरी अंगों या फैट सेल्स को बाहर निकलने से रोक पाती हैं। योग का ये आसन शरीर में हुए किसी भी किस्म के हर्निया के उपचार में कारगर है।
पादहस्तासन करने की विधि :
योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हाथ हिप्स पर रख लें।
सांस को भीतर खींचते हुए घुटनों को मुलायम बनाएं।
कमर को मोड़ते हुए आगे की तरफ झुकें।
शरीर को संतुलित करने की कोशिश करें।
हिप्स और टेलबोन को हल्का सा पीछे की ओर ले जाएं।
धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर की ओर उठाएं और दबाव ऊपरी जांघों पर आने लगेगा।
अपने हाथों को पैर के पंजे के नीचे दबा लें।
आपके पैर एक-दूसरे के समानांतर रहेंगे।
आपका सीना पैर के ऊपर छूता रहेगा।
सीने की हड्डियों और प्यूबिस के बीच चौड़ा स्पेस रहेगा।
जांघों को भीतर की तरफ दबाएं और शरीर को एड़ी के बल स्थिर बनाए रखें।
सिर को नीचे की तरफ झुकाएं और टांगों के बीच से झांककर देखते रहें।
इसी स्थिति में 15-30 सेकेंड तक स्थिर बने रहें।
जब आप इस स्थिति को छोड़ना चाहें तो पेट और नीचे के अंगों को सिकोड़ें।
सांस को भीतर की ओर खींचें और हाथों को हिप्स पर रखें।
धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठें और सामान्य होकर खड़े हो जाएं।
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