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स्पॉटिंग क्या है?

हर महीने अपनी मेंस्ट्रुअल साइकिल (माहवारी) के दौरान एक महिला के साथ हॉर्मोन से जुड़े कई बदलाव होते हैं, जोकि आम तौर पर 3 से 7 दिन तक रहता है। पीरियड को छोड़कर अगर कभी आपको हल्का वजाइनल ब्लीडिंग देखने को मिलता है, तो इसे ‘स्पॉटिंग’ कहा जा सकता है। इस प्रकार की ब्लीडिंग का मतलब कोई बिमारी नहीं होता। मेंस्ट्रुअल साइकिल में अनियमितता और देर होना स्पॉटिंग के आम कारणों में से एक हो सकता है। महिलाओं की उम्र के आधार पर डिस्फ़न्क्शनल यूटेरिन ब्लीडिंग के कई कारण होते हैं।

शरीर के अंदर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन में असंतुलन होने से पीरियड में देर या चूक हो सकती है, जसिकी वजह से कभी-कभी हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। इसके लिए पैड या टेम्पन का इस्तेमाल करना ज़रूरी नहीं होता है। इसे अपने पीरियड के साथ जोड़ने की कोशिश ना करें। ब्लड टेस्ट, थायरॉइड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, कम्पलीट ब्लड काउंट (सीबीसी), और प्रेगनेंसी टेस्ट भी इस तरह से बार-बार स्पॉटिंग होने के कारण हो सकते हैं। अगर आपके शरीर में हॉर्मोन के ट्रीटमेंट से कुछ सुधार नहीं आ रहा है, तो अपने डॉक्टर से मिलकर फाइब्रॉइड्स, ट्यूमर्स या यूटेरस में इंफेक्शन/संक्रमण जैसे अन्य कारणों की जांच करें। हॉर्मोनल प्रिस्क्रिप्शन लेते हुए इस बात का भी ध्यान रखें कि आपके पीरियड नियमित हो रहे हैं या नहीं। अगर दवाइयों से कोई सुधार नहीं आ रहा हो तो, आपको हिस्टेरोस्कोपी करवानी पड़ सकती है। इसमें यूटेरस की जांच के द्वारा ब्लीडिंग होने के कारण का पता लगाया जाता है।
स्पॉटिंग में थोड़ा-सा ही खून बहता है। इसकी मात्रा कम होती है और यह बहुत दिनों तक नहीं होता। जहां आपके पीरियड्स में हफ्तेभर तक ब्लीडिंग हो सकती है, वहीं स्पॉटिंग केवल दो दिन तक ही रह सकता है।

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