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– थक्करोधी दवाऐं स्ट्रोक आने के 3 से 4.5 घंटे (गोल्डन पीरियड) तक ही कारगर होती है। यदि मरीज गोल्डन पीरियड के भीतर अस्पताल नहीं पहुंचता है तो उसे तुरंत इस उपचार तकनीक का चुनाव करना चाहिए। – खून पतला करने वाली दवाओं देने के बाद भी यदि मरीज रिकवर नहीं हो रहा है तो उसे कैथ लैब में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी के लिए जाना चाहिए।

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