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ज्यादातर लोग पैरालिसिस और ब्रेन स्ट्रोक को अलग-अलग समस्या मानते हैं, लेकिन दोनों चीजें एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं. अगर किसी को ब्रेन स्ट्रोक होता है तो निश्चित रूप से पैरालिसिस के लक्षण सामने आएंगे. ब्रेन स्ट्रोक एक जानलेवा स्थिति है. सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कहीं ज्यादा बढ़ जाता है. खासतौर पर बाथरूम में नहाते समय स्ट्रोक के तमाम मामले सर्दियों में सामने आते हैं. इसे बाथरूम स्ट्रोक कहा जाता है. जानिए इसकी वजह और ब्रेन स्ट्रोक से जुड़ी अन्य बातें.
सर्दियों में भी तमाम लोग ठंडे पानी से नहाते हैं और शॉवर का इस्तेमाल करते हैं. नहाते समय अगर सीधे सिर पर पानी डाला जाए तो सर्दी के असर को मस्तिष्क की महीन नलिकाएं कई बार बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं और सिकुड़ जाती हैं. ऐसे में सिर की ठंडक को सामान्य करने के लिए दिमाग में तापमान को नियंत्रित करने वाला एड्रेनलिन हार्मोन तेजी से रिलीज होने लगता है और इसके कारण ब्लड प्रेशर बढ़ता है. दिमाग में रक्तसंचार तेज होने से ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति बन जाती है.
इन लोगों को रहना चाहिए अलर्ट
बाथरूम स्ट्रोक की समस्या वैसे तो किसी के सामने भी आ सकती है, लेकिन इस मामले में बुजुर्गों को खासतौर पर सावधानी बरतने की जरूरत होती है. बढ़ती उम्र के साथ उनकी दिमागी कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं. ऐसे में जब ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ता है तो धमनियों में खून का थक्का जम जाता है. इसे ही ब्रेन स्ट्रोक कहा जाता है. कई बार दिमाग में रक्त संचार बहुत तेज होने से नस फट भी जाती है, इसे ब्रेन हेमरेज कहा जाता है. लेकिन अक्सर देखा जाता है कि स्ट्रोक के ज्यादातर मामले क्लॉटिंग के होते हैं. इसके अलावा मोटापा, हृदय रोग, डायबिटीज, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल की अधिकता आदि को भी इसकी वजहों में से एक माना जाता है. इन मरीजों को भी विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए.
ब्रेन स्ट्रोक का मुख्य लक्षण है पैरालिसिस
पैरालिसिस ब्रेन स्ट्रोक का मुख्य लक्षण है. दरअसल ब्रेन के दो हिस्से होते हैं. सामान्य भाषा में समझें तो ब्रेन के दाएं हिस्से से शरीर का बायां हिस्सा कंट्रोल होता है और ब्रेन के बाएं हिस्से से शरीर का दाया भाग नियंत्रित किया जाता है. अगर ब्रेन के दाएं हिस्से में स्ट्रोक होगा तो शरीर के बाएं हिस्से में पैरालिसिस पड़ेगा और बाएं हिस्से में स्ट्रोक होने पर शरीर के दाएं हिस्से में पैरालिसिस का असर दिखेगा. ऐसे में मुंह, हाथ-पैर टेढ़ा होना, आवाज लड़खड़ाना और आंखों में समस्या आदि लक्षण दिखाई देते हैं.
एमरजेंसी की स्थिति है स्ट्रोक
स्ट्रोक को एमरजेंसी की स्थिति माना गया है, इसलिए कभी भी इसको लेकर लापरवाही न बरतें. आपको अगर किसी भी शख्स में पैरालिसिस के लक्षण जैसे शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, हाथ पैरों में सुन्नपन, आवाज लड़खड़ाना, बात समझने में परेशानी, मुंह, आंख आदि में टेढ़ापन आदि लक्षण दिखें तो फौरन उसे अस्पताल पहुंचाइए. ब्रेन स्ट्रोक में मरीज को जितनी जल्दी इलाज मिलेगा, उतनी जल्दी और अच्छी उसकी रिकवरी होगी. स्ट्रोक की कुछ दवाएं ऐसी हैं जो शुरू के चार घंटे के अंदर ही असर करती हैं. इसलिए जरा सी लापरवाही मरीज के लिए समस्या पैदा कर सकती है.
क्या करें
स्ट्रोक की समस्या से बचने के लिए सर्दियों में नहाते समय गुनगुने पानी का प्रयोग करें. सीधे सिर पर पानी डालने के बजाए नहाने की शुरुआत पैरों से करें. इसके बाद घुटने, जांघ, पेट, की सफाई करते हुए शरीर पर पानी डालें। सबसे आखिरी में सिर पर पानी डालें.
हाई बीपी के मरीज नमक सीमित मात्रा में लें और नियमित रूप से अपनी दवाएं लें. अधिक वजन को कंट्रोल करें. खानपान हेल्दी रखें. चिकना और गरिष्ठ भोजन खाने से परहेज करें. बाहरी फूड खाने से परहेज करें.
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