healthplanet.net

Posted on

सोरायसिस एक स्किन संबंधी बीमारी है, जिसे स्किन का अस्थमा भी कहा जाता है। इसमें स्किन सेल्स काफी तेजी से बढ़ते हैं। इसमें स्किन की ऊपरी परत पर पपड़ी बन जाती है और वह छिल जाती है। इससे स्किन में शुष्कता आ जाती है और सफेद धब्बे पड़ जाते हैं।

सोरायसिस या छालरोग (Psoriasis Meaning in Hindi) सबसे अधिक परेशान करने वाला और त्वचा विकारों में से एक है। सोरायसिस एक नॉन कान्टेजियस, पुराना त्वचा रोग है जो रोगी के शरीर पर मोटी और स्केली स्किन के प्लेक्स बनता है। यह त्वचा की कोशिकाओं की एक विशेषता है या बीमारी है जो सामान्य से 10 गुना तेज़ी से बढ़ते हैं। सोरायसिस (Psoriasis in Hindi) एक पुरानी बीमारी है जो अक्सर आती है और जाती है। यह मुख्यतः आपके इम्यून सिस्टम से जुडी एक बीमारी होती है। सोरायसिस आमतौर पर कोहनी, घुटनों और खोपड़ी की त्वचा को प्रभावित करता है। इसके उपचार का मुख्य लक्ष्य इन सेल्स को इतनी जल्दी बढ़ने से रोकना है। छालरोग के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन आप इसके लक्षणों का पता करके उन्हें कंट्रोल क्र सकते हैं। इसके लिए आपको ये बदलाव लेन पड़ेंगें- मॉइस्चराइजिंग क्रीम डेली लगायें, धूम्रपान छोड़ दें, तनाव न लें, इन सभी को अपनाकर आप सोरायसिस या छालरोग से बच सकते हैं।
सोरायसिस का अर्थ हिंदी में (Psoriasis Meaning in Hindi)

छालरोग या सोरायसिस एक ना फैलने वाली, पुरानी त्वचा से related स्थिति होती है जो मोटा होना, स्केलिंग त्वचा की खुजली वाली स्किन का उत्पादन करती है। त्वचा की कोशिकाओं के अत्यधिक तेज़ प्रसार की वजह से त्वचा पर सूखे टुकड़े परिणामस्वरूप हो जाते हैं। लिम्फोसाइट्स नामक विशेष सफेद रक्त कोशिकाओं द्वारा उत्पादित सूजन रसायनों त्वचा कोशिकाओं के प्रसार को गति प्रदान करती हैं। छालरोग (Psoriasis meaning in Hindi) आमतौर पर कोहनी, घुटनों और खोपड़ी की त्वचा को प्रभावित करता है बीमारी के स्पेक्ट्रम को हल्के से लेकर त्वचा के छोटे क्षेत्रों तक सीमित होने के साथ बड़े, मोटी सजीले टुकड़े लाल सूजन वाली त्वचा को पूरे शरीर की सतह को प्रभावित करते हैं। छालरोग (Psoriasis in Hindi) को एक असाध्य, दीर्घावधि (क्रोनिक) भड़काऊ त्वचा की स्थिति माना जाता है। इस रोग में यह स्केली स्किन समय-समय पर सुधारती और बिगड़ती रहती है। वर्षों की स्टडी से पता चलता है की छालरोग या सोरायसिस सामान्य बीमारी नहीं है। बहुत से लोगों में इसके लक्षण ठंडे सर्दियों के महीनों में अपने आप बिगड़ने लगते हैं।

सोरायसिस या छालरोग (Psoriasis in Hindi) किसी भी जाति और किसी भी लिंग वाले लोगों को हो सकता है यद्यपि किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है, बच्चों से लेकर बुढ्ढों तक। सबसे पहले रोगियों को इसके लक्षण पहचान क्र उनके शुरुआती वर्षों में इसका निदान किया जाता है। बहुत बार छालरोग के रोगियों में अपनी इस प्रकार की स्किन बीमारी की वजह से जीवन जीने की चाह थोड़ी कम हो जाती है। हाल ही में, यह स्पष्ट हो गया है कि छालरोग वाले लोगों में मधुमेह, उच्च रक्त लिपिड, हृदय रोग, और अन्य कई सूजनकारी बीमारियां काफी आम होती हैं। यह सूजन को नियंत्रित करने में असमर्थता को दर्शा सकता है। छालरोग के लिए देखभाल मेडिकल टीम वर्क है।

solved 5
wordpress ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author ->

Short info