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जब कोई महिला गर्भवती हो जाती है तो उसे समय-समय पर गर्भवती होने से लेकर के बच्चा पैदा करने तक अपना सोनोग्राफी टेस्ट करवाना होता है, जिसे अल्ट्रासाउंड टेस्ट भी कहा जाता है। अल्ट्रासाउंड टेस्ट किसी अनुभवी डॉक्टर के द्वारा ही करवाया जाना उचित माना जाता है।
सबसे पहले पेशेंट के पेट पर एक जेल इमप्लांट किया जाता है और उसे पेशेंट के पेट के ऊपर ठीक प्रकार से फैलाया जाता है। अब आपके बच्चे दानी में आवाज की तरंगें पैदा करने के लिए ट्रांसड्यूसर को यूज में लिया जाता है और इसके जरिए बच्चे का आकार कागज के आकार के प्लास्टिक पर प्रिंट हो जाता है। इस टेस्ट को करने के लिए मशीन के द्वारा महिला के पेट में पल रहे बच्चे की स्कैनिंग की जाती है, जिसके कारण बच्चे की स्थिति का प्रिंट आउट एक्स-रे टाइप के एक प्लास्टिक के पेपर में आता है और फिर डॉक्टर उसकी जांच करके महिला के पेट में पल रहे बच्चे की रिपोर्ट तैयार करते हैं।

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