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सूखी खांसी (Dry cough)
सूखी खांसी के प्रकारसूखी खांसी के लक्षणसूखी खांसी के कारणसूखी खांसी का निदानसूखी खांसी की रोकथामसूखी खांसी का इलाज
खांसी शरीर के एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिससे वह श्वसन मार्गों को खोलता है। खांसी आमतौ पर दो प्रकार की होती है, जिसमें सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी शामिल है। सूखी खांसी में किसी प्रकार की बलगम या कफ नहीं बनती है। वहीं बलगम वाली खांसी में खांसने के साथ-साथ बलगम और कफ आता है। सूखी खांसी अक्सर फेफड़ों संबंधी कुछ समस्याओं जैसे ब्रोंकाइटिस, निमोनिया व अस्थमा, एलर्जी और जुकाम जैसी रोगों के कारण होती है। वहीं कुछ लोगों को धूम्रपान करने, ठंडी चीजें खाने और तले हुए खाद्य पदार्थ खाने के कारण भी यह समस्या हो सकती है। कई बार सूखी खांसी के कारण लोगों को गले में गांठ महसूस होती है, जबकि अन्य लोगों को गले में गुदगुदी या खुजली महसूस होती है। जुकाम व फ्लू के कारण होने वाली सूखी खांसी आमतौर पर एक से दो हफ्तों तक रहती है और तीसरे हफ्ते तक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। वहीं अगर किसी वायरल इंफेक्शन के कारण सूखी खांसी हुई है, तो यह 8 हफ्तों तक भी रह सकती है। इसलिए सूखी खांसी को क्रोनिक माना जाता है, क्योंकि यह वयस्कों 8 और छोटे बच्चों में 4 हफ्तों तक रह सकती है। वहीं अगर सूखी खांसी वयस्कों में 2 हफ्तों तक ठीक हो जाती है, तो इसे एक्यूट ड्राइ कफ कहा जाता है।
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सूखी खांसी के प्रकार
सूखी खांसी के भी कई प्रकार हो सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -
हैकिंग कफ - सूखी खांसी का यह प्रकार आमतौर पर वायरल इंफेक्शन के मामलों में होता है। इस स्थिति में लगातार खांसी होती है और साथ ही ऐसा महसूस होता है जैसे गले में कुछ फंसा हुआ है। अगर सूखी खांसी के लक्षण गंभीर हो गए हैं, तो डॉक्टर इसका इलाज कराने की सलाह दे सकते हैं।
क्रुप खांसी - इसे बार्किंग कफ भी कहा जाता है और यह अधिकतर मामलों में लैरिंक्स (वॉइस बॉक्स) में सूजन या संक्रमण (लैरिंजाइटिस) के कारण होता है। क्रुप खांसी के दौरान व्यक्ति गले में दर्द महसूस होता है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
वूपिंग कफ - यह सूखी खांसी का तीसरा प्रकार है, जो आमतौर पर बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। वूपिंग कफ आमतौर पर बच्चों को होती है और इसमें मरीज को तेज खांसी होती है, जिस दौरान वह गहरी सांस लेता है। हालांकि इसका कारण बनने वाली समस्याओं के लिए भारत में वैक्सीन लगाई जाती हैं इसलिए सूखी खांसी का यह प्रकार काफी कम देखने को मिलता है।
सूखी खांसी के लक्षण
बलगम के बिना या बहुत ही कम बलगम के साथ खांसी होना इसका सबसे प्रमुख लक्षण होता है। हालांकि, इस दौरान कुछ अन्य लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं, जैसे -
थूक या बलगम के साथ खून आना
सांस फूलना या सांस लेने में दिक्कत
बुखार
छाती में दर्द होना
शरीर का वजन कम होना
डॉक्टर को कब दिखाएं?
अगर आपको सूखी खांसी महसूस हो रही है और एक दो दिन तक उसके लक्षण कम होने की बजाय उल्टा बढ़ रहे हैं, तो ऐसे में डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। वहीं अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई एक भी महसूस हो रहा है, तो ऐसे में भी डॉक्टर से बात कर लेना ही उचित हो सकता है।
सूखी खांसी के कारण
सूखी खांसी कई अलग-अलग कारणों से विकसित हो सकती है, जिनमें से प्रमुख रूप से निम्न शामिल हैं -
अस्थमा - यह एक श्वसन संबंधी समस्या है, जिसमें श्वसन मार्गों में सूजन आने के कारण मार्ग संकुचित होने लगते हैं। अस्थमा सूखी व बलगम वाली दोनों प्रकार की खांसी पैदा कर सकता है।
गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) - यह सीने में जलन पैदा करने वाला सबसे प्रमुख रोग है। हालांकि, कई बार यह सूखी खांसी भी पैदा कर सकता है। जब किसी कारण से पेट में मौजूद अम्ल व अन्य एसिड पदार्थ वापस भोजन नली में आ जाते हैं तो उसमें इस कारण से खांसी की दिक्कत हो सकती है।
पोस्टनेजल ड्रिप - इस स्थिति में नाक में मौजूद द्रव गले की तरफ जाने लग जाते हैं और इस कारण से खांसी की समस्या होने लगती है। हालांकि, पोस्टनेजल ड्रिप के कारण कई बार बलगम वाली खांसी भी हो सकती है। कई मामलों में साइनस इंफेक्शन या एलर्जी जैसी समस्याएं ही पोस्टनेजल ड्रिप का कारण बनती हैं।
ऊपरी श्वसन तंत्र में वायरल इंफेक्शन - कई बार वायरल इंफेक्शन के बाद भी लंबे समय तक आपको सूखी खांसी की समस्या रह सकती है। यह खांसी कई बार दो महीनों तक रह सकती है और कई बार इससे श्वसन मार्गों में खुजली जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
सूखी खांसी के जोखिम कारक
ऐसे कई कारक मौजूद हैं, जो सूखी खांसी होने के खतरे को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं -
धूम्रपान करना - यह सूखी खांसी होने के सबसे प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। धूम्रपान के दौरान धुएं में मौजूद जो विषाक्त पदार्थ फेफड़ों के अंदर जाते हैं, जिस कारण से सूखी खांसी होती है।
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना - अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आते हैं, जिन्हें श्वसन तंत्र से संबंधित संक्रमण है, तो आपको सूखी खांसी होने का खतरा बढ़ सकता है।
एलर्जी - अगर आपको किसी पदार्थ या वस्तु से एलर्जी है, तो उसके संपर्क में आने के कारण भी आपको सूखी खांसी होने का खतरा बढ़ सकता है।
वातावरणीय कारक - हवा में मौजूद उत्तेजक पदार्थ जैसे धूल-मिट्टी, धुएं व अन्य गैस आदि भी सूखी खांसी का कारण बन सकती हैं।
फेफड़ों से संबंधित रोग - जिन लोगों को फेफड़ों से संबंधित कोई दीर्घकालिक बीमारी (COPD) है, तो उन्हें सूखी खांसी व सांस संबंधी रोग होने का खतरा अधिक रहता है।
महिलाएं - पुरुषों से अधिक महिलाओं को सूखी खांसी होने का खतरा अधिक रहता है।
सूखी खांसी का निदान
सूखी खांसी के निदान के दौरान डॉक्टर सबसे पहले खांसी के प्रकार का पता लगाते हैं। आपके खांसने के दौरान वे आपकी छाती से निकलने वाली ध्वनि को स्टेथोस्कोप से सुनने की कोशिश करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं आपकी छाती में बलगम तो नहीं जमी हुई है। साथ ही सूखी खांसी के अंदरूनी कारण का पता लगाने के लिए कुछ अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -
इमेजिंग टेस्ट - इसमें एक्स रे, सीटी स्कैन या ब्रोंकोस्कोपी आदि शामिल हैं, जिसकी मदद से श्वसन मार्गों में संक्रमण व अन्य समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।
स्पाइरोमेट्री - इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर आपको एक उपकरण में सांस लेने को कहते हैं। इस टेस्ट की मदद से फेफड़ों की स्थिति की जांच की जाती है और अस्थमा जैसी समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।
सूखी खांसी की रोकथाम
कुछ सामान्य तरीकों से सूखी खांसी से बचाव किया जा सकता है, जिनमें निम्न शामिल हैं -
धूम्रपान न करें
फाइबर से भरपूर आहार लें
ब्रोंकाइटिस या निमोनिया से ग्रस्त लोगों से दूर रहें
पर्याप्त पानी पिएं और शरीर में पानी की कमी न होनें दें
सोते समय सिर के नीचे उचित आकार का तकिया लगाएं
अधिक धुएं, धूल या वायु प्रदूषण वाली जगह पर न जाएं
सूखी खांसी का इलाज
सूखी खांसी का इलाज आमतौर पर उसके अंदरूनी कारणों पर निर्भर करता है। सूखी खांसी के इलाज में आमतौर पर निम्न शामिल हैं -
एंटीहिस्टामिन - अगर किसी प्रकार की एलर्जी के कारण सूखी खांसी की समस्या हुई है, तो डॉक्टर एंटीहिस्टामिन दवाएं दे सकते हैं।
एंटीबायोटिक - जिन लोगों को किसी प्रकार के बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण सूखी खांसी की दिक्कत हुई है, तो ऐसी स्थितियों का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
इनहेलर - अगर अस्थमा के कारण सूखी खांसी की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर कोर्टिकोस्टेरॉयड या अस्थमा के इनहेलर दे सकते हैं। कोर्टिकोस्टेरॉयड श्वसन मार्गों में हुई सूजन को कम करने में मदद करते हैं और ब्रोंकोडायलेटर मांसपेशियों को शांत करके श्वसन मार्गों को खोलने में मदद करते हैं।
कफ सिरप - डॉक्टर खांसी के लक्षणों को रोकने के लिए कुछ प्रकार के कफ सिरप भी दे सकते हैं, जिनकी मदद जो गले में हो रही खुजली, जलन व अन्य तकलीफ को कम करते हैं, जिससे सूखी खांसी में भी आराम मिलता है।
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