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खांसी इतने तरह की होती है कि आम इंसान के लिए इनके नाम और कारण समझना बिल्कुल आसान नहीं है. जब आयुर्वेदिक डॉक्टर ने हमें खांसी के प्रकार बताने शुरू किए तो हमने उनसे निवेदन किया कि आप हमें उस आसान भाषा में बताइए कि हम भी समझ पाएं और हमारे पाठकों को भी बात पूरी तरह समझ में आए ताकि वे दैनिक जीवन में किसी भी कारण से होने वाली खांसी की समस्या को अपने स्तर पर ठीक कर सकें. बाकि जब स्थिति हाथ से बाहर होती है तो सभी के लिए जरूरी होता है कि डॉक्टर की सहायता ली जाए. तो आइए आपको बताते हैं कि आमतौर पर खांसी कितने प्रकार की होती है, किन कारणों से होती है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...खांसी के प्रकार
आयुर्वेद के अनुसार खांसी कई प्रकार की होती है और इनके प्रकार के आधार पर ही इनका उपचार होता है. लेकिन जैसे ही आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर सुरेंद्र सिंह राजपूत ने हमें खांसी के 6 प्रकार गिनाए, उनके आगे बढ़ने से पहले ही हमने उनसे रुकने का अनुरोध किया. उन्होंने हमें बताया कि सतही तौर पर बात करें तो खांसी दो प्रकार की होती है. पहली सूखी खांसी जिसमें खांसी का धसका उठता है और दूसरी गीली खांसी, जिसके साथ बलगम (म्यूकस) भी आता है.
सूखी खांसी में क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
खांसी किसी भी प्रकार की हो, उसमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको खांसी हुई किस मौसम में है. मौसम के अनुसार ही खांसी का उपचार और खान-पान का ध्यान रखा जाता है. कुछ आसान उपाय जिन्हें कोई भी समझदार व्यक्ति अपनी खांसी को ठीक करने के लिए कर सकता है, वे इस प्रकार हैं...
सूखी खांसी में क्या करें और क्या ना करें
अगर सूखी खांसी गर्मी में आ रही है तो ठंडी और मीठी चीज खाएं. जैसे, खीर, दही-चीनी. मावे से बनी कोई मिठाई. ताजा पनीर इत्यादि. ध्यान रखें कि यहां ठंडी का अर्थ फ्रिज में रखी हुई चीजों से नहीं है बल्कि उन चीजों से है, जो गुणों में ठंडी होती हैं और शरीर को शीतलता और स्निग्धता (Calmness and Moisture) प्रदान करती हैं.
गर्मी में सूखी खांसी आने के दौरान आप गुड़ का सेवन कर सकते हैं. हालांकि गुड़ तासीर में गर्म होता है लेकिन ये सूखी खांसी में आराम देता है और कफ निस्तारक यानी कफ को बाहर निकालने वाला और इसके कारणों को शांत करने वाला होता है.
क्या नहीं खाना है: बर्फ ना खाएं, फ्रिज में रखा हुआ ठंडा पानी ना पिएं.
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