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5 कारण जिनसे आपकी आवाज हो जाती है कर्कश!
ख़राब या कर्कश आवाज़ कैंसर का संकेत हो सकती है!
कभी-कभी ख़राब थ्रोट इंफेक्शन आपकी आवाज़ को इस हद तक कर्कश बना देती है कि आपकी मम्मी के लिए भी फोन पर आपकी आवाज़ पहचानना मुश्किल हो जाती है। आवाज़ में कर्कशता या आवाज़ बैठना हमारी आवाज़ की गुणवत्ता में एक असामान्य परिवर्तन होता है जो इसे कर्कश और अस्पष्ट बना देता है। लोगों को अचानक से अपनी आवाज़ बैठने का अहसास होता है और वो गाने या बहुत देर तक बात करने में दिक्कत महसूस करते हैं।
ऐसा आमतौर पर तब होता है जब लेरिंगक्स(larynx ) जैसे अंगों और वोकल ट्रैक में कोई समस्या आ जाती है, और आपकी आवाज़ कठोर और अप्रिय बन जाती है। आवाज़ की गुणवत्ता में बदलाव के लिए बहुत चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि साधारण सर्दी या थ्रोट इंफेक्शन होने पर आपकी आवाज़ एक सप्ताह में पहले जैसी हो जाती है। हालांकि, हमारे गले को ख़राब करने वाले सभी कारण सर्दी जैसे कम नुकसान वाले नहीं होते। कई बार यह साधारण बात भी हो सकती है और कई बार किसी बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। एसआरवी हॉस्पिटल, गोरेगांव(मुंबई) के ईयर नोज़ थ्रोट स्पेशलिस्ट, डॉ. गौरव वाड़कर बता रहे हैं ऐसे 5 कारण जिनकी वजह से हो सकती है हमारी आवाज़ ख़राब।
एलर्जी
एलर्जी गला ख़राब होने के सबसे आम कारणों में से है। जब आप रेशे, धूल-मिट्टी या बिल्ली के बाल जैसी चीज़ों के सम्पर्क में आते हैं तो आपके गले की परतों में सूजन के रुप में प्रतिक्रिया होती है। वोकल फोल्ड में यह सूजन कंठनली या लेरिंगक्स के कार्यप्रणाली पर असर डालती है। इसके चलते कभी-कभी आपकी आवाज़ ख़राशवाली या भारी भरकम सुनाई पड़ती है।
मस्तिष्क संबंधी समस्याएं- कुछ मस्तिष्क संबंधी समस्याएं मस्तिष्क और वोकल कॉर्ड्स के बीच संकेत भेजने और प्राप्त करने में रुकावट का कारण बन सकती है। इससे व्यक्ति की आवाज में एक महत्वपूर्ण बदलाव आ जाता है। तंत्रिका पक्षाघात या लेरिंजिअल नर्व पाल्सी (laryngeal nerve palsy), पार्किंसन्स (Parkinson’s) और मियासथीनिया ग्रेविस (Myasthenia Gravis) जैसी मानसिक समस्याएं ऐसे ही कारण हैं। फोकल परतों में भी एक व्यक्ति की आवाज की गुणवत्ता को बदल सकते हैं। शक्तिहीन फोकल परतों की वजह से भी हमारी आवाज़ की गुणवत्ता में बदलाव आ सकता है।
गांठ और पॉलिप
ट्रेनर, वक्ता, शिक्षक और मिमिक्री कलाकार या वेन्ट्रिलक्विस्ट (ventriloquists) दूसरों की तुलना में अपनी आवाज़ का अधिक इस्तेमाल करते हैं। बिना आराम के लगातार बोलते रहने से आपके गले में अक्यूट लैरन्जाइटिस (acute laryngitis) और गांठ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉ. वाडकर ने बताया कि, 'चूंकि ज़्यादातर यह समस्या टीचर्स को होती है, इसीलिए डॉक्टरी भाषा में इस टीचर्स नॉजूल (Teacher’s nodules) कहा जाता है।' वोकल कॉर्ड्स में पॉलिप (polyps) या छोटे तरल पदार्थ से भरे फोड़े भी हो सकते हैं जिनकी वजह से आवाज़ बैठ जाती है।
हाइपोथायरायडिज्म
हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism) पीड़ित महिलाओं की आवाज़ में कर्कशता, या खिचखिच महसूस होती है। दरअसल हाइपोथायरायडिज्म के दौरान होनेवाले हार्मोनल बदलावों के कारण वोकल कॉर्ड्स मोटे हो जाती हैं। जिसकी वजह से स्वर, बोलने के लहज़े और आवाज़ में बदलाव आ जाता है
मलिग्नन्सी(Malignancy)
अगर आपके वोकल कॉर्ड्स में कोई कैंसरवाला ट्यूमर पनप रहा है तो उसकी वजह से आपकी आवाज़ की कम्पन क्षमता प्रभावित हो सकती है। ये ट्यूमर ध्वनि के निर्माण के लिए आवश्यक वाइब्रेशन्स को प्रभावित करते हैं, जिसकी वजह से आपकी आवाज़ से कर्कश हो जाती है। लम्बे समय तक धूम्रपान करने से भी आपकी आवाज़ ख़राब हो जाती है जिसे स्मोकर्स वॉइस (Smoker’s voice) कहा जाता है। मुंह से धुआं लेने से सिगरेट का टार आपके गले के सम्पर्क में आता है, जिसकी तरह से आपके वोकल कॉर्ड्स में परेशानी होने लगती है। इसके साथ ही, धूम्रपान करने से लोगों को उपजिह्वा कैंसर या ग्लॉटिस कैंसर (glottis cancers) और ट्यूमर की भी समस्याएं हो सकती हैं। जो गले में आवाज के उत्पादन से जुड़ी कार्यप्रणाली या तंत्र में बाधा डाल सकता हैं।
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