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इसका नाम है कॉर्टिसोल हॉर्मोन। यह ऐसा हॉर्मोन है जो हमारी त्वचा में ऑक्सीडेंट्स की तरह काम करता है।
ऑक्सिटोसिन से त्वचा बनती है जवां
ऑक्सिटोसिन हॉर्मोन त्वचा को जवां बनाए रखने में मदद करता है। यह मुख्य रूप से इन तीन तरीकों से त्वचा पर काम करता है और इसकी सुंदरता को बढ़ाता है। जैसे,
-ऐंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है
- डैमेज स्किन सेल्स की रीग्रोथ में मदद करता है
-कैरीटिनोसाइड्स को कम करता है
इसके साथ ही यह हॉर्मोन त्वचा में बन रही नई कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है और उन्हें पोषण प्रदान कर स्वस्थ रखने में भी सहायता करता है। आपको बता दें कि त्वचा में कोशिकाओं के मरने और नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। और हर दिन हमारे शरीर की करीब 30 से 40 हजार कोशिकाएं मर जाती हैं।
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पिग्मेंटेशन को रोकता है ऑक्सीटोसिन
शरीर में एक ऐसा हॉर्मोन होता है, जिसे आप बैड हॉर्मोन या नेगेटिव हॉर्मोन कह सकती हैं। यह डिप्रेशन, टेंशन और त्वचा में बुढ़ापा इत्यादि बढ़ाता है। इसका नाम है कॉर्टिसोल हॉर्मोन। यह ऐसा हॉर्मोन है जो हमारी त्वचा में ऑक्सीडेंट्स की तरह काम करता है। यानी यह त्वचा के अंदर कोशिकाओं के मरने की प्रक्रिया को बढ़ाने का काम करता है और पिंग्मेंटेशन बढ़ाता है।
जबकि ऑक्सीटोसिन इसका असर कम करने का काम करता है। हमारी त्वचा कई परतों (लेयर्स) में बंटी हुई होती है। इसमें फैट की लेयर भी होती है। कॉर्टिसोल हॉर्मोन त्वचा के नीचे जमा फैट को बढ़ा देता है। इससे त्वचा की कसावट कम होती है और त्वचा ढीली पड़ने लगती है, इस कारण चेहरे पर झुर्रियां बढ़ जाती हैं और आप उम्र से पहले बूढ़ी दिक सकती हैं।
फैट के बढ़ने के कारण त्वचा की कोशिकाओं में ब्लड सप्लाई सही प्रकार से नहीं हो पाती है, इससे त्वचा में नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया बाधित होती है, स्किन लूज और डल हो जाती है। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो काले घेरे और झुर्रियों की समस्या हो जाती है।
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