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ब्रेन ट्यूमर, कारण पता नहीं
आज ब्रेन ट्यूमर अवेयरनेस डे है। ब्रेन ट्यूमर यानी हमारे ब्रेन में गांठ का होना। ब्रेन में जब कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होने लगती है, तो ब्रेन के खास हिस्से में कोशिकाओं का गुच्छा बन जाता है। कोशिकाओं के इसी गुच्छे को ब्रेन ट्यूमर कहते हैं। यह कई बार कैंसर की गांठ में बदल जाता है।
यह ट्यूमर या गांठ किसी चीज की भी हो सकती है। इस गांठ से हमारे ब्रेन का कोई भी हिस्सा प्रभावित हो सकता है। ट्यूमर से शरीर का कौन-सा हिस्सा या अंग प्रभावित होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर या गांठ ब्रेन के किस हिस्से में स्थित है। अगर यह गांठ ब्रेन के दाईं तरफ स्थित है तो हमारे शरीर के बाईं तरफ का हिस्सा या अंग प्रभावित होगा और अगर ट्यूमर बाईं तरफ है तो इसकी वजह से हमारे शरीर के दाईं तरफ का हिस्सा या अंग प्रभावित होगा।
ब्रेन के अलग-अलग हिस्से होते हैं- फ्रंटल रीजन, यह आगे की तरफ का हिस्सा होता है, टेंपोरल रीजन, पेराइटल रीजन और आॅक्सीपीटल रीजन। अगर फ्रंटल रीजन में ट्यूमर होता है तो वह रोगी के व्यक्तित्व यानी पर्सनैलिटी को प्रभावित करता है। टेंपोरल रीजन में ट्यूमर होने पर वह रोगी की वाणी और याददाश्त यानी स्पीच और मेमोरी प्रभावित करता है। पेराइटल एरिया में ट्यूमर होने पर वह रोगी के सेंसेशन यानी संवेदनशीलता को प्रभावित करता है और आॅक्सीपीटल एरिया में ट्यूमर होने पर वह रोगी की दृष्टि यानी विजन प्रभावित करता है।
प्रकार : ब्रेन ट्यूमर कई प्रकार का होता है। अगर ट्यूमर ब्रेन के ब्लाॅयल सेल से बढ़ रहा हो तो वह ब्लायो ब्लास्टोमा ट्यूमर बन सकता है। स्टोसाइट से बढ़ रहा है तो स्टोसाइटोमा बन सकता है। वैस्कुलर टिश्यू से बढ़ रहा है तो एमिंजियोमा या एंमिंजियोब्लास्टोमा बन सकता है। अगर ट्यूमर ब्रेन के ड्यूरा हिस्से से बढ़ता है तो वह मेंनिंगजोमा ट्यूमर में परिवर्तित हो सकता है। कुछ ट्यूमर साधारण यानी बेनाइन होते हैं और कुछ मेलिग्नेंट यानी कैंसरस होते हैं।
कारण : ब्रेन ट्यूमर होने का कोई खास कारण अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन फिर भी इसके होने का एक कारण जेनेटिक डिसआॅर्डर होता है। इसके कारण भी ट्यूमर बनते हैं। कुछ मामलों में रेडिएशन के संपर्क में आने से व्यक्ति में ब्रेन ट्यूमर विकसित हो जाता है। कई बार आॅटो इम्यून सप्रेशन के चलते भी ब्रेन ट्यूमर होता है। अधिकतर मामलों में कारण पता नहीं चल पाता है।
लक्षण : ट्यूमर के आरंभिक अवस्था में होने पर सिरदर्द होता है, चक्कर आते हैं, कभी-कभी उल्टी भी आती है। ट्यूमर होने पर रोगी को अक्सर सुबह-सुबह उल्टी होती है। इतना ही नहीं, अगर ट्यूमर ब्रेन के दाईं ओर होता है तो रोगी के बाएं हाथ-पैर में कमजोरी महसूस होती है, उसमें झनझनाहट होती है। रोगी को दौरे पड़ने लगते हैं। कई बार तो रोगी बेहोश भी हो जाता है। रोग के बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर रोगी कोमा में भी जा सकता है।
उपचार : ब्रेन ट्यूमर की पहचान करने के लिए रोगी का इमेजिंग टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट के तहत रोगी के ब्रेन का सीटी स्कैन, एमआरआई और पेट स्कैन किया जाता है। इनके बाद सर्जरी की जाती है। अगर रोगी बुजुर्ग है तो बेनाइन ट्यूमर होने पर सर्जरी की बजाय दवाओं से उपचार किया जाता है, क्योंकि बेनाइन ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ता है और इससे रोगी की जान को खतरा नहीं होता है। ज्यादातर मामलों में सर्जरी से पहले रोगी को रेडिएशन थेरैपी और कीमोथेरेपी दी जाती है। रेडिएशन थेरैपी ट्यूमर में वृद्धि रोक देती है।
अगर बेनाइन ट्यूमर है यानी वह ग्रेड 1 और 2 का ट्यूमर है और वह सिम्पटोमेटिक भी है। यानी ट्यूमर के साथ रोगी में इसके लक्षण भी दिखाई देते हैं, जैसे एक तरफ का लकवा होना, झनझनाहट होना, सिरदर्द का बेहद तेज और बर्दाश्त के बाहर होना, दृष्टि प्रभावित होना, रोशनी कम होना। इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर बेनाइन ट्यूमर में भी सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होता है। सर्जरी के बाद मरीज 10-15 साल आराम से जी जाते हैं। बेनाइन ट्यूमर के ज्यादातर मामलों में रोगी ठीक हो जाता है, लेकिन कैंसरस ट्यूमर होने यानी ग्रेड 3 और 4 के ट्यूमर होने पर आॅपरेशन के बाद भी रोगी का जीवन खतरे में रहता है। इस ट्यूमर की सर्जरी के बाद भी रोगी के बचने की संभावना बहुत ज्यादा नहीं रहती है। कह सकते हैं कि कैंसरस ट्यूमर यानी मैलिग्नेंट ट्यूमर में सर्वाइवल रेट बहुत अच्छा नहीं होता है, क्योंकि अधिकतर मामलों में कैंसरस ट्यूमर वापस बढ़ जाता है।
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