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सायनॉसिस का कारण शरीर में ऑक्‍सीजन की कमी वाले खून का, जो कि लाल की बजाय नीली रंगत लिए होता है, का त्‍वचा में संचार होना है। सायनॉसिस का कारण फेफड़े और ह़दय का गंभीर रोग या फिर संचार प्रणाली से जुड़ी कोई बीमारी है, जिसकी वजह से खून में ऑक्‍सीजन की मात्रा घट सकती है।
क्यों खतरनाक है सायनॉसिस


उंगलियां, पंजे और नाखून
लोलकी (ईयरलोब्‍स)
श्‍लेष्‍मा झिल्‍ली (म्‍युकस मेंब्रेन)
होंठ
त्‍वचा
क्या यह कोई बीमारी है?

सायनॉसिस अपने आप में कोई मर्ज नहीं है, बल्कि आमतौर पर किसी समस्‍या का संकेत है। इसके ज्‍यादातर कारण गंभीर होते हैं और यह इस प्रकार का सूचक होता है कि आपके शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में ऑक्‍सीजन नहीं मिल रही।

आगे चलकर, यह समस्‍या जीवन के लिए घातक साबित हो सकती है। इलाज नहीं करने पर, इसकी वजह से श्‍वसन तंत्र के बेकार पड़ने, हार्ट फेल होने और यहां तक कि मौत भी हो सकती है।
सायनॉसिस चार प्रकार का होता है:
पेरीफेरल सायनॉसिस: आपके हाथ-पैरों को पर्याप्‍त मात्रा में ऑक्‍सीजन नहीं मिल रही, जो कि कम प्रवाह या किसी चोट की वजह से हो सकता है।
सेंट्रल सायनॉसिस: इसमें आपके शरीर को कुल-मिलाकर कम ऑक्‍सीजन उपलब्‍ध होती है, जो कि असामान्‍य ब्‍लड प्रोटीन या लो ऑक्‍सीजन स्‍टेट की वजह से होता है।
मिक्‍स्‍ड सायनॉसिस: यह पेरीफेरल और सैंट्रल सायनॉसिस का मिश्रिम रूप है और एक साथ होता है।
एक्रोसायनॉसिस: यह आपके हाथों और पैरों के आसपास तब होता है जब आपका शरीर ठंडा हो जाता है, ऐसे में तत्‍काल शरीर को गरमाहट देनी चाहिए।

पेरीफेरल सायनॉसिस एक दुर्लभ किस्‍म की घातक मेडिकल इमरजेंसी है। लेकिन यह जरूरी है कि इसके कारणों का पता लगाया जाए। समय पर इसका उपचार आगे चलकर कई संभावित जटिलताओं से बचाव कर सकता है।

इस समस्या का होना पेरीफेरल टिश्‍यू को पर्याप्‍त मात्रा में ऑक्‍सीजन की सप्‍लाई नहीं मिलने का संकेत भी हो सकता है। यह पेरीफेरल टिश्‍यू द्वारा अधिक मात्रा में ऑक्‍सीजन लेने की वजह से भी होता है।


सायनॉसिस किसी गंभीर किस्‍म की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या या किसी बाहरी कारण की वजह से अचानक पैदा हो सकता है। सायनॉसिस के जीवनघाती कारणों में शामिल हैं:

दम घुटना
श्‍वसन तंत्र में रुकावट
फेफड़े के फैलाव में समस्‍या होना या छाती की दीवार को क्षति
हृदय विकार (जन्‍मजात) जिसकी वजह से रक्‍तप्रवाह फेफड़ों को बायपास करता है और उसमें ऑक्‍सीजन नहीं घुल पाती
हार्ट अटैक अथवा हार्ट फेल
पल्‍मोनेरी हाइपरटेंशन, या फेफड़ों में उच्‍च रक्‍तचाप
पल्‍मोनेरी एंबोलिज्‍़म, या फेफड़ों में खून के थक्‍के जमना
शॉक
मेथोमोग्‍लोबीनीमिया, जो कि प्राय: ड्रग्‍स या टॉक्सिन्‍स की वजह से होता है और इसमें ब्‍लड प्रोटीन असामान्‍य हो जाती हैं तथा ऑक्‍सीजन वहन करने में असमर्थ होती हैं

हरगिज न करें सेहत के प्रति लापरवाही

सायनॉसिस का एक और कारण बिगड़ती सेहत भी हो सकता है, या यह क्रोनिक अथवा लंबे समय से स्‍वास्‍थ्‍य खराब रहने के चलते भी हो सकता है। इसी तरह, हृदय, फेफड़ों, रक्‍त या संचार संबंधी सेहत विकारों की वजह से भी सायनॉसिस हो सकता है। इनमें निम्‍न शामिल हैं:

लंबे समय से जारी श्‍वसन रोग, जैसे कि अस्‍थमा या सीओपीडी
आपकी श्‍वसन नलिकाओं में संक्रमण, जैसे कि निमोनिया
गंभीर एनीमिया, या रेड ब्‍लड सेल में कमी
कुछ खास किस्‍म की दवाओं की अधिकता
खास किस्‍म के विषों, जैसे कि सायनायड के संपर्क में आने से
रेनॉड्स सिंड्रोम, इसमें आपकी उंगलियों या पंजों को रक्‍तप्रवाह संकुचित हो जाता है
हाइपोथर्मिया, या अत्‍यधिक शीत जिसके कारण शरीर का तापमान गिर जाता है

क्या सायनॉसिस का उपचार हो सकता है

डॉक्‍टर कई तरह की जांच के आधार पर पेरीफेरल सायनॉसिस का निदान करते हैं, इनमें इमेजिंग स्‍कैन, जैसे कि एक्‍स-रे, सीटी स्‍कैन, ईसीजी आदि शामिल हैं। ये जांच अन्‍य कई स्थितियों की भी पहचान कर सकती हैं, जिनकी वजह से आपके हृदय या फेफड़े इस प्रकार प्रभावित हो सकती हैं कि शरीर में सामान्‍य ऑक्‍सीजन स्‍तर पर असर पड़ सकता है।
बचाव के लिए आप ये उपाय अपना सकती हैं

सायनॉसिस के कुछ कारणों को रोका नहीं जा सकता। लेकिन आप सायनॉसिस का जोखिम कम करने के उपाय कर सकते हैं। इनमें शामिल हैं:


अपने हृदय, रक्‍तवाहिकाओं, और श्‍वसन तंत्र को धूम्रपान तथा पेसिव स्मोकिंग से बचाएं तथा रेगुलर एक्सरसाइज करें।
नियमित रूप से स्‍वास्‍थ्‍य जांच करवाएं ताकि आपको शरीर में हो रहे किसी भी बदलाव की समय पर जानकारी मिल सके।
अन्‍य किसी भी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या जैसे‍ कि मधुमेह, हृदय रोग, रेनॉड्स सिंड्रोम, अस्‍थमा, अथवा सीओपीडी आदि के मामले में अपने डॉक्‍टर की सलाह का पूरा पालन करें।
सर्दियों के मौसम में अधिक लेयर्स और गरम कपड़े पहनें।
वैक्‍सीनेशन करवाएं ताकि श्‍वसन संक्रमण और गंभीर बीमारियों से बचाव हो सके।

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