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क्या शरीर में जहां-तहां होता रहता है दर्द ? कहीं स्पोंडिलोसिस तो नहीं !

स्पोंडिलोसिस के कई प्रकार होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के बारे में लोग सुनते और जानते हैं।
लाइफ स्टाइल की वजह से कुछ बीमारियां हो जाती है जो बहुत परेशान करने वाली होती हैं। स्पोंडिलोसिस की परेशानी भी कुछ ऐसी ही बीमारी है। स्पोंडिलोसिस का मुख्य कारण होता है रीढ़ की हड्डी में सूजन की वजह से शरीर के कई अंगों में दर्द होना। ज्यादातर गर्दन के दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे करने में दर्द होता है। स्पोंडिलोसिस की परेशानी में रीढ़ की हड्डी में अचानक बढ़ोत्तरी या उसके कार्ड्स में गैप की वजह से होती है। शरीर में कैल्शियम की कमी की वजह से बी स्पोंडिलोसिस बीमारी होती है।

उम्र के हिसाब से देखा जाय तो यह बीमारी 40 की उम्र के बाद ज्यादा होती है। ऐसा नहीं है कि यह युवाओं में नहीं होती है। आजकल यह बीमारी युवाओं में भी काफी देखने को मिलती है। एक्सपर्ट्स की माने तो इसका कारण लगातर गलत तरीके से बैठना और खड़े रहना होता है। गलत तरीके से लगातार एक ही स्थिति में रहने की वजर से मांसपेशियों में दबाव पड़ता है और उसके साइड-इफेक्ट की वजह से यह बीमारी होती है। दूसरा जो सबसे बड़ा कारण होता है स्पोंडिलोसिस का वह कैल्शियम की कमी की वजह से होता है।

स्पोंडिलोसिस के कई प्रकार होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के बारे में लोग सुनते और जानते हैं। आइए जानते हैं स्पोंडिलोसिस कितने प्रकार का होता है ?

शरीर के विभिन्न भागों को प्रभावित करने के आधार पर स्पोंडिलोसिस तीन प्रकार का होता है।

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस
जब गर्दन में दर्द होता है उसे सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस कहा जाता है। इसमें सामन्यतया गर्दन के निचने हिस्से, कंधों और कंधों के जोड़ में दर्द होता है। सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में गर्दन घुमाने में दर्द होता है ओर हाथों को ऊपर-नीचे करने में परेशानी होती है।

लम्बर स्पोंडिलोसिस
जब कमर के निचने हिस्से में दर्द रहता है तो इसे स्पाइन या लम्बर स्पोंडिलोसिस कहते हैं। कभी-कभी यह सुबह के समय इतना असहनीय होता है कि इंसान उठने से भी डरता है।

एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस
एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस में सामान्यतया जोडों में तेज दर्द होता है। वैसे देखा जाय तो यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। रीढ़ की हड्डी, कंधों और कूल्हों के जोड़ में दर्द होता है। एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस में शरीर के सभी हड्डी के जोड़ प्रभावित होते हैं।

स्पोंडिलोसिस के लक्षण 
गर्दन या पीठ में दर्द और उनका कड़ा हो जाना है।
यदि आपकी स्पाइनल कोर्ड दब गई है तो ब्लेडर या बाउल पर नियंत्रण खत्म हो सकता है।
इस रोग का दर्द हाथ की उंगलियों से सिर तक हो सकता है। उंगलियां सुन्न होने लगती हैं।
कंधे, कमर के निचले हिस्से और पैरों के ऊपरी हिस्से में कमजोरी और कड़ापन आ जाता है।
कभी-कभी सीने में दर्द होने लगता है और मांसपेशियों में सूजन आ जाती है।
स्पोंडिलिसिस का दर्द गर्दन से कंधों और वहां से होता हुआ हाथों, सिर के निचले हिस्से और पीठ के ऊपरी हिस्से तक पहुंच सकता है।
छींकना, खांसना और गर्दन की दूसरी गतिविधियां इन लक्षणों को और गंभीर बना सकती हैं।
शारीरिक संतुलन गड़बड़ा सकता है और समय बीतने के साथ दर्द का गंभीर हो जाता है।
स्पोंडिलोसिस की समस्या होने पर यह सिर्फ जोड़ो तक ही सीमित नहीं रहती। समस्या गंभीर होने पर बुखार, थकान, उल्टी होना, चक्कर आना और भूख की कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

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