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मधुमेह में किस प्रकार का भोजन करना चाहिए?
यह तय करने के लिए की क्या डायबिटीज में गुड़ खा सकते हैं, हमे भोजन की भूमिका , भोजन की मात्रा की भूमिका और ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स का रक्त शर्करा के स्तर पर असर को समझना आवश्यक है।
भोजन रक्त शर्करा के स्तर को कैसे प्रभावित करता है?
मधुमेह के रोगी के लिए भोजन और उसकी मात्रा की निगरानी करना आवश्यक है। क्योंकि हमारे द्वारा खाया गया भोजन ग्लूकोज और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों में परिवर्तित हो जाता है। यह ग्लूकोज है जो हमें भोजन से मिलता है जो रक्त प्रवाह में प्रवेश करता है। जब रक्त प्रवाह में ग्लूकोज का स्तर ऊंचा हो जाता है तो अग्न्याशय को इंसुलिन जारी करने का संकेत मिलता है। इंसुलिन शरीर की कोशिकाओं को रक्त ग्लूकोज को अवशोषित करने में मदद करता है और इस प्रकार ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करता है। इस प्रकार , इंसुलिन रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड्स
मधुमेह में इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है या शरीर इंसुलिन के लिए प्रतिरोधी हो जाता है और इस प्रकार इंसुलिन की क्रिया कम हो जाती है। इससे शरीर की कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज के अवशोषण की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसलिए मधुमेह में इंसुलिन कम उपलब्ध होता है और उचित रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने के लिए ग्लूकोज को रक्त प्रवाह में धीरे-धीरे प्रवेश करना चाहिए। इसलिए मधुमेह वाले व्यक्ति को ऐसा खाना खाना चाहिए जो ग्लूकोज को धीरे-धीरे रक्त प्रवाह में छोड़ दे। ऐसे खाद्य पदार्थों को लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड्स कहा जाता है।
दूसरी ओर उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वैल्यू वाले खाद्य पदार्थ रक्त शर्करा को तेज दर से छोड़ते हैं और रक्त शर्करा के स्तर में स्पाइक्स का कारण बनते हैं। मधुमेह रोगियों को उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
भोजन की मात्रा और रक्त शर्करा के स्तर पर इसका प्रभाव
रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित करने वाला एक अन्य कारक भोजन की मात्रा है। किसी भी भोजन को अधिक मात्रा में खाने से रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए , मधुमेह के रोगी को परोसने के आकार के अनुसार भोजन की सही मात्रा लेनी चाहिए।
क्या मधुमेह के रोगी उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ खा सकते हैं?
लेकिन क्या होगा अगर एक मधुमेह रोगी उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ खाना चाहता है। ठीक है , अगर ऐसा है तो उस विशेष भोजन को बहुत सीमित मात्रा में लिया जाना चाहिए और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स आहार के साथ संतुलित होना चाहिए ताकि रक्त शर्करा में उतार-चढ़ाव न हो। लेकिन मधुमेह में उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों से बचना बेहतर है।
क्या डायबिटीज में गुड़ खा सकते हैं? क्या कहता है शोध?
अब जब आप ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों और मधुमेह पर भोजन की मात्रा की भूमिका के बारे में समझ गए हैं , तो आइए चर्चा करते हैं कि मधुमेह में गुड़ खाया जा सकता है या नहीं।
गुड़ एक उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वैल्यू फूड है यानी 84.4 का ग्लाइसेमिक इंडेक्स वैल्यू [2] । यह एक बहुत ही उच्च मूल्य है और यह दर्शाता है कि ग्लूकोज को रक्त प्रवाह में तेजी से छोड़ा जाएगा। इससे रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए मधुमेह के रोगियों के लिए गुड़ की सिफारिश नहीं की जा सकती है।
गुड़ में लगभग सभी कार्ब्स शुगर होते हैं। गुड़ के सेवन से शुगर स्पाइक हो सकता है। यह मधुमेह रोगियों के लिए बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
अच्छी गुणवत्ता वाले गुड़ में 70% से अधिक सुक्रोज , 10% से कम ग्लूकोज और फ्रुक्टोज और 5% खनिज , 3% नमी होती है , और लोहे के बर्तन में इसकी तैयारी के दौरान बड़ी मात्रा में लौह (लौह) जमा होता है [1] ।
चूंकि इसमें सुक्रोज की मात्रा अधिक होती है इसलिए यह सीधे ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाता है और तेजी से रक्त प्रवाह में प्रवेश करता है [2] । रक्त प्रवाह में यह तेजी से ग्लूकोज उच्च रक्त शर्करा के स्तर का कारण बन सकता है और मधुमेह व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए मधुमेह के रोगी को गुड़ नहीं खाना चाहिए।
क्या हम डायबिटीज में चीनी के बदले गुड़ ले सकते हैं?
आमतौर पर यह कहा जाता है कि गुड़ गन्ने की चीनी का एक बेहतरीन विकल्प है और इस प्रकार मधुमेह के रोगियों द्वारा बिना किसी समस्या के इसका सेवन किया जा सकता है। लेकिन सच्चाई यह है कि गुड़ मधुमेह के रोगियों के लिए गन्ने की चीनी का अच्छा विकल्प नहीं है। यह निम्नलिखित शोध से सिद्ध होता है जहाँ:
43 टाइप 2 मधुमेह रोगियों (पुरुष: 16, महिला: 27) के एक शोध अध्ययन में उद्देश्य ग्लूकोज , गन्ना चीनी और नारियल गुड़ के सेवन के बाद रक्त शर्करा की प्रतिक्रिया का निर्धारण करना था। [2] रोगियों का औसत उपवास रक्त ग्लूकोज स्तर और एचबीए 1 सी स्तर क्रमशः ( 149.05 ± 54.88) मिलीग्राम/डीएल और ( 9.170 ± 2.022)% थे। शोध से यह निष्कर्ष निकला कि नारियल गुड़ और गन्ने की चीनी के सेवन के बाद रक्त शर्करा के चरम स्तर में कोई अंतर नहीं होता है। इसलिए , टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में गन्ना चीनी के लिए नारियल गुड़ एक स्वस्थ विकल्प नहीं है। [2]
हाँ गुड़ आम चीनी से मामूली तौर पर बेहतर है पर इसका इस्तेमाल हाई ब्लड शुगर के दौरान नहीं करना चाहिए | इन शोध से यह पता चलता है की गुड़ और चीनी मे कोई ज़ायदा फ़र्क़ नहीं है और डायबिटीज के मरीज़ को दोनों ही यानि चीनी और गुड़ के सेवन को नियंत्रण करना ज़रूरी है |
गैर-मधुमेह व्यक्तियों पर गुड़ के लाभ
गुड़ ( Jaggery) के उपयोग अनेक है। जो हमारी स्वस्थ के लिए लाभदायक है। यह अपने पोषक तत्वों की वजह से गैर-मधुमेह (जिन्हे डायबिटीज नहीं है) व्यक्तियों के लिए अत्यधिक फायदेमंद हो सकता है। गुड़ ( Jaggery) के सेवन के कुछ प्रमुख स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार हैं:
वज़न कम ( Weight loss) करने में मदद करता है
ये आपके वज़न कम करने में मदद करता है। ये आपके बदन से विषैले पदार्थ निकाल कर आपके खून को साफ़ करता है और साथ ही उससे आपके अंदर जमा हुई फ़ालतू चर्बी भी ख़त्म हो जाती है। और इसमें मौजूद पोटैशियम ( potassium) आपके वज़न को नियंत्रण में रखता है। इससे आगे भी आपका वज़न नहीं बढ़ता है। इसलिए यह कहना सही होगा की आप वजन काम करने में गुड़ खा सकते है ।
कब्ज ( Preventing Constipation) में मदद करता है
यह पेट के हाज़मे के लिए सबसे अच्छी चीज़ो में से एक चीज़ है | ये कुदरती तौर पर हमारे पेट की सफाई करता है , जिससे कब्ज को रोकने में मदद मिलती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता ( Boosting Immunity) बढ़ाने में मदद करता है
इसमें एंटीऑक्सिडेंट और आवश्यक खनिज ( antioxidants and essential minerals) जैसे जिंक और सेलेनियम ( zinc and selenium) होते हैं। ये चीज़ें और कुछ विटामिन्स आपके शरीर को ताकत और स्फूर्ति प्रदान करते है जिससे आप किसी भी रोग से लड़ने के लिए सक्षम हो जाते हैं। साथी साथ ये आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को भी बढ़ाता है और इसकी कमी भी नहीं होने देता। इसलिए , यह आपकी संपूर्ण सेहत के लिए बहुत ज़्यादा अच्छा है।
श्वसन समस्याओं ( Respiratory Issues) , सर्दी और फ्लू ( Cold and Flu) में बहुत उपयोगी है
गुड़ ( Jaggery) हमारी सांस सम्बन्धी परेशानियों को भी दूर करता है। इसके इस्तेमाल से सांस लेने की दिक्कत भी ख़त्म हो जाती है। लगातार इसके इस्तेमाल करने से अस्थमा , ब्रोंकाइटिस ( asthma, bronchitis) आदि को रोका जा सकता है। तिल के बीज के साथ गुड़ ( Jaggery) मिला कर खाने से सांस सम्बन्धी परेशानी से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। यह हमारे शरीर को गर्मी प्रदान करता है। और सर्दी जैसी परेशानियों को दूर करता है। गर्म दूध में थोड़ा सा गुड़ ( Jaggery) डाल कर पीने से सर्दी और फ्लू में बहुत रहत मिलती है।
शरीर में जमा गन्दगी ( Detoxifies) को दूर करने में काम आता है
गुड़ ( Jaggery) रक्तप्रवाह से जहरीले रसायनों को बाहर निकालकर , यह लीवर को साफ करने में मदद करता है। लीवर को डिटॉक्सीफाई करके ये उसको सही ढंग से काम करने में मदद करता है। अगर आपका लिवर पूरी तरह से सही है। तो आप बहुत सारी बीमारियों और उनके से वैसे ही बच जाते हैं। ये आपके शरीर को एक अलग ही स्फूर्ति प्रदान करता है। इसमें मौजूद मिनरल्स आपके लिवर की बहुत अच्छे से देख भाल करते है।
ब्लड प्रेशर ( Blood Pressure) को कण्ट्रोल करने में मदद करता है
गुड़ ( Jaggery) के अंदर पोटेशियम और सोडियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो की आपके शरीर में मौजूद एसिड के लेवल को सही रखने में आपकी मदद करते हैं , जिससे आपके ब्लड प्रेशर ( Blood Pressure) को कण्ट्रोल करने में काफी मदद मिलती है। हाई ब्लड प्रेशर ( high blood pressure) के मरीज़ो को इसका सेवन दिन में एक बार ज़रूर करना चाहिए ताकि वो इसको कण्ट्रोल में रख सकें।
मासिक धर्म ( Menstrual Pains) के दर्द से राहत दिलाता है
माहवारी के दौरान महिलाओं को अक्सर मासिक धर्म ( Menstrual Pains) में तेज दर्द और ऐंठन का सामना करना पड़ता है। गर्म गुड़ ( Jaggery) को दूध के साथ लेने से ऐंठन और दर्द से राहत मिलती है।
एनीमिया ( Preventing Anemia) को रोकने में मदद करता है
गुड़ ( Jaggery) के सबसे अच्छे फायदों में से एक फायदा एनीमिया को रोकना है। यह आयरन ( IRON) के साथ-साथ फोलेट में उच्च होता है , जो शरीर में आरबीसी ( RBC) का उत्पादन करने में मदद करता है , जिससे एनीमिया से बचना आसान हो जाता है। डॉक्टर हर तरह के मरीज़ो को और साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी इसके इस्तेमाल के लिए कहते हैं।
मूत्र संबंधी ( Urinary Problems) समस्याओं को हल करने में भी मदद करता है
गुड़ ( Jaggery) मूत्र सम्बन्धी परेशानियों को हल करने के लिए भी जाना जाता है। और यह मूत्राशय की सूजन को कम करने तथा पेशाब को बढ़ावा देने में आपकी मदद करता है। इसको खाली या दूध के साथ भी इस्तेमाल कर के अपनी मूत्र सम्बन्धी परेशानियों को दूर किया जा सकता है।
तंत्रिका और मांसपेशियों के कार्य को बनाए रखने में मदद करता है
गुड़ मे मौजूद मैग्नीशियम (Magnesium) सामान्य तंत्रिका और मांसपेशियों के कार्य को बनाए रखने में मदद करता है , दिल की धड़कन को स्थिर रखता है और हड्डियों को मजबूत रहने में मदद करता है।
गुड़ (Jaggery) के दुष्प्रभाव (Side Effects)
दुनिया में जहा हर चीज़ के फायदे मौजूद हैं। वही साथ साथ उसके कुछ न कुछ साइड इफेक्ट्स भी ज़रूर होते है। गुड़ ( Jaggery) के अनेको फायदे हैं। लेकिन इसके भी कुछ साइड इफेक्ट्स ज़रूर हैं। जोकि हमारी सेहत पर गलत असर डालते हैं। और कभी कभी उससे ज़्यादा नुक्सान भी हो सकता है। गुड़ ( Jaggery) का ज़्यादा मात्रा में इस्तेमाल आपका वज़न बढ़ा सकता है। और इसका ज़्यादा इस्तेमाल डायबिटीज के मरेरेज़ो के लिए भी नुकसानदेह है।
एलर्जी
बहुत से लोगो को इससे एलर्जी हो सकती है। जो लोग मीठे को लेकर सवेदनशील हैं। उनको इससे एलर्जी हो सकती है।
रक्त शर्करा के स्तर ( blood sugar level) को बढ़ा सकता है
ज़्यादा मात्रा में इसका इस्तेमाल आपके रक्त शकर्रा के स्तर ( blood sugar level) को बढ़ा सकता है। इसलिए इसका इस्तेमाल डॉक्टर के परामर्श से ही करें वैसे ये सब मरीज़ की सेहत के हिसाब से होता है। कुछ लोगो को ये ज़्यादा नुक्सान देता है। और कुछ मरीज़ो को कम।
कब्ज
इसके ज़्यादा इस्तेमाल से कब्ज़ भी हो जाता है वैसे कम मात्रा में इसका सेवन आपका पेट साफ़ करता है और आपकी मूत्र सम्बन्धी परेशानिया भी दूर कर देता है।
अतं में :
गुड़ देसी प्राकृतिक स्वीटनर है जो या तो गन्ने के रस या ताड़ के रस से बनाया जाता है। इसमें बहुत सारे आयरन , मिनरल्स , विटामिन्स खनिजों , का एक बहुत अच्छा स्रोत है। इसका इस्तेमाल हर उम्र के लोग कर सकते हैं। जहा ये बहुत सारी चीज़ो में काम में आता है। वही इसका ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल आपको नुक्सान भी पोहचा सकता है। इसलिए इसका इस्तेमाल देखभाल कर ही करना चाहिए।
मधुमेह रोगियों को अपने चीनी का सेवन सीमित करना चाहिए। फिर भी , रिफाइंड चीनी की तुलना में गुड़ एक बेहतर विकल्प है। यह रक्त में ग्लूकोज स्पाइक नहीं देता है। इसके अलावा , परिष्कृत चीनी के विपरीत , गुड़ में कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। यह आयरन , मैग्नीशियम और पोटेशियम का एक समृद्ध स्रोत है।
मधुमेह के लोग यह मानकर अधिक मात्रा में गुड़ खाते हैं कि गुड़ उनके रक्त शर्करा के स्तर को नहीं बढ़ाएगा। यह सच नहीं है क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाता है। मधुमेह के रोगियों में इसका सेवन बहुत सीमित होना चाहिए और यदि रक्त शर्करा का स्तर अधिक हो तो इससे बचना चाहिए।
अपने गुड़ के सेवन को दिन में 1-2 छोटे चम्मच तक सीमित रखने के अलावा , मधुमेह के रोगी स्वाद के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग कर सकते हैं। उनमें से कुछ अदरक , तुलसी , इलायची आदि हैं।
मधुमेह के रोगियों को कृत्रिम मिठास (Artificial sweeteners) के प्रयोग से बचना चाहिए। वे लंबे समय में आंत की स्वास्थ्य समस्याओं और इंसुलिन प्रतिरोध में परिणाम कर सकते हैं। याद रखें कि स्वस्थ भोजन खाने से आप अपने मधुमेह को उचित तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।
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