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शिशु को पिला रही हैं जरूरत से ज्‍यादा दूध, इन संकेतों के मिलने पर तुरंत समझ जाएं

नवजात शिशु खुद बोलकर अपनी परेशानी या जरूरत नहीं बता सकते हैं। वो तो बस रोते हैं और मां को खुद ही उसकी बात समझनी होती है। पहली बार मां बनने पर महिलाओं को शिशु की जरूरतों को समझने में समय लगता है। कई नई मांओं को बच्‍चे के दूध पीने की आदत समझने में दिक्‍कत होती है और वो अनजाने में शिशु को ज्‍यादा दूध पिला देती हैं।


शिशु के लिए कम या ज्‍यादा दूध पीना, दोनों ही गलत होता है। अगर आपने भी हाल ही में शिशु को जन्‍म दिया है तो समझें कि कब और कैसे शिशु को ओवरफीड हो सकता है।

​बच्‍चे को ओवरफीड करने के कारण

कई कारणों से मांएं बच्‍चे को ओवरफीडिंग करवा देती हैं। इसकी मुख्‍य वजहें हो सकती हैं, जैसे कि :

बोतल से दूध पीने पर बच्‍चा जरूरत से ज्‍यादा दूध पी सकता है। बोतल से दूध जल्‍दी बहता है और पेट भरा होने पर भी बच्‍चा बोतल को मुंह से नहीं हटाता है और दूध पीता रहता है। मां का दूध पीने वाले बच्‍चे ओवरफीड नहीं करते हैं।
बड़ी बोतल से दूध पीने पर भी बच्‍चे ज्‍यादा मिल्‍क पी लेते हैं। इससे उनका वजन बढ़ने का खतरा रहता है। बोतल का साइज देखे बिना बच्‍चे को सारा दूध खत्‍म करने के लिए कहना ओवरफीडिंग का कारण है।
जब बच्‍चे का पेट भर जाता है तो वो कुछ संकेत देता है जैसे कि बोतल को मुंह से हटा देना आदि। कुछ पेरेंट्स बार-बार बच्‍चे के मुंह में बोतल को लगाते रहते हैं जिससे बच्‍चा ओवरफीडिंग कर लेता है।

​शिशु को ओवरफीडिंग करवाने के संकेत

यदि आप बच्‍चे को ओवरफीड करवा रही हैं, तो आपको निम्‍न संकेत दिख सकते हैं :

सामान्‍य तौर पर भी बच्‍चे दूध पीने के बाद उसे मुंह से निकालते हैं लेकिन ऐसा बार-बार करने का मतलब है कि उसने दूध ज्‍यादा पी लिया है।
बोतल से दूध पीने पर बच्‍चे ज्‍यादा हवा निगल सकते हैं जिससे उनका पेट फूल सकता है और उन्‍हें कोई दिक्‍कत भी हो सकती है।
पेट फूलने, गैस और बार-बार मल निकालने की वजह से बच्‍चे को दिक्‍कत होती है जिससे वो रोने लगता है।
एक साल तक के बच्‍चे को भी एक दिन में 887 मि.ली से अधिक मात्रा में फॉर्मूला या ब्रेस्‍ट मिल्‍क की जरूरत नहीं होती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्‍स के अनुसार अगर बच्‍चा 1064 मि.ली से ज्‍यादा दूध मांगता है तो यह असामान्‍य बात है और आपको डॉक्‍टर को दिखाना चाहिए।

​क्‍या है बचने का तरीका

यदि दूध पीते समय शिशु पेट भरने के संकेत देता है तो आप उन्‍हें समझने की कोशिश करें। बच्‍चे को दूध पिलाने का एक शेड्यूल तैयार करें और रोज उसे एक ही समय पर दूध पिलाएं। बच्‍चा जब दूध पीने या खाने से मना कर देता है, तो उसके साथ जबरदस्‍ती न करें। बच्‍चे को जब भूख लगेगी तो वो अपने आप ही कुछ संकेतों की मदद से आपको बता देगा।

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