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स्किन का कलर बदलना आपके अंदर पनप रही किस बीमारी की ओर इशारा करता है? जानिए

Change in Skin Colour: अगर आपकी त्वचा का रंग अचानक बदल रहा है तो इसके पीछे कोई गंभीर अंदरूनी कारण हो सकते हैं. कई बीमारियों में त्वचा का रंग पीला, नीला, लाल हो सकता है या त्वचा का रंग ही उड़ जाता है.
Change in Skin Colour: हमारी त्वाचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है. शरीर के हर अंग को बाहर से त्वचा ने ढका हुआ है. शरीर के अंदरूनी हिस्सों में किसी तरह की परेशानी या बीमारी का असर हमारी त्वचा पर सबसे पहले दिखता है. कई बार हमारी त्वचा का रंग अचानक बदलने (Skin changes color) लगता है. त्वचा के रंग में यह बदलाव पूरे शरीर पर और शरीर के किसी एक हिस्से पर भी नजर आ सकता है. त्वचा के रंग में इस तरह अचानक बदलाव आना किसी अंदरूनी समस्या का लक्षण होता है. उदाहरण के लिए अगर त्वचा पीली पड़ रही है तो लिवर से जुड़ी समस्या (Liver Disease) की ओर इशारा करती है, जबकि त्वचा के नीला पड़ने का मतलब व्यक्ति को सांस संबंधी समस्या (Respiratory Problem) है. त्वचा पर नील पड़ना (Bruise) किसी तरह का ब्लड डिसऑर्डर (Blood Disorder) हो सकता है, जबकि किसी अन्य त्वचा संबंधी समस्या के चलते या धूप के प्रति संवेदनशीलता के कारण त्वचा का रंग लाल या गुलाबी हो सकता है.

कैंसर (Cancer) के मरीजों में इसके इलाज के साइड इफेक्ट, ट्यूमर ग्रोथ (Tumor Growth) या धूप के कारण त्वचा का रंग बदल सकता है. त्वचा के रंग में यह बदलाव समय के साथ ठीक हो सकता है, लेकिन कई बार यह बदलाव लंबे समय तक बना रहता है. कई मरीज हैंड-फुट सिंड्रोम (Hand-Foot Syndrome) से ग्रसित होते हैं. इस बीमारी में कभी-कभी हाथों की हथेलियों और पैरों के तलवों में लालिमा, सूजन (Swelling), दर्द और कभी-कभी झुनझुनी होती है. अगर आप या आपका कोई परिचित कैंसर का इलाज करवा रहा है और इस दौरान आपकी त्वचा के रंग में किसी तरह का बदलाव नजर आता है तो अपनी कैंसर केयर टीम को इसके बारे में बता दें.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान – What to look for

त्वचा का पीला पड़ना और आंखों के सफेद हिस्से का भी पीला पड़ना.
गहरी गुलाबी या भुरे रंग की पेशाब. (ये भी पढ़ें – लिवर को डिटॉक्स करना चाहते हैं तो ये 8 ड्रिंक आपकी मदद करेंगे, पिएं और लिवर को कहें- जुग-जुग जियो)
सफेद, मिट्टी जैसे रंग की, भुरी या ग्रे रंग की मल.
त्वचा पर नील पड़ना या त्वचा का नीला या बैंगनी हो जाना और इसका कोई कारण स्पष्ट न होना.
त्वचा का नीला या पीला पड़ने के साथ ही होंठ और नाखूनों का रंग भी बदलना. साथ ही सांस लेने में तकलीफ होना.
त्वचा पर लाली या छोटे-छोटे दाने (रैशेस) होना. (ये भी पढ़ें – अपने खान-पान में इन 5 गलतियों को सुधार लें, क्योंकि ये आदतें किडनी फेल होने का कारण बन सकती हैं)
त्वचा के जिस हिस्से का रंग बदला है वहां पर सूजन आना.
खुजली होना.

मरीज को क्या करना चाहिए – What the patient can do

गर्म पानी और सौम्य साबुन से त्वचा को धोकर मुलायम कपड़े से साफ कर सकते हैं.
प्रभावित हिस्से को सावधानीपूर्वक धोएं और अच्छे से सुखा लें. (ये भी पढ़ें – आपकी खूबसूरती को बरकरार रखेंगे ये 10 फूड, जरूर खाएं और त्वचा को हर परेशानी से दूर रखें)
कैंसर डॉक्टर से बात करें और पूछें कि आकी त्वचा के लिए सबसे अच्छे स्किन केयर प्रोडक्ट क्या हो सकते हैं. अपनी त्वचा में नमी बनाए रखें.
प्रभावित हिस्से को गर्मी और ठंड से बचाएं.
ढीले-ढाले और मुलायम कपड़े पहनें. (और पढ़ें – अगर ये 6 लक्षण दिखें तो समझ लें कि किडनी में कोई समस्या है, तुरंत डॉक्टर के पास जाएं)
स्किन रिएक्शन के लिए निर्धारित दवाएं लगाएं.
धूप में जाने से बचें. बाहर जाना जरूरी हो तो चौड़ी हैट, सनग्लास और पूरे बाजू की शर्ट पहनें.
धूप के संपर्क में आने वाली त्वचा पर एसपीएफ 30 या इससे अधिक एसपीएफ की सनस्क्रीम लगाएं. धूप में हैं तो हर दो घंटे में क्रीम लगाते रहें. नहाने और पसीना
आने के बाद भी क्रीम लगाएं.

घर के लोग क्या मदद कर सकते हैं – What caregivers can do

अगर रोगी के हाथ भी प्रभावित हैं तो उन्हें गर्म पानी से जुड़े कार्य न करने दें. (ये भी पढ़ें – ये 8 फूड्स आपके दैनिक आहार में शामिल हैं तो अंदर ही अंदर सड़ रही है किडनी, इन्हें तुरंत छोड़ दें)
मॉइस्चराइजिंग लोशन या क्रीम से हल्की मालिश करें.

ये लक्षण दिखें को कैंसर केयर टीम से संपर्क करें – Call the cancer care team if the patient

अगर त्वचा या आंख का सफेद हिस्सा पीला पड़ गया है या दिनभर ऑरेंज या गहरे रंग की पेशाब हो या दो या दो से ज्यादा बार जाने पर मल सफेद या मिट्टी जैसे रंग का हो.
बहुत ज्यादा खुजली हो रही हो (ये भी पढ़ें – बवासीर के लक्षण, क्यों होता है, जड़ से खत्म कैसे करें और रामबाण आयुर्वेदिक इलाज)
शरीर पर घाव या नीले धब्बे, जो हफ्तेभर तक बने रहें और नए नील भी 3 दिनों तक दिख रहे हों.
त्वचा पर गुलाबी या लाल धब्बे या दाने नजर आना.

त्वचा का रंग बदलता ही नहीं है, कई बार त्वचा का रंग उड़ जाता है. यानी त्वचा सफेद होने लगती है. इस बीमारी को विटिलिगो कहते हैं. नीचे इस बीमारी के बारे में भी जानते हैं और पता करते हैं कि इसके कारण और जोखिम कारक क्या हैं?
विटिलिगो क्या है – What Is Vitiligo?

विटिलिगो एक ऐसी स्थिति है, जिसमें त्वचा पर सफेद धब्बे बन जाते हैं. इससे शरीर का कोई भी हिस्सा प्रभावित हो सकता है और जिन लोगों को यह समस्या होती है, उनमें से अधिकांश लोगों के शरीर के कई हिस्सों में सफेद धब्बे हो जाते हैं. (ये भी पढ़ें – किडनी इंफेक्शन से हैं पीड़ित तो जान लीजिए इसका आयुर्वेदिक इलाज और घरेलू उपाय)
विटिलिगो के कारण और जोखिम कारक – Vitiligo Causes and Risk Factors

त्वचा का अपना कोई विशेष रंग नहीं होता, क्योंकि यह अपने मेलेनिन खो देती है. पिग्मेंट बनाने वाले सेल, जिन्हें मेलानोसाइट्स कहा जाता है वह किसी कारण से नष्ट हो जाते हैं, जिसके कारण विटिलिगो होता है. अभी तक इसका स्पष्ट कारण पता नहीं चला है. यह एक तरह का ऑटोइम्यून रोग भी हो सकता है, जिसमें हमारे शरीर का सुरक्षा चक्र, हमारे ही शरीर पर हमला कर देता है, जबकि यह किसी भी बाहरी नुकसानदायक वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए बना है. हालांकि, विटिलिगो किसी भी जाति, धर्म, लिंग या क्षेत्र के लोगों को हो सकता है, लेकिन गहरे रंग के लोगों में यह ज्यादा देखने को मिला है.

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