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विटामिन डी के फायदे-

विटामिन डी हमारे शरीर में सीरम, कैल्शियम और फास्फोरस की सही मात्रा को बनाए रखने में मदद करता है। यह हमारे शरीर में संक्रमण की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
विटामिन डी हमारे शरीर के लिए योद्धा है, यह हमें बाकी की बीमारियों को होने से बचाता है। यह शरीर की इम्युनिटी को भी बढ़ाता है।
विटामिन डी मांसपेशियों और नसों के लिए बहुत ही आवश्यक है। यह नर्वस सिस्टम और नसों को सही करता है। दिमाग अच्छी तरह से संचालन करने में सहायक होता है विटामिन डी।
अगर सही समय पर सही मात्रा में विटामिन डी नहीं लिया जाए तो मांसपेशियों में ऐंठन होती है, हड्डियों में दर्द होने लगता है। इसकी कमी से शरीर में थकान अधिक महसूस होती है और कई बार बहुत अधिक पसीना आने लगता है।
बच्चों में विटामिन डी की कमी हो जाय तो उन्हें सांस लेने की दिक्कत होने लगती है और उनकी हड्डियां कमज़ोर हो सकती हैं।
इसके अलावा उन्हें बार-बार किसी न किसी तरह का संक्रमण होने लगता है।
विटामिन डी की कमी से बाल झड़ने लगते हैं, कलाई और एड़ियां फूलने लगती है , डायबिटीज जैसी बीमारी भी होती है। सोरायसिस, कब्ज और दस्त जैसी दिक्कते भी अधिक आती हैं।
विटामिन डी के सप्लीमेंट्स से ब्लड शुगर और ग्लूकोज कंट्रोल होता है, साथ ही डायबिटीज की परेशानी से छुटकारा मिलता है।
विटामिन डी सही मात्रा में शरीर में हो तो डिप्रेशन दूर करने में मदद करता है।
यह शरीर में प्रोटीन की मात्रा को नियमित करता है।

विटामिन डी के नुकसान

शरीर में वैसे तो विटामिन डी बेहद जरूरी है, लेकिन यदि इसकी अधिकता भी नुकसानदायक हो सकती है।
विटामिन डी की खुराक शरीर में ज़्यादा हो जाय, तो इससे शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे भूख लगनी बंद हो जाती है।
विटामिन डी का अधिक सेवन करने से बार-बार पेशाब लगने की समस्या होती है।
बच्चों में अगर विटामिन डी अधिक हो जाए तो उनमें चिड़चिड़ापन, चलने में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
वयस्कों में विटामिन डी की मात्रा बढ़ जाये तो शरीर में दर्द का कारण भी बनता है।
अधिक मात्रा में विटामिन डी का सेवन हड्डियों को कमजोर बनाता है। हाई ब्लड प्रेशर का कारण भी कई बार परेशानी का सबब बनता है।
विटामिन डी का ज़्यादा सेवन करने से कब्ज़, दस्त और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
अगर विटामिन डी की कमी हो तो ऑस्टियोपीनिया नामक बीमारी होने का डर बना रहता है, इसमें हड्डियों में प्रोटीन की कमी हो जाती है।
महिलाओं में इसकी अधिकता से इनफर्टिलिटी की समस्या, पीरियड्स का अनियमित होना और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी की संभावना हो सकती है।

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