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विटामिन डी और विटामिन डी 3 के बीच काफी कुछ अंतर हैं लेकिन उनके बीच मुख्य अंतर यह है कि विटामिन डी एक वसा में घुलनशील विटामिन है जो शरीर के कैल्शियम और फॉस्फोरस के स्तर को नियंत्रित करता है जबकि विटामिन डी 3 विटामिन डी का प्राकृतिक रूप है जो किसके द्वारा उत्पादित होता है।
विटामिन डी: विटामिन डी2 और विटामिन डी3 में अंतर
विटामिन डी, दो प्रकार के होते हैं, जो विटामिन डी2 (Vitamin D2) और विटामिन डी3 (Vitamin D3) के नाम से जाना जाता है। शरीर को विटामिन डी2 (Vitamin D2) और विटामिन डी3 (Vitamin D3) दोनों की जरूरत होती है और दोनों मिलकर विटामिन डी की जरूरत को पूरा करते हैं। विटामिन डी3 और विटामिन डी2 के गुण एक दूसरे से कुछ मायनों में अलग हैं। जैसा कि पहले ही बताया गया है कि विटामिन डी वसा घुलनशील विटामिन होता है जो दो विटामिन डी2 (अर्गोंकैल्सिफेरॉल) और विटामिन डी3 (कॉलेकैल्सिफेरॉल) से मिलकर बना होता है। लेकिन दोनों का स्रोत एक दूसरे से बिल्कुल अलग होता है। विटामिन डी3 पशुओं से मिलता है, जैसे- मछली, फिश ऑयल, अंडे की जर्दी, मक्खन और डायटरी सप्लीमेंट्स तो डी2 पौधों से जैसे- मशरूम (लेकिन जो धूप में उगे हुए होते हैं) और फॉर्टिफाइड फूड्स से मिलता है।
विटामिन डी (Vitamin D) का प्रमुख स्रोत सूरज की किरणें हैं, जिसमें अल्ट्रावायलट बी (यूवीबी) होता है। वह त्वचा में 7-डिहाइड्रोकोलेस्टेरॉल यौगिक के साथ संयोजन करके विटामिन डी3 बनाने का काम करता है। इसी तरह की प्रक्रिया पौधों और मशरूम से होती है। यहां भी अल्ट्रावायलट किरणें पौधों में मौजूद तेल के यौगिक के साथ मिलकर विटामिन डी2 बनाते है।
आपके शरीर को मिल रहे विटामिन डी2 (Vitamin D2) और विटामिन डी3 (Vitamin D3) को लीवर चयापचय प्रक्रिया द्वारा कैल्सिफेडॉल में बदलने का काम करता है। लीवर चयापचय के प्रक्रिया द्वारा विटामिन डी2 को 25-हाइड्रोक्सीविटामिन डी2 और विटामिन डी3 को 25-हाइड्रोक्सीविटामिन डी3 में बदल देता है [1]। शोध के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान दोनों का उत्पादन भिन्न-भिन्न मात्रा में होता है, जिसके यौगिक को कैल्सिफेडॉल कहते हैं। कैल्सिफेडॉल रक्त में इसके स्तर से पता चलता है कि शरीर में इसकी मात्रा कितनी है। [2]।
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