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विकलांग बालकों की विशेषताएं
विकलांग बालकों के लक्षण तथा विशेषताएँ उनकी विकलांगता के प्रकार के अनुसार होती है। किन्तु कुछ ऐसी विशेषताएँ भी होती हैं, जो प्राय: सभी प्रकार के विकलांगों में सामान्य रूप से पायी जाती हैं। ऐसी ही कुछ विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. शारीरिक रूप से विकलांग बालकों की शिक्षा सामान्य बालकों के साथ चलाने में प्रायः कठिनाई आती है।
2. इनका कोई न कोई शारीरिक अंग या तो भंग होता है, अथवा क्षतिग्रस्त होकर
3. ये बालक अपने दैनिक आवश्यक कार्य सामान्य बालकों की भांति नहीं कर पाते हैं। इन्हें इन कार्यों में अधिक समय लगता है तथा कभी-कभी कुछ विशेष उपकरणों का सहारा भी लेना पड़ता है। जैसे बैशाखी तथा श्रवण मशीन आदि।
4. एक बालक में कभी-कभी एक से अधिक दोष भी देखे जा सकते हैं
5. इन बालकों की कोई एक शक्ति यदि कमजोर पड़ जाती है, तो ये अपनी अन्य शक्तियों की सहायता से अपना जीवन सफलतापूर्वक जीने में सक्षम होते हैं। एक लड़की के हाथ नहीं थे, तो उसने पैरों से लिखना सीख लिया था। कमजोर हो जाता है।
6. इन बालकों के शारीरिक अंग शक्तिहीन हो जाने पर भी प्राय: ये हतोत्साहित नहीं होते हैं। समाज की उपेक्षा और तिरस्कार से आहत होकर ये हीन भावना के शिकार हो जाते हैं।
7. इन्हें सही मार्गदर्शन, सहायता, यंत्रों के उपयोग, समुचित शिक्षा तथा मानसिक सहयोग देकर समाज की मुख्य धारा के साथ जोड़ा जा सकता है।
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