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अकोशकीय अतिसूक्ष्म जीव हैं जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ये नाभिकीय अम्ल और प्रोटीन से मिलकर गठित होते हैं, शरीर के बाहर तो ये मृत-समान होते हैं परंतु शरीर के अंदर जीवित हो जाते हैं। इन्हे क्रिस्टल के रूप में इकट्ठा किया जा सकता है।

हाथ धोएं

संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप बार बार साबुन और पानी से हाथ धोते रहें। इसके लिए एक एल्कोहल-आधारित हैंड सेनिटाइज़र का भी उपयोग किया जा सकता है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और देखभालकर्ताओं को देखभाल करते समय हाथों की सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए।
निजी स्वच्छता से जुड़ी अच्छी आदतें अपनाएं

संक्रमण की रोकथाम के लिए रोजमर्रा की कुछ आम स्वयं की देखभाल रखने वाली आदतों को अपनाया जाना जरूरी है। इसमें दांत साफ़ करना ब्रश और मुंह को साफ़ रखना, रोजाना स्नान करना, त्वचा की देखभाल करना तथा घाव और लाइन/नली के लिए चिकित्सकीय टीम की सलाह का पालन करना शामिल है।
रोगी से जुड़े स्थानों को साफ़ रखें

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले कुछ बच्चों के लिए धूल और मिट्टी में पाए जाने वाले रोगाणु भी हानिकारक हो सकते हैं। अगर फर्श और सतहों की सफाई सही तरीके से की जाए तो इससे संक्रमण से बचने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। जिस स्थान पर बच्चे को चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, उसका खास ध्यान रखें। बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले खिलौने और दूसरी वस्तुएं रोगाणुओं से भरी हो सकती हैं। खिलौनों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को समय-समय पर साफ़ करते रहें। मुलायम खिलौनो , कंबलों और चद्दरों को गर्म पानी में धोएं। चादरों को समय-समय पर बदलते रहें।
संपर्क से बचें

बीमार लोगों के संपर्क में न आएं। जिन रोगियों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उनके लिए सर्दी तक खतरनाक हो सकती है। हवा में पाए जाने वाले रोगाणुओं को अलग करने के लिए कुछ मरीजों को विशेष मास्क पहनने की जरूरत पड़ सकती है। परिवार के सदस्य जो बीमार हैं, वे रोगी को रोगाणु फैलाने के खतरे को कम करने के लिए मास्क पहन सकते हैं।
टीकाकरण करवाएं

देखभालकर्ता और परिवार के सदस्यों को टीकाकरण संबंधी सलाहों का पालन करना चाहिए, इसमें फ्लू (इंफ्लुएंजा) और काली खांसी (परटुसिस) का टीका शामिल है। अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार रोगी को टीकाकरण करवाना चाहिए। वे रोगी जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, कुछ विशेष टीके खासतौर पर लाइव टीके नहीं ले पाते है। इस कारण से उनके संपर्क में रहने वाले लोगों के लिए टीकाकरण करवाना और भी जरूरी हो जाता है।
पतले दस्त लगने जैसे लक्षणों का ध्यान रखें

कैंसर के रोगी में कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी या संक्रमण के कारण दस्त लग सकते हैं। हाथ धोएं और सभी सतहों को कीटाणुरहित करें। डायपर बदलते समय दस्ताने पहने।

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