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अगर मल में खून आए तो तुरंत किसी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। अगर संभव हो तो सर्जन की क्योंकि इसमें उस जगह की आंतरिक जांच की जरूरत होती है। उसी से बवासीर या फिशर होने का पता लगता है। अगर कैंसर या कोई ट्यूमर हो, तो उसका भी पता लग जाता है।
अधिकतर मामलों में शौच के दौरान खून निकलने को लोग बवासीर की समस्या समझ लेते हैं और फिर शर्म के बारे इसका इलाज नहीं करवाते हैं। आपको बता दें कि बवासीर के अलावा अन्य कई गंभीर बीमारियों के कारण भी मलत्याग के दौरान खून निकल सकता है. इसलिए यह ज़रूरी है कि आप डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं और सही बीमारी का पता लगाएं। तो आइए जानें कि बवासीर के अलावा और कौन सी बीमारियों में शौच के दौरान खून निकलता है और दर्द होता है।
1) एनल फिशर : एनल फिशर वास्तव में मलद्वार के पास त्वचा में दरारें होने की समस्या को कहते हैं। इसके कारण मलत्याग करते समय तेज दर्द होता है। यह अमूमन कब्ज और नियमित शौच न करने, कड़ा मल निकलने या बार-बार डायरिया होने के कारण होता है। मलद्वार में दरार आने की वजह से वहां की त्वचा में दर्द होने लगता है जिससे अक्सर लोग यह समझ लेते हैं कि उन्हें हेमरॉइड की समस्या है। इसलिए ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं, डॉक्टर ही आपकी जांच करके यह बता सकते हैं कि आपकी समस्या बवासीर है या सिर्फ एनल फिशर है।
2- क्रोहन रोग : क्रोहन रोग पाचन तंत्र में सूजन संबंधी एक पुरानी बीमारी है जो अक्सर दर्दनाक खूनी दस्त के रूप में प्रकट होती है। इस बीमारी को जी मिचलाना, वजन घटना, पेट दर्द और थकान आदि लक्षणों से पहचाना जाता है। एंडोस्कोपी के जरिए यह पता चल जाता है कि यह क्रोहन रोग है या बवासीर है। क्रोहन रोग में आमतौर पर छोटी आंत का निचला हिस्सा प्रभावित होता है जबकि बवासीर में गुदा या बड़ी आंत का निचला हिस्सा प्रभावित होता है।
3- अल्सरेटिव कोलाइटिस : अल्सरेटिव कोलाइटिस होने पर भी मल में खून आता है, हालांकि यह अमूमन सिर्फ बड़ी आंत को ही प्रभावित करता है। एंडोस्कोपी की मदद से काफी आसानी से यह पता चल जाता है कि आपकी समस्या अल्सरेटिव कोलाइटिस है या बवासीर क्योंकि इसमें होने वाली सूजन बवासीर से काफी हद तक अलग होती है।
4- कोलोरेक्टल कैंसर : बवासीर होना कोलोरेक्टल कैंसर का भी लक्षण हो सकता है। 90 प्रतिशत लोग जिनमें जांच के बाद कोलोरेक्टल कैंसर पाया गया, शुरू में उन्हें यह लगा था कि उन्हें हेमरॉइड है। हालांकि हेमरॉइड में कभी सूजन बढ़ जाती है फिर खत्म हो जाती है और ब्लीडिंग भी हमेशा नहीं होती है जबकि कोलोरेक्टल कैंसर में हमेशा ही मल के दौरान खून बहता रहता है। कोलोरेक्टल कैंसर की जांच करवाने के लिए बायोप्सी या एंडोस्कोपी करवाना ज़रूरी होता है।
5- एनल फिस्टुला : एनल फिस्टुला को आम बोलचाल की भाषा में भगंदर भी कहा जाता है. इसमें मलद्वार के पास मस्से में से पस निकलता रहता है. इसके कारण शौच के दौरान बहुत तेज दर्द होता है और खून निकलता है। डॉक्टर से जांच करवाके आप यह जान सकते हैं कि आपकी समस्या बवासीर है या एनल फिस्टुला है।
6- रेक्टल प्रोलैप्स (Rectal Prolapse) : जब बड़ी आंत प्राकृतिक रूप से अपना जुड़ाव खो देती है और गुदा या मलद्वार के बाहर फैलने लगती है तो इस समस्या को रेक्टल प्रोलैप्स कहते हैं। इसकी वजह से भी मल में खून आता है और मलत्याग करने में दर्द होता है। इसलिए इसे बवासीर समझने की गलती ना करें बल्कि डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच कराएं।
7) प्रोक्टाइटिस (Proctitis) : इस समस्या के कारण मलद्वार की अंदुरुनी परतों में सूजन हो जाती है जिसकी वजह से शौच या मलत्याग के दौरान खून निकलने लगता है और दर्द होता है। डॉक्टर सिग्मोडोस्कोपी की मदद से इस बीमारी का पता लगाते हैं।
इसलिए यह जान लें कि मल में खून आने के सभी मामलों में हेमरॉइड या बवासीर नहीं होता है। इसलिए इसे अनदेखा करना या शर्म के मारे इसका इलाज न करवाना आपके लिए काफी भरी पड़ सकता है। जब भी आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखे तो अपनी मर्जी से कोई दवा लेने के बजाय डॉक्टर के पास जाएं और अपनी बीमारी का सही इलाज करवाएं।
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