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नवजात को लेट कर दूध पिलाना पड़ सकता है महंगा
नवजात शिशु को लेट कर मां का दूध पिलाना उसके आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है। इस दौरान मां व बच्चों के बीच सहीं एंगिल नहीं होने से नवजात के नाक में दूध चला जाता है। जो नाक में बनी आंशू की थैली में...
नवजात शिशु को लेट कर मां का दूध पिलाना उसके आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है। इस दौरान मां व बच्चों के बीच सहीं एंगिल नहीं होने से नवजात के नाक में दूध चला जाता है। जो नाक में बनी आंशू की थैली में इकठ्ठा हो जाता है। आंखों से लगातार पानी गिरने लगता है।
इससे नवजात की आंखे लाल हो जाती है और वह न्यूनेटल कंजिक्टवाइटीस के शिकार हो जाते है। सेंटर फॉर साइट के नेत्र विशेषज्ञों का दावा है कि जिले में 20 फीसदी नवजात इस रोग के शिकार है। वही, ओपीडी में इसके रोज पांच से छह मरीज आ रहें है।
उनका कहना है कि नवजात शिशुओं में आंख से पानी गिरना एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। नवजात शिशुओं को दूध पिलाने के दौरान कई बातों की अनदेखी कर दी जाती है। मां द्वारा लेटकर दूध पिलाने से दूध नवजात के नाक की नली में एकत्रित हो जाता है। इससे उसके नली में रुकावट हो जाती है। आखों से लगातार पानी गिरना शुरु हो जाता है। छोटे बच्चों में आंसू की टय़ूब एक ड़ेढ महीने में विकसित होती है। तब तक वह पश का रुप ले लेता है। इससे शिशु में न्यूनेटल कंजिक्टवाइटिस नामक बीमारी के शिकार हो जाते है।
सेंटर फॉर साइड के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती नागिया का कहना है कि नाक की नली को एक विशेष प्रकिया से खोला जाता है। इसकी शिकायत होने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। उपचार में देरी होने पर ऑपरेशन तक करने की नौबत आ जाती है। चार सप्ताह तक नवजात के आंखों में आंसू कम बनते है। आंखों से लगातार पानी आने से गंभीर बीमारियां हो सकती है। शिशुओं में तीन महीने तक लगतार आंसू गिरने से नस में दिक्कत शुरु हो जाती है।
कैसे पिलाएं मां अपने बच्चों को दूध
- दूध पिलाने के दौरान नवजात का सिर सीधा रखें
- आंसू आने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह ले
- डाक्टर की सलाह पर नाक को दबाएं
- नाक की मसाज करे
- एंटिबायटिक का प्रयोग करें
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