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लीवर सिरोसिस क्या है?

सरल शब्दों में कहा जाए तो लीवर सिरोसिस लीवर से जुड़ी एक क्रोनिक डिजीज है क्योंकि इसे होने में काफी लंबा समय लगता है और इसकी शुरुआत लीवर में फैट जमा होने से होती है। जब लीवर में फैट यानि वसा जमा होने लगता है तो उसकी वजह से लीवर डैमेज होना शुरू हो जाता है। फैट की वजह से लीवर को हुए इस डैमेज को फैटी लीवर के नाम जाना है। इस स्थिति में लीवर सामान्य की तुलना म कड़ा हो जाता है और यह स्थिति चलती रहती है।

एक बार जब किसी व्यक्ति को फैटी लीवर की समस्या हो जाती है तो उसके बाद उसकी लीवर सिरोसिस की यात्रा शुरू हो जाती है, जिसमे तक़रीबन 10 वर्षों का समय लग सकता है। इस दौरान अगर लीवर में कोई चोट लग जाए या सूजन आ जाए तो इसकी वजह से लिवर फाइब्रोसिस (liver fibrosis) की समस्या हो जाती है । लिवर फाइब्रोसिस, फैटी लिवर का अगला स्‍टेज होता है।

लिवर फाइब्रोसिस होने के बाद लीवर के टिश्यू लीवर में हुई खामी को ठीक करना शुरू कर देते हैं। इस दौरान लीवर में निशान ऊतक या स्कार ऊतक (Scar tissue/ ऊतकों पर खरोंच जैसे निशान) बनते हैं। धीरे-धीरे यह स्कार ऊतक स्वस्थ ऊतकों को खराब करना या बदलना शुरू कर देते हैं और आंशिक रूप (partially) से लीवर में खून के बहाव को रोक देते हैं। जब लीवर में ऐसा होता है इसकी वजह से लीवर की स्वस्थ कोशिकाएं मरना शुरू हो जाती है, जिसकी वजह से लीवर के काम में कमी आने लग जाती है। इस दौरान निशान ऊतक अपना काम जारी रखते हैं।

जब ऐसा लंबे समय तक चलता रहता है तो इसकी वजह से लीवर खराब हो जाता है जिसे लीवर डैमेज या लीवर सिरोसिस के नाम से जाना जाता है। फाइब्रोसिस लिवर डैमेज की पहली स्टेज है, क्योंकि यहाँ से लीवर खराब होना शुरू हो जाता है। अगर समय पर फैटी लीवर या फाइब्रोसिस लिवर से छुटकारा पा लिया जाए तो लीवर खराब नहीं होता। अगर ऐसा नहीं किया जाए तो इसकी वजह से रोगी को न केवल गई गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ता है बल्कि लिवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant) भी करवाना पड़ सकता है। इसके अलावा इस गंभीर रोग की वजह से रोगी की जान भी जा सकती है।

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