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रोग के अंतिम चरण के दौरान लिवर हेपेटाइटिस हो सकता है या लिवर फेल हो सकता है जिससे पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप लिवर सिरोसिस के पहले ही स्टेज के लक्षणों को जानें और फिर यहीं पर इलाज करवा कर इस बीमारी से बाहर आएं। ताकि, ये लिवर सिरोसिस का कारण ना बने।

जैसे-जैसे लीवर सिरोसिस की समस्या बढ़ने लगती है तो उपरोक्त लक्षणों के साथ-साथ निम्नलिखित लक्षण भी दिखाई देने लग जाते हैं :-

त्वरित दिल की धड़कन (rapid heartbeat)
व्यक्तित्व परिवर्तन
उलझन
चक्कर आना
मसूड़ों से खून आना
शरीर और ऊपरी बाहें कमजोर होना
ड्रग्स और अल्कोहल के प्रसंस्करण में कठिनाइयाँ (Difficulties in processing drugs and alcohol)
टखनों, पैरों और तलवों में सूजन आना
बाल झड़ने की समस्या होना
चोट लगने की उच्च संवेदनशीलता
पीलिया होना – इस दौरान रोगी की त्वचा और आँखे पीली पड़ जाती है, साथ ही आंखों और जीभ का रंग भी बदलना शुरू हो जाता है।
सेक्स ड्राइव का नुकसान
याददाश्त की समस्या
पेट के ऊपरी हिस्से में सूजन होना
बार-बार बुखार होना
संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है या कोई गंभीर संक्रमण होना
मांसपेशियों में ऐंठन
नकसीर (नाक से खून आना)
दाहिने कंधे में दर्द
सांस फूलना – यह समस्या बैठे-बैठे भी होती है
मल काला हो जाता है या बहुत पीला हो जाता है
कब्ज की समस्या होना
पेशाब का रंग गहरा होना
खून की उल्टी आना
चलने और चलने में समस्या
पेट में सूजन आना
त्वचा का पतला होना
खुजलीदार त्वचा होना

जब लीवर सिरोसिस होने पर रोगी को उपरोक्त लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं तो इसका मतलब है कि अब रोगी की शारीरिक स्थिति काफी बिगड़ चुकी है और उसे जल्द से जल्द उपचार लेने की आवयश्कता है। अगर उपचार जल्दी से नहीं मिला तो रोगी कि जान भी जा सकती है।

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