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मां के दूध के 7 अनजाने फायदों के बारे में जानें

क्यों माँ का दूध नवजात शिशु को पिलाना है ज़रूरी? जाने!
माँ का दूध नवजात शिशु के लिए रक्षासूत्र की तरह काम करता है। या यूं कहे तो माँ का दूध बच्चे के लिए जीवनदायिनी अमृतधारा के समान है। पहले के जमाने में बिना सही जानकारी या अंधविश्वास के चलते लोग बच्चे के जन्म के तुरन्त बाद स्तन में जो पहली बार पीले रंग का जो दूध आता है (first milk- colostrum) उसको निकाल कर फेंक देते हैं लेकिन सच तो ये है कि ये पहला दूध नवजात शिशु के संरक्षण के लिए सबसे ज़रूरी होता है। ये दूध प्रोटीन और एन्टी बॉडी के गुण से भरपूर होता है जो शिशु के इम्युनिटी लेवल को मजबूत करने में अहम् भूमिका निभाता है। ये नवजात शिशु के डाइजेस्टिव सिस्टेम को बेहतर बनाने में भी बहुत मदद करता है। लेकिन इसके साथ ये जानना ज़रूरी है क्यों माँ का दूध शिशु के लिए ज़रूरी और सुरक्षित होता है। साथ ही आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि स्तनपान करवाने से माँ को भी बहुत शारीरिक तौर पर लाभ मिलता है।

इस बारे में सही और विस्तृत जानकारी लेने के लिए हमने शिशु रोग विशेषज्ञा गीतांजली शाह, अश्विनी हॉस्पिटल एण्ड आईवीएफ सेंटर और सुप्राज़ा फाउन्डेशन, मुम्बई से बात की। उन्होंने इस बारे में बहुत दिलचस्प और महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी जो हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं।

क्यों माँ का दूध नवजात शिशु को पिलाना है ज़रूरी-


माँ का दूध सर्वोत्तम आहार क्यों है?

माँ के दूध में कोलेस्ट्रॉम का उत्पादन होता है जिसमें प्रोटीन, कैल्सियम, एन्टीबॉडी, लिपिड, कार्बोहाइड्रेड, मिनरल और बहुत सारे पौष्टिक तत्व होते हैं जो शिशु के शारीरिक और आंतरिक विकास के लिए ज़रूरी होता है। माँ के दूध में पानी की मात्रा इतनी होती है वह शिशु के शरीर में पानी की आवश्यकता को पूर्ण करने में पूरी तरह से सक्षम होता है। माँ के दूध की सबसे अच्छी बात ये है कि प्रीमैच्युर हो या या नॉर्मल दोनों उम्र के शिशु के ज़रूरत को पूरा करने की ये क्षमता रखता है। इसलिए जन्म से छह महीने तक दूध पिलाना शिशु के लिए बहुत ही आवश्यक होता है।

इम्युनिटी सिस्टेम या रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करता है- माँ के दूध में इम्युनोग्लोब्यूलीन (immunoglobulin) का लेवल हाई होता है जो बच्चे के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी होता है। माँ के दू्ध में लैक्टोफोर्मिन नाम का तत्व होता है जो शिशु के आंतों में रोगाणु के पनपने से रोकते हैं।

पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है- नवजात शिशु का डाइजेस्टिव सिस्टेम बहुत कमजोर होता है इसलिए उस वक्त माँ का दूध ही एक ऐसा पौष्टिक आहार है जो वह आसानी से हजम भी कर सकता है और शरीर को पूर्ण रूप से सारी पौष्टिकता भी मिल जाती है। जन्म के छह हफ़्ते तक शिशु की पाचन शक्ति बहुत ही कमजोर रहती है माँ का दूध आंतों की इम्युनिटी लेवल को मजबूत करने में अहम् भूमिका को निभाता है।

संक्रमण से शिशु को सुरक्षित रखने में मदद करता है- नवजात शिशु को जन्म से संक्रमण होने का बहुत खतरा होता है जिसके कारण उन्हे दस्त, कुपोषण, न्यूमोनिया आदि होने का बहुत खतरा होता है। इसलिए प्रीमैच्युर बेबी से लेकर नॉर्मल बेबी सभी को माँ का दूध पिलाना बहुत ज़रूरी होता है इससे शरीर किसी भी संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने में सक्षम हो पाता है।

संदूषण(contamination) की संभावना न के बराबर होती है- शिशु को ऊपर का दूध पिलाने पर इंफेक्शन होने का डर सबसे ज्यादा होता है लेकिन स्तनपान कराने पर इसका खतरा शुन्य के समान होता है। इससे शिशु को किसी भी प्रकार के संक्रमण या इंफेक्शन होने का खतरा भी कम होता है।

अब चलते हैं कि स्तनपान करवाने या शिशु को दूध पिलाने पर माँ को क्या लाभ पहुँचता है-

माँ की कैलोरी बर्न होता है- शिशु को स्तनपान करवाने पर माँ का जो बड़ा हुआ वज़न होता है वह धीरे-धीरे कंट्रोल में आने लगता है क्योंकि इससे बहुत ज्यादा कैलोरी बर्न होता है। यानि स्तनपान करवाने पर माँ बहुत जल्दी शेप में आ सकती हैं।

गर्भाशय का संकुचन बेहतर होता है- प्रसव के बाद माँ को इंटरनल ब्लीडिंग आदि की समस्या आदि होती है लेकिन स्तनपान करवाने पर गर्भाशय का संकुचन होने के साथ-साथ इंटरनल ब्लीडिंग की समस्या भी कुछ हद तक कम हो जाती है।

माँ के लिए शिशु को आहार देने की सहुलियत- माँ शिशु को कहीं भी किसी भी वक्त दूध पिला सकती है इसके लिए उन्हें किसी चीज पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

इसलिए एक वाक्य में यही कह सकते हैं कि माँ का दूध हर शिशु का अधिकार और उसकी अहम् ज़रूरत है, इससे उसे वंचित न करें!!

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