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स्तनदूध की आपूर्ति बढ़ाने के पारंपरिक उपाय

बहुत सी नई माँओं को चिंता रहती है कि वे पर्याप्त स्तन दूध का उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। मगर यदि आपका शिशु स्वस्थ है और उस​का विकास सही दर से हो रहा है तो इस बात की पूरी संभावना है कि आपके दूध की आपूर्ति ठीक है। सेहतमंद, संतुलित और वि​विध आहार स्तनपान करवाने वाली माँ के साथ-साथ शिशु के लिए भी बहुत अच्छा है। कुछ खाद्य पदार्थ जैसे कि मेथी, सौंफ और लहसुन आदि स्तन दूध की आपूर्ति बढ़ाने (गैलेक्टोगॉग) के लिए काफी लो​कप्रिय माने जाते हैं। हालांकि, स्तनदूध की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कोई भी हर्बल उपचार लेने से पहले डॉक्टर से अवश्य पूछ लें। साथ ही, यदि आपको लगे कि शिशु पर्याप्त दूध नहीं मिल रहा है, तो शिशु के डॉक्टर से बात करें।
कैसे पता चलेगा कि मेरे स्तनों में पर्याप्त दूध बन रहा है या नहीं?
जब आप अपने शिशु को स्तनपान कराना शुरु करती हैं, तो दूध की आपूर्ति को लेकर चिंतित होना एक सामान्य बात है।

यह चिंता करने वाली आप अकेली नहीं हैं। और भी बहुत सी ऐसी माएं हैं, जिन्हें अपने दूध की मात्रा के साथ-साथ इस बात कि चिंता रहती है कि बढ़ती जरुरतों की पूर्ति के लिए शिशु को पर्याप्त दूध मिल पा रहा है या नहीं।

शिशु का वजन बढ़ना और उम्र के अनुसार उसका सही विकास, इस बात के सबसे अच्छे संकेत है कि आप पर्याप्त दूध का उत्पादन कर रही हैं। शुरुआत के कुछेक दिनों में नवजात का वजन घटना सामान्य है, लेकिन जन्म के तीन से पांच दिन बाद फिर से उसका वजन बढ़ने लगता है। आमतौर पर, जब शिशु 14 दिन का हो जाता है, तो उसका वजन फिर से उतना ही हो जाता है, जितना कि जन्म के समय था।

नीचे कुछ और संकेत भी दिए गए हैं, जिनसे पता चल सकता है कि शिशु मिलने वाली दूध की मात्रा से संतुष्ट है। जैसे:

स्तनपान कराना आरामदायक है और इस दौरान आपको कोई दर्द महसूस नही होता।
आपका नवजात दिन में छह से आठ बार स्तनपान कर रहा है और स्तनपान के बाद वह संतुष्ट दिखता है।
स्तनपान कराने के बाद आपके स्तन खाली और मुलायम लगते हैं।
स्तनपान करते हुए आप शिशु को दूध गटकते हुए देख व सुन सकती हैं।
जब शिशु का पेट भर जाता है, तो वह स्वयं ही अपना मुंह स्तन से हटा लेता है।
आपका शिशु 24 घंटे में कम से कम छह बार पेशाब कर रहा है। उसका मल पीला और ढेलेदार है, जो कि फटे हुए दूध के समान दिखता है। अनन्य स्तनपान करने वाले शिशु एक दिन में बहुत बार या फिर पांच दिन में एक बार मल त्याग कर सकते हैं। दोनों ही स्थितियां एकदम सामान्य हैं।


कम स्तन दूध आपूर्ति की आशंका वाले ज्यादातर मामलों में असली समस्या यह नहीं होती कि आप कितने दूध का उत्पादन कर पा रही हैं। बल्कि समस्या यह होती है कि आपका शिशु कितना दूध पीने में सक्षम है। सुनिश्चित करें कि शिशु स्तन को सही ढंग से मुंह में ले, ताकि आपके पास जितना दूध है, उसे वह कुशलतापूर्वक निकाल सके।

अगर स्तनपान करवाने में आपको दर्द महसूस होता हो, तो शिशु के मुंह में स्तन सही ढंग से देने (लैचिंग) के बारे में स्तनपान विशेषज्ञ की मदद लें। जब आप इसका प्रयास कर रही हों, तब आप अपना दूध निकालकर यानि एक्सप्रेस करके शिशु को चम्मच या पलड़ाई की मदद से पिला सकती हैं। स्तन दूध एक्सप्रेस करने से आपके शरीर को और ज्यादा दूध बनाने का प्रोत्साहन मिलेगा और फॉर्मूला दूध पर निर्भरता कम होगी।

स्तन दूध की ज्यादा आपूर्ति बनाने और उसे जारी रखने के लिए शिशु को बार-बार और जब वह चाहे तब स्तनपान कराना महत्वपूर्ण है। अगर, आपका नवजात काफी अधिक सोता है, तो हो सकता है आपको उसे नींद से जगाकर ज्यादा बार स्तनपान करने के लिए सौम्यता से प्रोत्साहित करना पड़े। यह आपके स्तनों को और अधिक दूध उत्पादित करने के लिए उत्प्रेरित करेगा।

आपका शरीर मांग के अनुसार आपने दूध के उत्पादन में बदलाव करता रहता है। इसलिए, यदि आप शिशु को स्तन दूध की बजाय फॉर्मूला दूध या अन्य अनुपूरक (सप्लीमेंट) देना शुरु करती हैं, तो आपके दूध की आपूर्ति कम हो जाएगी। आप शिशु को जितना अधिक स्तनपान कराएंगी, आपका शरीर उतना ज्यादा दूध का उत्पादन करेगा।

साथ ही, शिशु को बार-बार अपनी त्वचा के संपर्क में रखने (कंगारू मदर केयर) से स्तन दूध के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और इससे शिशु को स्तन सही ढंग से मुंह में लेने का प्रोत्साहन भी मिलता है।

अगर, आपको लगता है कि आप पर्याप्त स्तनदूध नहीं बना पा रहीं हैं या फिर आप शिशु के वजन को लेकर चिंतित हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से बात करना बेहतर है। वह ही आपको जरुरी सलाह या उपचार दे पाएंगी।
स्तनपान करवाने वाली माँओं के लिए पेय (ऑडियो)
कौन से पेय स्तनदूध की आपूर्ति बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, यहां सुनें!
कौन से भोजन स्तनदूध आपूर्ति बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं?
स्तन दूध की आपूर्ति बढ़ाने के लिए आप जो कुछ भी खाती या पीती हैं उन्हें अंग्रेजी में गैलेक्टोगॉग कहा जाता है। यह एक आम मान्यता है कि कुछ विशेष भोजन व पेय स्तनों में दूध की आपूर्ति बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, इस बारे में बहुत सीमित शोध उपलब्ध है और कुछ मामलों में तो इन पदार्थों की प्रभावशीलता प्रमाणित करने के लिए कोई वैज्ञानिक शोध भी उपलब्ध नहीं है। मगर, ये खाद्य पदार्थ कई पीढ़ियों से स्तनपान कराने वाली मांओं को दिए जाते रहे हैं और बहुत सी मांएं यह मानती भी हैं कि इन खाद्य पदार्थों से उन्हें मदद मिली है।

याद रखें कि इन सभी खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर किया जाना चाहिए। कोई भी हर्बल वाला या प्राकृतिक अनुपूरक (सप्लीमेंट) डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लें।

मेथी के बीज
दूध की आपूर्ति बढ़ाने के लिए मेथी के बीजों का इस्तेमाल विश्व भर में कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। इस प्राचीन धारणा के समर्थन के लिए कुछ शोध उपलब्ध है, मगर ये इसकी प्रभावशीलता प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

मेथी के बीजों में ओमेगा-3 वसा जैसे स्वस्थ विटामिन होते हैं, जो स्तनपान कराने वाली माँ के लिए अच्छे रहते हैं। ओमेगा-3 वसा शिशु के मस्तिष्क विकास के लिए महत्वपूर्ण है। मेथी के साग में बीटाकैरोटीन, बी विटामिन, आयरन और कैल्श्यिम भरपूर मात्रा में होते है।

मेथी की चाय नई मांओं को दिया जाने वाला एक लोकप्रिय पेय है। मेथी वैसे भी कई व्यंजनों में डाली जा सकती है, विशेषकर सब्जियों और मांस के व्यंजनों में। इसे आटे में मिलाकर परांठे, पूरी या भरवां रोटी भी बनाई जा सकती है।

मेथी, पौधों के उसी वर्ग से संबंध रखती है, जिसमें मूंगफली, छोले और सोयाबीन के पौधे भी शामिल हैं। इसलिए, अगर आपको इनमें से किसी के भी प्रति एलर्जी है, तो आपको मेथी से भी एलर्जी हो सकती है।

सौंफ
सौंफ भी स्तन दूध की आपूर्ति बढ़ाने का एक अन्य पारंपरिक उपाय है। शिशु को गैस और पेट दर्द की परेशानी से बचाने के लिए भी नई माँ को सौंफ दी जाती है। इसके पीछे तर्क यह है कि पेट में गड़बड़ या पाचन में सहायता के लिए वयस्क लोग सौंफ का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए स्तनदूध के जरिये सौंफ के फायदे शिशु तक पहुंचाने के लिए यह नई माँ को दी जाती है। हालांकि, इन दोनों धारणाओं के समर्थन के लिए कोई शोध उपलब्ध नहीं है, मगर बहुत सी माताएं मानती हैं कि सौंफ से उन्हें या उनके शिशु को फायदा मिला है।

सौंफ का पानी और सौंफ की चाय प्रसव के बाद एकांतवास के पारंपरिक पेय हैं।

लहसुन
लहसुन में बहुत से रोगनिवारक गुण पाए जाते हैं। यह प्रतिरक्षण प्रणाली को फायदा पहुंचाता है और दिल की बीमारियों से बचाता है। इसके साथ-साथ लहसुन स्तन दूध आपूर्ति को बढ़ाने में भी सहायक माना गया है। हालांकि, इस बात की प्रमाणिकता के लिए कोई ज्यादा शोध उपलब्ध नहीं है।

अगर, आप बहुत ज्यादा लहसुन खाती हैं, तो यह आपके स्तनदूध के स्वाद और गंध को प्रभावित कर सकता है। एक छोटे अध्ययन में पाया गया कि जिन माताओं ने लहसुन खाया था, उनके शिशुओं ने ज्यादा लंबे समय तक स्तनपान किया। यानि कि हो सकता है शिशुओं को स्तन दूध में मौजूद लहसुन का स्वाद पसंद आए। हालांकि, यह अध्ययन काफी छोटे स्तर पर था और इससे कोई सार्थक परिणाम नहीं निकाले जा सकते। वहीं, कुछ माएं यह भी कहती हैं कि अगर वे ज्यादा लहसुन का सेवन करती हैं, तो उनके शिशुओं में पेट दर्द हो जाता है।

लहसुन का दूध प्रसव के बाद स्तनपान कराने वाली मांओं को दिया जाने वाला एक लोकप्रिय पारंपरिक पेय है।

हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, सरसों का साग और बथुआ आदि आयरन, कैल्श्यिम और फोलेट जैस खनिजों का बेहतरीन स्त्रोत हैं। इनमें बीटाकैरोटीन (विटामिन ए) का एक रूप और राइबोफ्लेविन जैसे विटामिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं। इन्हें भी स्तन दूध बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

स्तनपान कराने वाली मांओं को प्रतिदिन एक या दो हिस्से हरी पत्तेदार सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है। आप इन सब्जियों को मसालों के साथ पका सकती हैं या फिर थेपला, विभिन्न सब्जियां डालकर पोहा या इडली जैसे नाश्ते भी बना सकती हैं।

जीरा
दूध की आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ माना जाता है कि जीरा पाचन क्रिया में सुधार और कब्ज, अम्लता (एसिडिटी) और पेट में फुलाव से राहत देता है। जीरा बहुत से भारतीय व्यंजनों का अभिन्न अंग है और यह कैल्शियम और राइबोफ्लेविन (एक बी विटामिन) का स्त्रोत है।

आप जीरे को भूनकर उसे स्नैक्स, रायते और चटनी में डाल सकते हैं। आप इसे जीरे के पानी के रूप में भी पी सकती हैं।

तिल के बीज
तिल के बीज कैल्शियम का एक गैर डेयरी स्त्रोत है। स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए कैल्शियम एक जरुरी पोषक तत्व है। यह आपके शिशु के विकास के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। शायद इसलिए ही यह स्तनपान कराने वाली माताओं के आहार में शामिल की जाने वाली सदियों पुरानी सामग्री है।

आप तिल के लड्डू खा सकती हैं या फिर काले तिल को पूरी, खिचड़ी, बिरयानी और दाल के व्यंजनों में डाल सकती हैं। कुछ माएं गज्जक व रेवड़ी में सफेद तिल इस्तेमाल करना पसंद करती हैं।

तुलसी
तुलसी की चाय स्तनपान कराने वाली मांओं का एक पारंपरिक पेय है। किसी शोध में यह नहीं बताया गया कि तुलसी स्तन दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक है, मगर माना जाता है कि इसका एक शांतिदायक प्रभाव होता है। यह मल प्रक्रिया को सुधारती है और स्वस्थ खाने की इच्छा को बढ़ावा देती है। मगर, अन्य जड़ी-बूटियों की तरह ही तुलसी का सेवन भी सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए।

सुवा
सुवा के पत्ते आयरन, मैग्निशियम और कैल्श्यिम का अच्छा स्त्रोत हैं। माना जाता है कि सुवा स्तन दूध आपूर्ति में सुधार, पाचन क्रिया व वात में आराम और नींद में सुधार करता है। सुवा हल्का मूत्रवर्धक भी होता है, इसलिए इसका सीमित सेवन किया जाना चाहिए।

आप सुवा के बीज साबुत या उन्हें पीस कर अचार, सलाद, चीज़ स्प्रेड और तरी या सालन में डाल सकती हैं। सुवा की चाय प्रसव के बाद दिया जाने वाला एक लोकप्रिय पेय है।

लौकी व तोरी जैसी सब्जियां
पारंपरिक तौर पर माना जाता है कि लौकी, टिंडा और तोरी जैसी एक ही वर्ग की सब्जियां स्तन दूध की आपूर्ति सुधारने में मदद करती हैं। ये सभी सब्जियां न केवल पौष्टिक एवं कम कैलोरी वाली हैं, बल्कि ये आसानी से पच भी जाती हैं।

दालें व दलहनें
दालें, विशेषकर कि मसूर दाल, न केवल स्तन दूध की आपूर्ति बढ़ाने में सहायक मानी जाती हैं, बल्कि ये प्रोटीन का भी अच्छा स्त्रोत होती हैं। इनमें आयरन और फाइबर भी उच्च मात्रा में होता है।

मेवे
माना जाता है कि बादाम और काजू स्तन दूध के उत्पादन को बढ़ावा देते हैं। इनमें भरपूर मात्रा में कैलोरी, विटामिन और खनिज होते हैं, जिससे ये नई माँ को ऊर्जा व पोषक तत्व प्रदान करते हैं। इन्हें स्नैक्स के तौर पर भी खाया जा सकता है और ये हर जगह आसानी से उपलब्ध होते हैं।

आप इन्हें दूध में मिलाकर स्वादिष्ट बादाम दूध या काजू दूध बना सकती हैं। स्तनपान कराने वाली माँ के लिए पंजीरी, लड्डू और हलवे जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ बनाने में मेवों का इस्तेमाल किया जाता है।

जई और दलिया
जई आयरन, कैल्शियम, फाइबर और बी विटामिन का बेहतरीन स्त्रोत होता है और स्तनपान कराने वाली मांओं के बीच ये काफी लोकप्रिय है। पारंपरिक तौर पर जई को चिंता व अवसाद कम करने में सहायक माना जाता है।

इन्हें आमतौर पर दलिये की तरह ही खाया जाता है। इसका पौष्टिक मूल्य बढ़ाने के लिए आप इसमें मेवे, दूध, मसाले या फल भी डालकर खा सकती हैं।
क्या मुझे पर्याप्त स्तनदूध बनाने के लिए अधिक खाने-पीने की जरुरत है?
यह दो बातों पर निर्भर करता है। एक तो यह कि गर्भवती होने से पहले आपका बीएमआई सामान्य था या नहीं और दूसरी यह कि गर्भावस्था के दौरान आपका वजन कितना बढ़ा।

अगर, गर्भवती होने से पहले आपका वजन कम या सामान्य था, तो स्तनपान के दौरान कैलोरी की जरुरत पूरा करने के लिए आपको थोड़ा अधिक भोजन खाने की सलाह दी जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ, यदि आपका वजन गर्भावस्था से पहले ज्यादा था और गर्भावस्था के दौरान भी आपका अपेक्षित वजन बढ़ा है, तो हो सकता है आपको कैलोरी की बिल्कुल भी आवश्यकता न हो। आपको अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत है या नहीं, इस बारे में आपकी डॉक्टर ही बेहतर बता सकेंगी।

सामान्य सलाह यही है, कि आप अपनी भूख के अनुसार चलें और जब भी भूख लगे, खाना खाएं। आपका शरीर दूध का उत्पादन करने में काफी कुशल होता है। हो सकता है गर्भावस्था के दौरान शरीर ने वसा संग्रहित करके रखी हो, जिसका इस्तेमाल स्तन दूध के उत्पादन में किया जा सकता है।

स्तनपान के दौरान आपको पानी केवल अपनी प्यास बुझाने के लिए ही पीने की जरुरत है। अत्याधिक पानी पीने या प्यासे रहने से आपके दूध की आपूर्ति पर असर नहीं पड़ता है। आपका शरीर जरुरी तत्वों का नियमित संग्रहण करने में काफी सक्षम होता है, ताकि वह आपकी दूध की आपूर्ति को बनाए रख सके।

हालांकि, इस बात पर ध्यान दें कि स्तनपान के दौरान आपका शरीर ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकालता है, जिसकी वजह से आपको अधिक प्यास लगती है। इसलिए, स्तनपान कराते समय पानी का गिलास अपन साथ ही रखें।

आपने गर्भावस्था के दौरान जिस स्वस्थ आहार योजना का पालन किया था, उस स्वस्थ और विभिन्न किस्म के आहार का सेवन आपको अब भी जारी रखना चाहिए। इससे आपको अपनी और शिशु की जरुरत के सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल जाएंगे। हालांकि, स्तनपान कराने वाली माँ को रोजाना आयरन, फॉलिक एसिड, विटामिन बी और कैल्शियम के अनुपूरक (सप्लीमेंट) लेने की सलाह दी जाती है। आपके आहार के बारे में जानने के बाद डॉक्टर आपके लिए उचित अनुपूरक की सलाह देंगी और बताएंगी कि आपको इनकी कितनी खुराक लेनी चाहिए।
क्या स्तनों की मालिश से दूध के उत्पादन में मदद मिलती है?
स्तनों की मालिश करने से दूध के उत्पादन की मात्रा नहीं बढ़ती है। मगर ये निम्नांकित मदद कर सकती है:

दूध निकलने की स्वत: ​क्रिया को प्रेरित करना
अवरुद्ध नलिकाओं को खोलना
नसों के गुच्छे या गांठों और सख्त हिस्सों को ढीला करना
स्तनों की सूजन (मैस्टाइटिस) का खतरा भी कम करना

बहरहाल, स्तनों की मालिश हल्के हाथों से की जानी चाहिए। स्तनों पर बलपूर्वक मालिश करने से नलिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे स्तनों से दूध बाहर निकल सकता है। बेहतर है कि स्तनों की मालिश आप अपने आप ही करें, क्योंकि इन पर कितना दबाव डालना है, यह आपसे बेहतर कोई नहीं बता सकता।

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