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पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होने के कारण गंभीर हो सकते हैं। इस स्थिति को मेनोरेजिया कहते हैं। इनके बारे में जानकारी होना ज़रूरी है।

पीरियड्स के दौरान सामान्य से अधिक ब्लीडिंग होना असामान्य है। लेकिन अगर ये कभी-कभार होती है तो गंभीर नहीं है। अगर हर बार आपको ये समस्या हो रही है तो ये घातक बीमारियों का कारण बन सकती हैं। इनमें से एक स्थिति को मेनोरेजिया कहते हैं।

महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने का आसानी से पता चल जाता है। सामान्यतः पीरियड्स के 4-5 दिनों में 30 से 40 मिली लीटर तक रक्तस्त्राव होता है लेकिन अगर 80 मिली लीटर या इस से ज़्यादा हो तो इसे पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग होना कहते हैं।

पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होने के कुछ कारण इस प्रकार है :

1. फाइब्रॉयड ट्यूमर – गर्भाशय में ट्यूमर होने पर ब्लीडिंग अधिक होती है।
2. आयरन की कमी – शरीर में आयरन की कमी होने की वजह से एनीमिया तक हो जाता है। ये भी पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होने का कारण है।
3. कैंसर – ओवेरियन कैंसर, गर्भाशय कैंसर की वजह से प्रजनन तंत्र या रिप्रोडक्टिव सिस्टम प्रभावित होता है। ये भी भारी मात्रा में ब्लीडिंग होने का एक कारण है।
4. हार्मोनल असंतुलन – महिलाओं के शरीर में हार्मोन का स्तर बिगड़ जाने पर गर्भाशय के अंदर बनने वाली परत मोटी हो जाती है और वो पीरियड्स में ब्लीडिंग के जरिए शरीर से बाहर आ जाती है।
5. गर्भाशय पॉलिप – यूट्रस की परत में पॉलीप्स बढ़ने लगता है। इसका मतलब जब हार्मोन के स्तर में वृद्धि हो जाती है तो हार्मोन असंतुलन हो जाते हैं और जिससे ज्यादा मात्रा में ब्लीडिंग होती है।
6. दवाएँ – शरीर में सूजन और जलन कम करने वाली दवाएं या एंटीकोगुलेंट दवाओं की वजह से भी हैवी पीरियड्स होते हैं।
7. प्रेग्नेंसी संबंधित समस्या – एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जिसमें फर्टिलाइज्ड एग यूट्रस के बाहर बढ़ने लगता है तो अन्य समस्याओं के साथ हैवी ब्लीडिंग मुख्य रूप से देखा जाती है।
8. गैर हार्मोनल गर्भनिरोधक उपकरण (इंट्रायूटरिन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस) – ये भी पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग के कारण हैं।
9. ब्लीडिंग डिसऑर्डर – खून के थक्‍के जमने के कारण भी मासिक धर्म में ज्यादा मात्रा में ब्लीडिंग होती है। जो महिलाएं खून को पतला करने वाली दवा का सेवन करती है वह इस बीमारी से अक्सर ग्रस्त हो जाती हैं।
10. पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) – यह एक प्रकार का संक्रमण होता है जो यूट्रस, फैलोपियन ट्यूब्‍स आदि में होता है। पीआईडी मुख्य रूप से सेक्‍स संबंधी संक्रमण के कारण होता है और महिलाओं में माहवारी के दौरान हैवी ब्लीडिंग का कारण बन जाता है।

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