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लकवा का उपचार के 10 घरेलु तरीके और आयुर्वेदिक देसी उपाय
लकवा का उपचार के घरेलु तरीके: लकवा को पैरालिसिस अटैक या स्ट्रोक भी कहते है जिसकी वजह से व्यक्ति चलने फिरने और लकवा ग्रस्त अंग को महसूस कर पाने की ताकत खो देता है। चेहरे (face) पर lakwa होने से मरीज का मुँह आधा टेढ़ा हो जाता है और बोलने पर मुँह से आवाज नहीं निकलती।
आजकल लोगों को कई बीमारियों के होने का खतरा बना रहता है| कुछ बीमारियों का इलाज आसानी से हो जाता है, लेकिन कुछ बीमारी ऐसी होती हैं, जिसमें इंसान को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है |आयुर्वेद में लकवा के इलाज की कई विधियां बताई गई हैं साथ ही आहार और दिनचर्या में बदलाव से भी लकवा के असर को कम किया जा सकता है। आइये जानते हैं कि लकवा के मरीजों को अपने खानपान में क्या बदलाव लाने चाहिए।
लकवा रोगी को रोजाना दूध में छुहारे भिगोकर देते रहना चाहिए | इससे लकवा ठीक होने लगता है |इन दोनों का मिश्रण रोगी के लिए बहुत ज्यादा लाभकारी होता है|
जब हमारे शरीर का कोई अंग या फिर पूरे शरीर की मांसपेशियां काम करना बंद कर दे तो उस अवस्था को फालीज, पक्षाघात या फिर लकवा कहते है। अगर पैरालिसिस अटैक शरीर के एक तरफ के हिस्सा पर हुआ है तो इसे अधरंग कहते है जिसमे शरीर का आधा हिस्सा काम करना बंद कर देता है। इस लेख में हम जानेंगे लकवा का उपचार घरेलु उपाय और आयुर्वेदिक नुस्खे अपना कर कैसे करे, paralysis attack treatment in hindi.
लकवा किसी भी उम्र में किसी भी व्यक्ति या महिला को हो सकता है पर अधिकतर ये ज़्यादा उम्र के लोगों में देखा जाता है। इस बीमारी से उबरने में काफी समय लग सकता है और कई बार ये लाइलाज रोग बन जाता है।
लकवा के लक्षण क्या है
सिर दर्द होना, चक्कर आना या फिर बेहोश होना।
शरीर में अकड़न आना, शरीर का कोई अंग बार बार सुन पड़ जाना और हाथ पैर को उठाने में परेशानी आना।
बात करते वक़्त अटकना, तुतलाना या बोलने में कोई परेशानी होना।
धुंधला दिखाई देना या कोई चीज दो बार देखना।
लकवा का उपचार घरेलु उपाय और देसी तरीके से कैसे करे
2 चम्मच शहद में 5 कलियाँ लहसुन की पीस कर उसका सेवन करने पर एक से डेढ़ महीने में लकवे में आराम मिलने लगेगा। इसके साथ साथ लहसुन की 5 कालियां दूध में उबाल ले और इसका सेवन करे। इस उपाय से ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहेगा और लकवा प्रभावित अंग में भी जान आने लगेगी।
पैरालिसिस के उपचार में मालिश से भी फायदा मिलता है पर किसी भी प्रकार की मालिश को शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर या फिर किसी आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह जरूर ले। कलौंजी के तेल को गुनगुना कर के हल्के हाथों से मालिश करें, इसके साथ दिन में 2 से 3 बार एक चम्मच तेल का सेवन भी करे। इस देसी नुस्खे से 30 दिनों में फर्क दिखने लगेगा।
50 से 60 ग्राम काली मिर्च को 250 ग्राम तेल में मिला कर कुछ देर तक गैस पर पकाए। अब इस तेल को गुनगुना करके लकवे प्रभावित अंग पर पतला – पतला लेप लगाये।
लकवा का उपचार में लहसुन का सेवन बहुत ही असरदार है। लहसुन से उपचार करने के लिए पहले दिन पानी के साथ लहसुन की 1 कली निगल ले, उसके बाद रोजाना एक-एक कली बढ़ाये और पानी के साथ ले, कहने का मतलब है की पहले दिन 1 कली, दूसरे दिन 2, तीसरे दिन 3 और ऐसे करते करते 21वें दिन लहसुन की पूरी 21 कलियां पानी के साथ निगलनी है। 21 दिनों के बाद अब हर रोज एक – एक कली कम कर के निगले। इस प्रयोग से अधरंग जैसी समस्या में जल्द फायदा मिलता है।
लकवा का उपचार में रोजाना सौंठ और उड़द को उबाल ले और ठंडा होने पर इसका पानी छानकर पिएं। हर रोज इस उपाय को करने से लकवे में काफी सुधार होता है।
बारीक पिसी हुई अदरक 5 ग्राम और काली उड़द दाल 10 ग्राम की मात्रा में ले और 50 ग्राम सरसों के तेल में 5 से 7 मिनट तक गर्म करें और इसमें 2 ग्राम पिसे हुए कपूर का चूरा डाल दे। हर रोज इस तेल के इस्तेमाल से गठिया और लकवे की बीमारी में गजब का फायदा मिलता है। इस तेल से जोड़ों की मालिश करने पर दर्द ठीक होता है।
खजूर का गुदा लकवा से प्रभावित अंग पर मलने से भी आराम मिलता है।
दूध में छुहारा भिगो कर खाने से भी लकवे में फायदा मिलता है, ध्यान रहे एक बार में 4 से ज्यादा छुहारे नहीं खाये।
रात को तांबे के बर्तन में एक लीटर पानी भर कर रख दे और पानी में चाँदी का एक सिक्का भी डाल दे। सुबह खाली पेट इस पानी को पिए और आधे घंटे तक कुछ ना खाए पिए। ये प्रयोग लकवा से रिकवर होने में बहुत फायदा करता है।
लकवे के रोगी को करेला ज़्यादा खाना चाहिए, लकवे में करेले के सेवन से भी फायदा मिलता है। लकवे से ग्रस्त व्यक्ति को किसी भी नशीली चीज के सेवन से परहेज करना चाहिए और खाने में घी, तेल मांस, मछली का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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