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खून के थक्के क्यों बनते हैं? शरीर के इन 5 अंगों में थक्के बनने पर जा सकती है जान
क्लॉट यानी की खून का थक्का (blood clot) एक प्रकार का कोशिकाओं और प्रोटीन का गुच्छा है, जो आपके रक्त में होता है। थक्के का काम चोट पर लगने शुरू होता है, जो बहते खून को कम करने में मदद करता है। ये आमतौर पर आपके चोट से ठीक होने पर अपने आप खत्म हो जाता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है और जब जरूरत न हो तब ये अपनेआप बनने लगे तो आपके लिए नई परेशानियां लेकर आ सकता है। खून का थक्का पूर्ण रूप से आपकी रक्त वाहिकाओं को ब्लॉक कर सकता है, जिसके कारण शरीर में गंभीर परेशानियां खड़ी हो सकती है। इस लेख में हम आपको ये बता रहे हैं कि कैसे शरीर के कुछ अंगों में खून का थक्का (blood clot) बनने पर परेशानियां हो सकती हैं।
किन लोगों को हो सकती है खून का थक्का बनने की समस्या (blood clot causes serious problems)
खून का थक्का (blood clot) तब बनता है जब आपकी हड्डी टूट जाती है या फिर आपकी कोई मांसपेशी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाती है। लेकिन कुछ स्थितियों में आपको पता ही नहीं होता है कि ऐसा क्यों हुआ लेकिन जब इसका अहसास होता है तो आपके लिए परेशानी बढ़ चुकी होती है। आइए किन लोगों में ज्यादा होती है खून का थक्का बनने की संभावना।
1-अगर आप सर्जरी से उबर रहे हों या फिर कई घंटों से व्हीलचेयर पर बैठे हों या फिर फ्लाइट में।
2-मोटे लोगों में या फिर जरूरत से ज्यादा वजन वाले लोगों में।
3-डायबिटीज या फिर हाई कोलेस्ट्रोल होने पर।
4-60 से अधिक उम्र के लोगों को।
शरीर के इन 5 अंगों में खून का थक्का बनने पर जा सकती है जान (blood clot)
फेफड़े
शरीर के अलग-अलग अंगों में थक्का बनने पर आपको अलग-अलग लक्षण दिखाई दे सकते हैं। फेफड़े में खून का थक्का (blood clot) बनने से आपकी धड़कन तेज हो सकती है, सीने में दर्द हो सकता है, खांसी में खून आ सकता और सांस की तकलीफ हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचें।
दिल
दिल में खून का थक्का बनने पर आपको फेफड़ों में थक्के के समान लक्षण महसूस हो सकते हैं। लेकिन अगर आपको दिल का दौरा पड़ा है, तो आपको सीने में दर्द के साथ मतली और उल्टी भी महसूस हो सकती है। किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचे।
मस्तिष्क
जब रक्त सामान्य रूप से प्रवाहित नहीं हो पाता है तो मस्तिष्क पर दबाव बनना शुरू हो जाता है। खून का थक्का (blood clot) बनने से मस्तिष्क में गंभीर रुकावट पैदा हो सकती है, और कभी-कभी स्ट्रोक का कारण भी बन सकता है। रक्त से ऑक्सीजन के बिना आपके मस्तिष्क की कोशिकाएं मिनटों में मरना शुरू हो जाती हैं। आपके मस्तिष्क में मौजूद थक्का सिर के एक हिस्से में दर्द, भ्रम, दौरे, बोलने में परेशानी और कमजोरी का कारण बन सकता है।
पेट
अक्सर इसके कोई खास लक्षण सामने नहीं आते हैं। पेट और भोजन नली की नसों में थक्का बनने से कट लग सकता है, जिससे ब्लड निकल सकता है। ये आपको बहुत ज्यादा परेशान कर सकता है। आपको खून की उल्टी हो सकती है या फिर आपको मलत्याग में कालापन और बहुत ज्यादा बदबू आ सकती है।
किडनी
खून के थक्के (blood clot) किडनी में आमतौर पर बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं और ये समस्या ज्यादातर व्यस्कों में देखने को मिलती है। इसके लक्षणों का पता आपको तब तक नहीं लगता है जब तक इसका एक टुकड़ा टूटकर आपके फेफड़ों में नहीं फंस जाता है। दुर्लभ मामलों में ये बच्चों में होते हैं और इसके कारण बच्चों तो मतली, बुखार और उल्टी हो सकती है। आपको पेशाब में भी खून दिखाई दे सकता है।
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