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Diet tips for Uric Acid: इस आटे में है यूरिक एसिड कम करने की ताकत, कभी नहीं पड़ेगी दवाओं की जरूरत
यूरिक एसिड (Uric acid) खून में पाया जाने वाला शरीर का एक व्यर्थ पदार्थ है, जो तब बनता है जब शरीर प्यूरीन को तोड़ता है। अधिकांश यूरिक एसिड खून में घुल जाता है और किडनी के मार्ग से होते हुए मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है। जिन खाद्य पदार्थों में प्यूरीन ज्यादा होता है, वो शरीर में यूरिक एसिड बढ़ा देता है।
यूरिक एसिड बढ़ने पर क्या होता है? जब शरीर से व्यर्थ पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते हैं, तो शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, जिस से अर्थराइटिस जैसे गंभीर रोग का खतरा बढ़ जाता है। शरीर में गठिया बनाने लगता है, जिसमें जोड़ों में ठोस क्रिस्टल बन जाते हैं।
यूरिक एसिड को कैसे कम करें? खराड़ी -पुणे स्थित मणिपाल हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट डायटिशियनऔर न्यूट्रिशनिस्ट सालिनी सोमासुंदर के अनुसार, यूरिक एसिड कम करने के लिए यह जरूरी है कि एक संतुलित आहार लिया जाए, जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व, जैसे कार्ब, प्रोटीन, अच्छा और स्वस्थ फैटी एसिड, विटामिन, और मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में हों। इस स्थिति में ज्वार का आटा भी बहुत उपयोगी है क्योंकि इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में होता है।
यूरिक एसिड में क्या नहीं खाना चाहिए
जिन लोगों के खून में यूरिक एसिड ज्यादा होता है, उनके लिए पोषणयुक्त भोजन तलाशना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में उन्हें आहार की कठोर दिनचर्या का पालन करना चाहिए और मांस, मछली, मसूर की दाल और पालक जैसी सामान्य चीजें भी खाने से बचना चाहिए। ये खाद्य पदार्थ नहीं खाए जा सकते हैं क्योंकि इनमें काफी ज्यादा मात्रा में प्युरिन होता है।
यूरिक एसिड में क्या खाना चाहिए
मरीजों को ऐसा आहार लेना चाहिए जिनमें प्युरिन की मात्रा कम हो। इसमें चावल, बाजरा और ज्वार शामिल हैं, क्योंकि ये हाईपरयूरिसेमा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। दैनिक आहार में इन चीजों को लेने से हृदयाघात, दिल के दौरे, टाइप 2 डायबिटीज़, और मोटापे का जोखिम कम करने में भी मदद मिल सकती है। इससे शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा नियंत्रित रहती है। गठिया से पीड़ित लोगों के लिए, भरा हुआ महसूस करने के लिए बहुत सारे मांस (प्रोटीन) खाने के बजाय उच्च फाइबर आहार खाने पर ध्यान देना चाहिए। कोशिश करें और अपने मांस (प्रोटीन) को फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे साबुत गेहूं, ज्वार और सब्जियों से बदलें।
शरीर की सूजन को कम करता है
ज्वार के आटे में काफी सारे फाईटोकैमिकल एंटीऑक्सीडैंट होते हैं, इसलिए यह सूजन को कम करने वाला आहार है।
एसिडिटी को कम करता है
एसिडिटी एक प्रकार का अपच है जिसमें एसिड बनता है और पेट में जलन का कारण बनता है। इसके अलावा, पेट पाचन में सहायता के लिए एसिड छोड़ता है। जब हम प्यूरीन और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं तो पेट अधिक एसिड बनाता है। लेकिन ज्वार के आटे को प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बदलना रोगियों के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से क्षारीय होता है और एसिड के प्रभाव को कम करता है।
हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा
यूरिक एसिड के मरीजों को हड्डियों की समस्याएं होती हैं क्योंकि एसिड गठिया बनाने लगता है, जिसमें जोड़ों में ठोस क्रिस्टल बन जाते हैं। इसलिए गेहूँ के आटे की जगह ज्वार का आटा लिया जाना चाहिए, क्योंकि ज्वार में फॉस्फोरस पाया जाता है, जो कैल्शियम के साथ काम करके हड्डियां बनाता है। इसके अलावा, जो लोग ग्लूटेन को बर्दाश्त नहीं कर पाते या जो ग्लूटेन मुक्त होना चाहते हैं उनके लिए ज्वार का आटा भी एक बढ़िया विकल्प है।
मेटाबोलिज़्म को बनाता है बेहतर
ज्वार के आटे में विटामिन बी1 होता है, जो ग्लूकोज़ के मेटाबोलिज़्म के लिए जरूरी है। यह व्यक्ति द्वारा लिए गए आहार से ऊर्जा बनाने में मदद करता है और उसे एटीपी (एडिनोसीन ट्राईफॉस्फेट) में बदलता है। यह मंद गति से निकलने वाला प्रतिरोधी स्टार्च है, जो खून में शुगर बढ़ाता नहीं है और पेट को भरा हुआ रखता है। यह आंत में बहुत धीरे-धीरे अवशोषित होता है।
आंत का स्वास्थ्य बढ़ाता है
भरपूर फाईबर होने के कारण ज्वार पाचन क्रिया के सुगम संचालन में मदद करता है। पाचन की क्रिया मजबूत करने के लिए यह दुनिया में सबसे अच्छे आहारों में से एक के रूप में मशहूर है। यह ग्लूटन-फ्री खाद्य पदार्थ है, जो आँत के लिए भी अच्छा होता है, क्योंकि यह औसत व्यस्क की फाईबर की जरूरत को लगभग 48 प्रतिशत पूरा कर देता है। इसके अलावा, नियमित रूप से ज्वार को आहार में शामिल करने से पेट फूलने, कब्ज, डायरिया, अपच, ऐंठन एवं पाचन की अन्य समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है।
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