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1- रात में जल्दी सोएं
बेड पर जाने के बाद लोग घंटों फोन में लगे रहते हैं। धीरे-धीरे यह आदत लेटनाइट जगने की रूटीन में बदल जाती है। जिसके चलते सुबह उठने में काफी लेट हो जाता है। इस तरह की रूटीन को लगातार फॉलो करने से “बॉडी क्लॉक” बदल जाती है। हम सोने-जगने की जो रूटीन फॉलो करते हैं, धीरे-धीरे शरीर उसी हिसाब से ढल जाता है, इसे ही “बॉडी क्लॉक” कहते हैं।
बॉडी क्लॉक खराब होने की वजह से हमारा सुबह जल्दी उठना मुश्किल हो जाता है। फिर हम सुबह की एक्सरसाइज, जिम, योग या जॉगिंग से दूर हो जाते हैं। सुबह उठने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है रात में जल्दी सोना।
इस बात का ध्यान रखें कि सुबह जल्दी उठने की जद्दोजहद में नींद अधूरी न रह जाए। जब आप रात में जल्दी सोएंगे, तो इसकी नौबत ही नहीं आएगी। पर देर से सोकर जल्दी उठने की जिद नींद न आने की बीमारी में भी बदल सकती है।
2- उठकर हल्का वार्मअप करें
सुबह उठने के बाद कई बार हम आलस की वजह से दोबारा सो जाते हैं। यह हमारे लिए जल्दी उठने में दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए यह ध्यान रखना है कि आप दोबारा बेड पर न जाएं। सोकर उठने के बाद टेक भी न लगाएं।
सुबह हल्का वार्मअप करना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए पैर को सीधा रखें और दाएं-बाएं झुक कर हाथों से पैर के पंजों को छूने का प्रयास करें। फिर कमर को स्थिर रखते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को ट्विस्ट करें। शरीर को सीधा रखते हुए दो से तीन बार जम्प करें। ऐसा करने से आलस 70% तक कम हो जाएगा।
3- मानसिक तौर पर मजबूत रहें
सुबह उठने के लिए मानसिक तौर पर मजबूत होना होगा। अपनी विल-पावर इतनी मजबूत कर लें कि सुबह की आलस आपको रोक न पाए। कई बार हम सुबह जल्दी उठने की तो सोचते हैं, लेकिन उठ नहीं पाते। अलार्म बजता है और हम उसे बंद कर देते हैं। कोई जगाता है तो हम उसपर गुस्सा होने लगते हैं। विल-पावर मजबूत करके हम ऐसा करने से बच सकते हैं।
4- एक साथी ढूंढ़े
कई बार हम सुबह उठकर जिम, एक्सरसाइज, योग या जॉगिंग करने में अकेला महसूस करते हैं। जिसके चलते हमारी कन्टीन्यूटी ब्रेक हो जाती है। अगर आप भी ऐसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो एक साथी की तलाश करें। ऐसा होने पर न केवल आप एक-दूसरे का साथ देंगे, बल्कि एक-दूसरे से प्रेरित भी होंगे।
5- धैर्य रखें
कई बार कुछ लोगों को लगता है कि सुबह जल्दी उठना हमेशा मुश्किल ही होगा। सिर्फ इसी डर से कई लोग रूटीन को खराब कर लेते हैं। जबकि सुबह जल्दी उठना शुरू के कुछ दिनों तक ही मुश्किल होता है। 2 हफ्तों में हमारा बॉडी क्लॉक पूरी तरह से रिसेट हो जाता है। इसलिए शुरूआती दिनों में धैर्य रखें। खुद को समय दें। धीरे-धीरे आपकी जद्दोजहद आपकी आदत में बदल जाएगी।
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