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प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण

मां बनना हर महिला के लिए अहमियत रखता है। वैवाहिक जीवन में कदम रखने के बाद हर महिला गर्भधारण की प्रक्रिया से गुजरना चाहती है। इनमें से कुछ महिलाएं ऐसी हैं, जो गर्भधारण के लिए लगातार प्रयास तो करती हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलती। ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। गर्भधारण न कर पाने के कई कारण हो सकते हैं, जिन पर गौर किया जाना जरूरी है। मॉमजंक्शन के इस लेख में हम आपको गर्भधारण न हो पाने के कुछ मुख्य कारणों के बारे में बताएंगे। साथ ही आपको उससे निजात पाने के तरीकों के बारे में भी जानकारी देंगे।

आइए, सबसे पहले हम उस सवाल का जवाब जानते हैं, जो गर्भधारण न कर पाने की स्थिति में हर महिला के मन में पनपता है।
गर्भवती होने के लिए एक महिला को कितना समय लगता है?

गर्भधारण में लगने वाले समय की बात करें, तो 30 साल से कम उम्र की स्वस्थ्य महिला (जिसके सभी प्रजनन अंग सही ढंग से काम कर रहे हैं) के गर्भवती होने की संभावना प्रत्येक मासिक चक्र के दौरान करीब 25 से 30 प्रतिशत तक होती है (1)। वहीं, इसके इतर यह संभावना महिला वजन, खानपान, संभोग के समय के आधार पर कम या ज्यादा हो सकती है। इन संभावित आंकड़ों को हम निम्न बिन्दुओं के जरिए समझने का प्रयास करते हैं (2) :

35 साल से कम उम्र की 85 प्रतिशत महिलाएं एक साल यानी 12 मासिक चक्रों के अंदर गर्भधारण कर सकती हैं।

वहीं, 35 साल से कम उम्र की 90 प्रतिशत महिलाएं ऐसी भी हैं, जो एक साल का समय पूरा करने के बाद गर्भधारण कर पाती हैं।

अगर आपकी उम्र 35 से 39 साल के बीच है, तो 12 मासिक चक्रों के दौरान गर्भधारण की संभावना 70 से 75 प्रतिशत होती है।

40 साल से 42 साल की उम्र पार करने वाली महिलाओं में 12 मासिक चक्रों के दौरान गर्भधारण का प्रतिशत महज 50 फीसदी ही रह जाता है।

आगे के लेख में हम गर्भवती न हो पाने के कारणों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
गर्भवती नहीं होने के कारण? | Pregnant Na Hone Ke Karan

गर्भधारण न कर पाने के पीछे की वजह के बारे में बात करें, तो कई तरह की चिकित्सीय जटिलताओं के साथ दैनिक दिनचर्या भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। इसलिए, हम आपको लेख के माध्यम से सामान्य के साथ-साथ चिकित्सा संबंधी कारणों के बारे में भी विस्तार से बताएंगे।
आम कारण

बहुत ज्यादा या बहुत कम संभोग : कई लोग ऐसा मानते हैं अधिक शारीरिक संबंध बनाने से गर्भधारण किया जा सकता है। वहीं, कुछ इसके लिए कम शारीरिक संबंध बनाने पर जोर देते हैं। उनका मानना होता है कि कम संभोग करने से वीर्य की गुणवत्ता बरकरार रहती है, जबकि वास्तव में ये दोनों ही स्थितियां महज एक भ्रम मात्र हैं। आइए, इन दोनों स्थितियों को थोड़ा बारीकी से समझते हैं।

अधिक शारीरिक संबंध- जानकारी के अभाव के चलते आज कई लोगों में गर्भधारण को लेकर बहुत प्रकार के भ्रम पनप गए हैं, जिनमें से एक है अधिक शारीरिक संबंध बनाना। आपको जानकार हैरानी होगी कि ऐसा करने से न केवल आप सामान्य के मुकाबले गर्भधारण के प्रयास में पिछड़ जाएंगे, बल्कि आपको कमजोरी, घुटनों में दर्द, पेशाब में जलन और चक्कर आना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक संभोग करने से पुरुषों में वीर्य की मात्रा कम हो जाती है, जो गर्भधारण की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है (1) (3)।

बहुत कम संभोग- कुछ कम शारीरिक संबंध बनाने पर जोर देते हैं। ऐसे लोग मुख्य रूप से ओव्युलेशन (महिला में अंडों की सक्रियता का समय) के दिनों में ही शारीरिक संबंध बनाने को वरीयता देते हैं, ताकि उन्हें गर्भधारण में शत-प्रतिशत सफलता हासिल हो, जबकि यह सोच भी गर्भधारण में बाधा पैदा कर सकती है। कारण यह है कि प्रत्येक महिला में ओव्युलेशन की प्रक्रिया अलग-अलग समय पर शुरू होती है, जिसका अनुमान मात्र लगाया जा सकता है (4)। ऐसे में यौन सक्रियता की कमी आपको गर्भधारण के सुख से दूर कर सकती है।

तनाव : विशेषज्ञों के मुताबिक तनाव गर्भधारण की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है (5)। कारण यह है कि मानसिक दबाव आपकी शारीरिक गतिविधियों पर बुरा प्रभाव डालता है। इस कारण अगर महिला या पुरुष में से कोई एक भी तनाव की स्थिति में संभोग करता है, तो वह इस प्रक्रिया में प्राकृतिक रूप से शामिल नहीं हो पाता। नतीजतन, गर्भधारण न हो पाने की समस्या से जूझना पड़ता है।

पुरुष में शुक्राणुओं की कमी : कई बार महिला के गर्भधारण में आ रही परेशानी का मुख्य कारण पुरुष साथी भी हो सकता है। कारण यह है कि जब पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या में कमी होती है, तो गर्भधारण में समस्या पैदा होती है (5)। इस संबंध के निदान और उपचार के लिए आपको चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

संभोग के बाद बाथरूम जाना : कई महिलाओं को संभोग के तुंरत बाद बाथरूम जाने की आदत होती है। वो अपने प्रजनन अंगों को अच्छी से साफ करती हैं, लेकिन ऐसा करना गलत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं की यह आदत वीर्य को योनी में ठहरने नहीं देती। इस कारण गर्भधारण की प्रक्रिया प्रभावित होती है (6)। इसलिए, सलाह दी जाती है कि शारीरिक संबंध बनाने के बाद कुछ देर तक लेटे रहना चाहिए। ऐसा करने से गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन यहां हम स्पष्ट कर दें कि इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

टाइट अंडर गारमेंट्स : टाइट अंडर गारमेंट का उपयोग गर्भधारण की प्रक्रिया में बाधा पैदा कर सकता है। जहां पुरुषों में यह आदत शुक्राणुओं की गुणवत्ता और मात्रा को प्रभावित करने का काम करती है (7), वहीं महिलाओं में इस आदत के कारण योनी संक्रमण होने का खतरा रहता है (8)। इन दोनों ही परिस्थितियों में गर्भधारण की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

अनिद्रा की समस्या : नींद न आने की समस्या महिला और पुरुष दोनों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित करती है। महिलाओं में यह समस्या प्रजनन चक्र पर बुरा असर डालती है। इस कारण उनमें तनाव के साथ-साथ अनियमित मासिक चक्र की समस्या भी पैदा होती है, जो गर्भधारण न कर पाने का बड़ा जोखिम कारक है। वहीं, पुरुषों में यह समस्या उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने का काम करती है। इस कारण वो संक्रमण (बुखार, फ्लू) का आसानी से शिकार हो जाते हैं। ऐसे में उनके शरीर में पैदा होने वाली गर्मी शुक्राणुओं की मात्रा को कम करने का काम कर सकती है (9)। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि महिला और पुरुष दोनों में अनिद्रा की समस्या गर्भधारण की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

अनियमित वजन : अनियमित वजन भी गर्भधारण की प्रक्रिया को प्रभावित करने का काम करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर आपका वजन कम है, तो यह आपकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करेगा। कारण यह है कि कम वजन कुपोषण की ओर इशारा करता है। इस कारण महिला ओव्युलेट नहीं कर पाती। फलस्वरूप गर्भधारण करने में उन्हें मुश्किल होती है। वहीं, इसके उलट अगर महिला का वजन बहुत ज्यादा है, तो भी गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है। चाहे आपका ओव्युलेशन चक्र नियमित क्यों न हो (10)।

चिकनाई का अधिक उपयोग : शारीरिक संबंध बनाने के दौरान अधिक चिकनाई का उपयोग भी गर्भधारण की प्रक्रिया को प्रभावित करने का काम कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में उपलब्ध चिकनाई वाले पदार्थ जैसे – जेल, तेल व क्रीम शुक्राणुओं की गतिशीलता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इस कारण निषेचन की प्रक्रिया में रुकावट पैदा होने की संभावना बनी रहती है, लेकिन इस विषय में अभी और शोध की आवश्यकता है (11)।

नशे की लत : धूम्रपान, शराब का सेवन व ड्रग्स लेने की आदत गर्भधारण न कर पाने की बड़ी वजह हो सकती है। माना जाता है कि जहां महिलाओं में यह आदत उनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है, वहीं पुरुषों में इस आदत की वजह से उनके शुक्राणुओं की गुणवत्ता और मात्रा पर असर पड़ता है। इस कारण यह कहा जा सकता है कि नशे की लत महिला और पुरुष दोनों में बांझपन या नपुंसकता के जोखिम कारकों को बढ़ाने का काम करती है (1) (12)।

प्रदूषण : प्रदूषित वातावरण भी गर्भधारण की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने का कारण बन सकता है। इस संबंध में किए गए शोध में पाया गया है कि वातावरण को प्रदूषित करने वाले पदार्थ जैसे – विषैले रसायन, कीटनाशक, सिगरेट का धुंआ व प्लास्टिक का प्रयोग आदि प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालते हैं (13)। इस प्रकार, प्रदूषित वातावरण गर्भधारण न कर पाने का एक कारण हो सकता है।

अधिक उम्र : उम्र का ज्यादा होना भी गर्भधारण न कर पाने की एक बड़ी वजह हो सकती है। दरअसल, ऐसा माना जाता है कि 20 से 35 साल की उम्र में महिला गर्भधारण कर पाने में सबसे ज्यादा सक्षम होती है। वहीं, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है प्राकृतिक रूप से उसकी प्रजनन क्षमता घटने लगती है। ऐसे में अगर आपकी उम्र 40 से अधिक है, तो गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है (1)।

ज्यादा व्यायाम : कई महिलाएं अपने शरीर को फिट रखने के लिए व्यायाम करना पसंद करती हैं। बेशक, यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, लेकिन कहते हैं न कि किसी भी चीज की अति हमेशा बुरी होती है। यह बात व्यायाम पर भी लागू होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादा व्यायाम करने वाली महिलाओं में प्रजनन प्रक्रिया अन्य के मुकाबले कम हो सकती है (1)।

स्मार्टफोन रखना : आज के समय में स्मार्टफोन और मोबाइल लोगों के जीवन का एक अहम हिस्सा है, लेकिन ऐसा करना आपके शुक्राणुओं की मात्रा को काफी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मोबाइल फोन से रेडिएशन निकलता रहता है, जो शुक्राणुओं को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में अगर आपके पति भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो हो सकता है कि आपके गर्भधारण न कर पाने की वजह उनका स्मार्टफोन ही हो (14)।

बिसफिनोल ए (बीपीए) : शरीर में बिसफिनोल ए यानी बीपीए की उपस्थिति भी गर्भधारण न कर पाने का एक कारण हो सकती है। बता दें कि यह एक ऐसा तत्व है, जो खासकर प्लास्टिक पदार्थों में पाया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं में इस तत्व की अधिक मात्रा उनकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालती है। कुछ मामलों में यह तत्व बांझपन का कारण भी बन सकता है (15)।

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