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शिशु के साथ सुरक्षित तरीके से कैसे सोया जाए?
अगर, आपको लगता है कि शिशु को अपने साथ बिस्तर पर सुलाना आपके और शिशु दोनों के लिए ज्यादा बेहतर रहता है, तो सुरक्षा की दृष्टि से आपको कुछ चीजों का पालन करना होगा।
सुनिश्चित करें कि आपका बिस्तर ठोस हो और पलंग के फ्रेम में कसकर फिट हो जाता हो। इससे आप आश्वस्त हो सकेंगे कि गद्दों के साइड या बीच में कोई खाली जगह नहीं है, जहां शिशु लुढ़क सके। वाटरबेड और ढीले-ढाले गद्दे शिशु के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
शिशु के लिए हल्की चादर और कंबल का इस्तेमाल सही रहता है। अगर, ठंड ज्यादा हो और आपको रजाई या दोहर (डुवे) के इस्तेमाल की जरुरत हो, तो विशेष ध्यान रखें कि इनसे शिशु का मुंह और सिर न ढके।
अपने ओढ़ने की चादर और तकियों से शिशु को दूर रखें, क्योंकि इनमें फंसकर शिशु का दम घुट सकता है या उसे ज्यादा गर्मी लग सकती है। यह भी ध्यान रखें कि आप शिशुओं के लिए आने वाली छोटी चादरों और कंबलों का ही इस्तेमाल करें, न कि वयस्कों की बड़ी रजाइयों और कंबलों का।
शिशु को तकिये पर नहीं सोना चाहिए, या उसे तकिये से ढक जाने का खतरा नहीं होना चाहिए। घोड़े के नाल के आकार वाले तकियों और राई से भरे तकियों के इस्तेमाल से पहले अपने शिशु के डॉक्टर से पूछ लें। इनसे शिशु का गला अवरुद्ध होने का संभावित खतरा रहता है।
शिशु को गर्मियों के दौरान सुलाते समय हल्के कपड़े ही पहनाएं। अगर, आप एयर कंडीशनर चलाते हैं, तो कमरे का तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ठंडा न रखें।
अगर, सर्दियों में आप शिशु के कमरे में ब्लोअर या हीटर चलाते हैं, तो भी उसे हल्के कपड़े पहनाकर ही सुलाएं।
शिशु के साथ कभी भी सोफे या आर्मचेयर पर न सोएं। शिशु कुशन के बीच या आपके और सोफे के बीच की जगह में फंस सकता है, जिससे उसका दम घुट सकता है। शिशु के साथ सोफे या आर्मचेयर पर ही सो जाने की बजाय, सुरक्षित यही है कि आप उठकर शिशु के साथ पलंग पर जाकर सोएं।
निम्न परिस्थितियों में शिशु को अपने साथ अपने पलंग पर न सुलाएं, जैसे कि:
आप या आपके पति ने शराब पी है, या फिर ऐसी दवा या ड्रग्स ली है, जिससे आपको बहुत ज्यादा नींद आ रही है।
आप या आपके पति धूम्रपान करते हैं या ई-सिगरेट का इस्तेमाल करते हैं। आप बिस्तर पर या घर पर धूम्रपान न करते हों, तो भी।
आपका शिशु समय से पहले (प्रीमैच्योर, 37 सप्ताह से पहले) जन्मा था या फिर जन्म के समय उसका वजन कम था (2.5 किग्रा. से भी कम)
अगर, आप शिशु को स्तनपान करवाती हैं और उपर्युक्त किसी भी तरह का खतरा आपके मामले में लागू नहीं होता, तो आपको यह जानकर तसल्ली होगी कि ऐसे मामलों में शिशु को अपने साथ बिस्तर पर सुलाना सुरक्षित माना गया है। ऐसी स्थितियों में एसआईडीएस के बढ़ने का जोखिम नहीं रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसकी वजह यह है कि जब आप शिशु को अपने साथ सुलाती हैं, तो स्तनपान करवाने के स्वाभाविक पैटर्न, और आपके व स्तनपान कर रहे शिशु के बीच की हलचल और प्रतिक्रियाओं का बहुत असर होता है। इस तरह आपको शिशु के सांस लेने और बीच में श्वास रोकने के ढंग के बारे में ज्यादा जानकारी हो सकती है, फिर चाहे आप सो ही क्यों न रही हों।
साथ ही, स्तनपान के दौरान आपकी हलचल से हो सकता है शिशु हल्का सा जगा रहे। आप दोनों के बीच का यह तालमेल शिशु को आपके साथ सोने के समय सुरक्षित रखता है।
शोध में दर्शाया गया है कि अगर आप शिशु को अपने बिस्तर पर सुलाते हुए स्तनपान करवाती हैं, तो आप स्वाभाविक ढंग से उसके चारों ओर अपने शरीर से अंग्रेजी के अक्षर "सी" जैसा आकार बना लेती हैं। इस आकार में शिशु आपके स्तनों के स्तर तक होता है और तकियों से दूर हो जाता है। यह उसके लिए माता-पिता के साथ सोने की सबसे सुरक्षित मुद्रा है।
अगर, आपका एक बड़ा बच्चा भी है और वह भी आपके साथ सोना चाहता है, तो सुनिश्चित करें कि आप या आपके पति दोनों बच्चों के बीच सोएं। आपके बड़े बच्चे को शायद यह समझ पाने में मुश्किल होगी कि सोते समय आपको अपना ध्यान नन्हें शिशु पर रखना है।
अगर, आपके साथ भी ऐसा ही हो, तो शायद बड़े बच्चे को अपने अलग पलंग पर सोने के लिए राजी करना ज्यादा बेहतर रहे। अगर, आपका बड़ा बच्चा आपके साथ ही सोने की जिद करे, और आपके लिए रात को सोना मुश्किल हो जाए, तो ऐसी स्थिति में बेहतर है कि अपने नन्हे शिशु को पास में कॉट पर सुलाएं।
आप अपने बिस्तर पर शिशु को कभी भी अकेला न छोड़ें, एक पल के लिए भी नहीं। वह लुढ़क सकता है या चादरों-कंबलों में फंसकर उसका दम घुट सकता है। अगर, आपको बाथरूम जाना हो, तो भी शिशु को उसकी मोज़ेज बास्केट या कॉट में सुलाकर जाएं। आपको यदि कुछ ही समय के लिए बाहर जाना हो तो भी किसी जिम्मेदार वयस्क को शिशु की देखभाल सौंपकर जाएं।
ध्यान रखें कि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आपका शिशु छह महीने का या इससे छोटा है, तो उसके लिए आपके पलंग की बजाय अपने कॉट या पालने में पीठ के बल सोना ही सबसे सुरक्षित है। मगर, उसका कॉट या पालना अलग कमरे की बजाय आपके कमरे में ही होना चाहिए।
यह भी ध्यान में रखें कि तीन महीने या इससे छोटे शिशु, जो समय से पहले जन्मे थे, या जिनका कम जन्म वजन था, उन्हें माता-पिता के साथ सोने पर अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (एसआईडीएस) का ज्यादा खतरा होता है।
आपके बिस्तर के साथ ही शिशु का कॉट लगा होने से यानि बेडसाइड कॉट या को-स्लीपर होने से आपके लिए शिशु तक पहुंचना आसान रहेगा, विशेषकर यदि आप स्तनपान करवाती हैं तो। यह एक कॉट ही होती है, जिसके एक साइड को खोलकर अपने पलंग के साथ फिट किया जा सकता है। इस तरह शिशु आपके पास ही होगा, मगर अलग बिस्तर पर। या फिर आप शिशु की मोज़ेज बास्केट, पालने या कॉट को अपने बिस्तर के साथ भी लगा सकती हैं।
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