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40 वर्ष की गर्भावस्था में किन बातों का ध्यान रखें-

इस उम्र की महिलाएं अपने पेरिमेनोपॉज की स्थिति में होती हैं और उनके पीरियड्स साइकल को प्रिडिक्ट करना मुश्किल होता है इसलिए ऐसी महिलाओं को डॉक्टर फर्टिलिटी से जुड़ी दवाइयां देते हैं ताकि वे सही से ऑव्यूलेट कर सकें. कई बार ये दवाइयां लेने के बाद ही महिला गर्भवती हो जाती है लेकिन अगर इसके बाद भी गर्भधारण न हो तो आईवीएफ की सलाह दी जाती है. इस प्रक्रिया में महिला के शरीर के अंडों और पार्टनर के स्पर्म को लेकर लैब में भ्रूण को तैयार किया जाता है और फिर उसे महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है. लेकिन सिर्फ तभी जब डॉक्टर इस बात से संतुष्ट हों कि महिला का शरीर बच्चे को कैरी करने के लिए तैयार है.

एग फ्रीज करवाना
हालांकि इन दिनों एक और प्रक्रिया काफी प्रचलित हो गई है जिसे क्रायोप्रिसर्वेशन या एग फ्रीजिंग भी कहते हैं. इसमें महिलाएं 30 साल की उम्र के आसपास ही अपने एग्स को फ्रीज करवा लेती हैं और फिर बाद में जब 40 की उम्र के बाद मां बनना चाहती हैं तो इन फ्रोजन एग्स का इस्तेमाल कर गर्भवती हो सकती हैं. एग्स फ्रीज करवा लेने से सफल प्रेगनेंसी की गारंटी तो नहीं होती लेकिन जैसा कि हमने पहले ही बताया है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ने लगती है अंडों की क्वॉलिटी में कमी आने लगती है. लिहाजा कम उम्र में अंडों को फ्रीज करवा लेने से होने वाले बच्चे में किसी तरह की जेनेटिक समस्या होने की आशंका कम हो जाती है.

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