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कब्ज पाचन तंत्र से जुड़ी स्थिति है, जिसमें मल त्याग करते समय कठिनाई होती है। मलत्याग करते समय जब आसानी से मल गुदा मार्ग से न निकले, उस स्थिति को कब्ज कहते हैं। इस अवस्था में मल सख्त व सूखा हो सकता है। कई बार तो मल त्याग करते समय पेट व गुदा मार्ग में दर्द भी हो सकता है। वैज्ञानिक तौर पर एक हफ्ते में तीन बार से कम शौच आने को कब्ज माना जाता है। यह समस्या किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकती है। कभी यह कुछ समय के लिए होती है, तो कभी लंबे समय तक चल सकती है। यहां एक बात को समझना जरूरी है कि कब्ज कोई बीमारी नहीं है, बल्कि अन्य शारीरिक विकारों का लक्षण हो सकता है।

कब्ज के कारण – Causes of Constipation in Hindi

मुख्य रूप से कब्ज की समस्या हमारी जीवनशैली और खानपान से जुड़ी है। जैसा कि लेख के शुरुआत में बताया गया है कि कब्ज कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में आ रही अन्य कमियों के कारण पैदा हो सकती है, आइए जानते हैं कैसे?

कम फाइबर युक्त भोजन का सेवन : फलों, सब्जियों और अनाज में फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह दो प्रकार का होता है साल्युबल और इनसाल्युबल। दोनों पेट के लिए उपयोगी होते हैं। साल्युबल फाइबर पानी के साथ मिलकर जेल बनाकर पाचन को बढ़ाता है। वहीं, इनसाल्युबल फाइबर मल को मोटा और भारी करता है जिससे मल जल्दी बाहर आ जाता है। फाइबर की ये गतिविधि मलत्याग को सामान्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, फाइबर की कमी मलत्याग को बाधित करके, कब्ज का कारण बन सकती है ।
द्रव्य पदार्थों का कम सेवन : फाइबर को बेहतर तरीके से काम करने के लिए पानी और अन्य तरल पदार्थों की जरूरत होती है। जैसे प्राकृतिक रूप से मीठे फल, सब्जियों का रस और सूप इत्यादि। इससे मल नरम होकर आसानी से पास हो जाता है।
दवाएं : दवाओं का सेवन बीमारी से निजात पाने के लिए किया जाता है, लेकिन कुछ दवाओं का सेवन कब्ज की बीमारी का कारण भी बन सकता है। कुछ एंटीडिप्रेसेंट्स और दर्द निवारक दवाएं कब्ज का कारण बन सकती हैं । इसलिए, दवाइयों को भी लैट्रिन नहीं आने का कारण माना जा सकता है।
गर्भावस्था के दौरान : गर्भवती महिलाओं को अक्सर कब्ज का सामना करना पड़ता है। इस दौरान प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का स्तर ज्यादा और मोटीलिन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इसी कारण पेट से गुदा मार्ग तक मल आने में लगने वाला टाइम (बाउल ट्रांजिट टाइम) बढ़ सकता है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाएं अतिरिक्त आयरन का सेवन करती हैं, जिसके कारण से भी कब्ज हो सकता है। इस दौरान बढ़ा हुआ गर्भाशय भी मल को बाहर निकलने से रोक सकता है ।
हाइपोथायरायडिज्म : हाइपोथायरायडिज्म का एक लक्षण कब्ज भी है। हाइपोथायरायडिज्म शरीर में हार्मोन असंतुलन के लिए जिम्मेदार है। यह असंतुलन कब्ज की बीमारी का कारण बन सकता है।
शारीरिक श्रम की कमी : शारीरिक श्रम न करना या कोई व्यायाम न करना भी कब्ज का कारण बन सकता है। पेट की मांसपेशियों के मजबूत होने से मलत्याग करना सुविधाजनक हो सकता है। शारीरिक श्रम के अभाव में पेट की मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं और कब्ज का कारण बन सकती हैं।
हेल्थ सप्लीमेंट्स : ये भी कब्ज का कारण बन सकते हैं। मुख्य रूप से आयरन और कैल्शियम के सप्लीमेंट कब्ज का कारण बन सकते हैं ।
तनाव : तनाव कई मायनों में कब्ज पैदा कर सकता है। तनाव के दौरान निकलने वाले हार्मोन आंत में संक्रमण का कारण बन सकते हैं और मल त्याग को बाधित कर सकते हैं। इसके अलावा, तनाव के दौरान व्यक्ति उचित आहार और पर्याप्त पानी का सेवन नहीं करता और व्यायाम भी नहीं करता, जिस कारण कब्ज हो सकता है ।
मल की इच्छा को रोकना : मल को रोके रखने से कब्ज की बीमारी हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि मल को रोके रखने से पेट और आंत धीरे-धीरे मल त्याग का सिग्नल देना बंद कर सकते हैं।
आईबीएस : इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) पेट से जुड़ी ऐसी समस्या है, जिसमें पेट में दर्द या बेचैनी रह सकती है साथ ही 3 महीने या उससे अधिक समय के लिए मल त्याग की आदतों में बदलाव (जैसे दस्त या कब्ज) हो सकता है। इसलिए, इसके कारण भी कब्ज की समस्या हो सकती है।
अपर्याप्त नींद : इस भागदौड़ भरे जीवन में काम का इतना दबाव है कि व्यक्ति भरपूर नींद नहीं सो पाता हैं। पर्याप्त नींद न लेने के कारण पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता और कब्ज की समस्या हो सकती है।

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