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:- मेरुरज्जु अधिकांश जीव जंतुओं के शरीर का आवश्यक अंग हैं। इस लेख में मानव शरीर से संबंधित उल्लेख है। मस्तिष्क का पिछला भाग लम्बा होकर खोपड़ी के पश्च छोर पर उपस्थित महारन्ध से निकलकर रीढ़ की हड्डी तक फैला रहता है। इसे मेरुरज्जु या सुषुम्ना कहते हैं। यह कशेरुकाओं के मध्य उपस्थित तन्त्रिकीय नाल में सुरक्षित रहता है। यह मस्तिष्के के समान द्रढ़ तानिका तथा मृदुतानिका से घिरा रहता है। मेरुरज्जु के मध्य भाग में एक संकरी केन्द्रीय नाल होती है। केन्द्रीय नाल के चारों ओर मेरुरज्जु की मोटी दीवार में दो स्तर होते हैं।

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