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आपकी वोकल कोर्ड्स (vocal cords) के साइज़ और अन्य दूसरे फिजियोलोजिकल (physiological) फ़ैक्टर्स के हिसाब से आपकी आवाज के साउंड का पता लगाया जाता है। हालाँकि, आपकी आवाज को हाइ से लो, या लो से हाइ में पूरी तरह से बदला जा सकना मुमकिन नहीं है, लेकिन ऐसी कुछ टेकनिक्स हैं, जिनकी मदद से आप आपके पिच (pitch) और वॉल्यूम में कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर कर सकते हैं और अपनी ही एक बेस्ट, नेचुरल आवाज पा सकते हैं।
अपने बोलने के तरीके को बदलना
पता करें, कि आप किस तरह से साउंड करते हैं: अगर आप आपकी आवाज को या तो जरा और हाइ (ऊंचा) या डीप (गहरा) साउंड कराना चाहते हैं, तो पहले अपनी आवाज को रिकॉर्ड करके शुरुआत करें, ताकि आपको भी समझ आ सके, कि आपके लिए किस अप्रोच की जरूरत है। एक रिकॉर्डिंग डिवाइस के जरिये शांति से बात करते हुए, ज़ोर-ज़ोर से बोलते हुए और गाते हुए अपने साउंड को रिकॉर्ड कर
नाक से बोलना बंद करें
: बहुत सारे लोगों की आवाज ऐसी होती है, जैसे कि वो उनकी "नाक से बोल" रहे हैं। नाक से निकलने वाली आवाज अक्सर असल में जिस तरह साउंड होनी चाहिए, उससे जरा हाइ साउंड होती है, ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि इसे एक डीप टोन पाने के लिए सही रूप से गूंजने तक का मौका नहीं मिल पाता है। इस तरह की आवाज दूसरों को परेशान करने के साथ-साथ समझने में मुश्किल भी हो सकती है। इस नाक से निकलने वाले साउंड को बदलने के लिए, ऐसा करें:
पक्का कर लें, कि आपकी नाक में साँस लेने के रास्ते में किसी तरह की कोई रुकावट नहीं है, ये पूरी तरह से खुले हुए हैं। अगर आपको किसी तरह की कोई एलर्जी है या किसी और वजह से आपकी नाक अक्सर ही भरी या रुकी हुई रहती है, तो ऐसे में आपकी आवाज रुकी हुई सी और नाक से आती हुई लगेगी। अपनी एलर्जी को खत्म करें, खूब सारा पानी पिया करें, और आपके साइनस को क्लियर रखने की कोशिश करें।
बोलते वक़्त अपने मुँह को जरा ज्यादा खोलने की प्रेक्टिस करें। अपने जबड़े को नीचे लाएँ और शब्दों को एक नरम ताल में बाहर निकालने के बजाय, अपने मुँह के अंदर नीचे से ही बाहर निकालें।
अपने गले के पीछे से न बोलें:
हाइ वॉइस को सुधारने के लिए, बहुत सारे लोग एक नकली डीप टोन निकालने के लिए, उनके गले के पीछे से बोला करते हैं। आप जब आपके गले के पीछे से बोलने की कोशिश करते हैं, तब वॉल्यूम की सही मात्रा को पाना मुश्किल हो जाता है, इसलिए ऐसा करने से धीमी, समझने में कठिन आवाज निकालकर आती है। इसके अलावा, अपनी आवाज को असलियत से गहरा साउंड कराने की कोशिश में गले के पीछे से बोलने की वजह से आपके वोकल कोर्ड्स के ऊपर एक खिंचाव भी आता है और इसकी वजह से धीरे-धीरे आपका गला भरा हुआ और आवाज भी चली जा सकती है।
अपने "मास्क (mask)" से बोलें:
अपनी वॉइस के साउंड को ज्यादा डीप और ज्यादा भरी हुई साउंड कराने के लिए जरूरी है कि आप अपने "मास्क", जो कि आपके होंठ और आपकी नाक से जुड़ा हुआ भाग होता है, से बोलें। बोलने के लिए अपने पूरे मास्क का इस्तेमाल करने से आपकी आवाज को कुछ लोअर और रिचर साउंड करने का अच्छा मौका मिलेगा।
आप मास्क से बोल रहे हैं या नहीं, पता लगाने के लिए, बोलते वक़्त अपने होंठों और अपनी नाक को छुएँ। अगर आपके बोलने में इस पूरे एरिया का इस्तेमाल हो रहा है, तो इन्हें वाइब्रेट होना चाहिए।[२] अगर ये शुरू में वाइब्रेट नहीं होते हैं, तो जब तक कि आपको इसके लिए सही साउंड न मिल जाए, तब तक कुछ अलग-अलग साउंड्स इस्तेमाल करके देखें, फिर हमेशा इसी तरह से बोलने की प्रेक्टिस करें।
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आपके डायाफ्राम (diaphragm) को प्रोजेक्ट करें:
गहरी साँसे लेना और अपने डायाफ्राम से प्रोजेक्ट करना, एक भरी हुई, रिच और स्ट्रॉंग वॉइस पाने का तरीका है। आप जब गहरी साँसें ले रहे हों, तब हर एक साँस के दौरान आपकी चेस्ट (छाती) के फूलने और कम होने के बजाय, आपका पेट अंदर और बाहर होना चाहिए। अब जब आप बोलें, तब एक्सहेल करते वक़्त, अपने पेट को अंदर खींचते हुए अपने डायाफ्राम को प्रोजेक्ट करने की प्रेक्टिस करें। अब आप नोटिस करेंगे, कि इस तरह से साँस लेते हुए आपकी आवाज लाउड और क्लियर बाहर आती है। ऐसी साँसों की एक्सर्साइज़ करना, जो कि पूरी तरह से गहरी साँसों के ऊपर केन्द्रित हों, ये आपको आपके डायाफ्राम से प्रोजेक्ट करने की याद दिलाने में मदद करेंगी।
एक्सहेल (Exhale), सारी हवा को अपने लंग्स से बाहर करना। जैसे ही आपकी सारी हवा बाहर निकल जाती है, आपके लंग्स आपकी हवा की जरूरत को पूरा करने के लिए खुद-ब-खुद गहरी साँसें लेना शुरू कर देंगे। आपके गहरी साँसें लेते वक़्त, आपके लंग्स में कैसा फील होता है, के ऊपर बारीकी से ध्यान दें।
आराम से साँसें खींचें और अपनी साँसों को बाहर निकालने से पहले इन्हें 15 सेकंड के लिए होल्ड करके रखें। धीरे-धीरे आपके द्वारा साँसों को होल्ड करने के टाइम को 20 सेकंड, 30 सेकंड, 45 सेकंड और 1 मिनट तक बढ़ा दें। ये एक्सर्साइज़ आपके डायाफ्राम को मजबूत बनाती है।
जान-बूझकर "हा हा हा" साउंड निकालते हुए, दिल से हँसें। हँसते हुए अपने लंग्स से सारी हवा को बाहर निकाल दें, फिर जल्दी से और गहरी साँस लें।
अपनी पीठ पर लेट जाएँ और अपने डायाफ्राम के ऊपर एक बुक या और कोई सॉलिड चीज़ रख लें। अपनी बॉडी को जितना हो सके, उतना रिलेक्स करें। अपने डायाफ्राम के ऊपर ध्यान दें, ज्यादा कुछ नहीं, बस देखिये कि साँस लते वक़्त वो बुक किस तरह से उठती और नीचे जाती है। साँस छोड़ते वक़्त आप से जितना हो सके, उतना अपने पेट को फ्लैट करें और जब तक कि आप ऑटोमेटिकली एक्सपांड नहीं करते, तब तक रिपीट करें और अपनी वेस्ट को अपनी हर एक साँस के साथ मिलाएँ।
खड़े होकर गहरी साँसें लें। एक्सहेल, एक साँस के साथ, ज़ोर से एक से पाँच तक काउंट करें। इस एक्सर्साइज़ को तब तक रिपीट करें, जब तक कि आप आराम से 1 से 10 तक काउंट न करने लग जाएँ।
जब आप इस तरीके से बोलने लग जाएँ, तब आपको कुछ इस तरह से प्रोजेक्ट करते हुए आना चाहिए, ताकि आपकी आवाज रूम के दूसरे तरफ बैठे हुए लोगों को भी सुनाई दे सके, वो भी आपके बिना बहुत ज्यादा बेसुरे हुए।
अपने पिच (pitch) को बदलें:
ह्यूमन वॉइस कई पिच के रेंज में साउंड प्रोड्यूस करने के काबिल होती है। अपनी आवाज को कुछ वक़्त के लिए बदलने के लिए, एक पिच हाइ या लो बोलने की कोशिश करें।
पिच को लारेंजियल कार्टिलिज (laryngeal cartilage) के द्वारा बड़े हिस्से में बदल दिया जाता है। ये कार्टिलिज का एक मूविंग पीस होता है, जो आपके द्वारा इस स्केल: doh, re, mi, fa, sol, lah, ti, doh में गाने पर, उठता और नीचे जाता है।
लारेंजियल कार्टिलिज के रेज़ होने से आपके पिच रेज़ होते हैं और एक और फेमिनाइन (औरताना) साउंड तैयार होता है। लारेंजियल कार्टिलिज के ड्रॉप होने पर आपका पिच भी ड्रॉप होता है और एक ज्यादा मस्क्यूलाइन (मर्दाना) साउंड तैयार होता है।
अपने वोकल कोर्ड्स का ध्यान रखें:
आपके वोकल कोर्ड्स, बिल्कुल आपकी स्किन की तरह ही होते हैं, इन्हें भी उम्र से पहले खराब होने से बचाए रखने के लिए, इनका खयाल रखना होता है। अगर आप अपने वोकल कोर्ड्स पर बहुत ज्यादा दबाव देते हैं, तो आपकी आवाज आखिर में कर्कश, बेहद हल्की या किसी भी तरह से अप्रिय बन जाएगी। अपने वोकल कोर्ड्स को प्रोटेक्ट करने के लिए, ये कदम उठाएँ:
स्मोक मत करें। सिगरेट स्मोक करने से आपकी आवाज के ऊपर बहुत ज्यादा स्पष्ट प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से धीरे-धीरे इसकी वॉल्यूम और रेंज चली जाने की संभावना बनी रहती है। अगर आप आपकी आवाज को क्लियर और स्ट्रॉंग बनाए रखना चाहते हैं, तो बेहतर होगा अगर आप स्मोकिंग करना छोड़ दें।
ड्रिंकिंग में भी कमी करें। बहुत ज्यादा अल्कोहल भी आपकी आवाज को वक़्त से पहले ही खराब कर सकता है।
शुद्ध हवा में साँस लेने की कोशिश करें। अगर आप अशुद्ध या प्रदूषित एरिया में रहते हैं, तो हवा को शुद्ध करने के लिए अपने घर में बहुत सारे पौधे लगा लें और जितना ज्यादा हो सके, उतनी बार ताज़ी हवा में साँस लेने के लिए अपनी सिटी से बाहर निकल जाने का सोचें।
बहुत ज्यादा चिल्लाया मत करें। अगर आप हार्डकोर म्यूजिक के बहुत बड़े फ़ैन हैं या फिर आपको कभी-कभी ज़ोर से चिल्लाने में मजा आता है, तो सावधान हो जाएँ, अपनी आवाज को इस तरह से इस्तेमाल करने की वजह से आप इसे खराब कर सकते हैं। बहुत सारे सिंगर्स ने अपने वोकल कोर्ड्स को बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से लैरींगाइटिस (laryngitis) और अन्य वोकल परेशानियों का अनुभव किया है।
2
अपने स्ट्रेस लेवल को जाँचें:
हम लोग जब स्ट्रेस को या किसी सरप्राइज़ को एक्सपीरियन्स करते हैं, तब लारेंक्स कांट्रैक्ट (गले) के आस-पास की मसल्स और एक हाइ-पिच वाली आवाज़ का कारण बनती हैं। आप अगर लगातार नर्वस, चिंता में या स्ट्रेस में रहते हैं, तो ये हाइ पिच आपकी नॉर्मल वॉइस बनी रहेगी। अपने आपको शांत करने के कुछ उपाय करें, ताकि आपकी एक स्थिर, फुल वॉइस उभरकर आ सके।
बोलने से पहले कुछ गहरी सांसें लेने की कोशिश करें। खुद को शांत करने के साथ ही, ये आपको आपके डायाफ्राम से प्रोजेक्ट करके, आपकी वॉइस के साउंड को बेहतर करने में भी मदद करेगा।
रिएक्ट करने से पहले सोचने के लिए 10 सेकंड लें। आप जब भी नर्वसनेस या सरप्राइज़ में रिएक्ट करने से पहले, खुद को सोचने-समझने का वक़्त देते हैं, तब आपका अपनी आवाज के ऊपर अच्छा कंट्रोल होता है। सोचें, एक बार साँस लें, फिर कुछ बोलें - आप देखेंगे कि आपकी आवाज अब ज्यादा स्थिर और शांत निकलेगी
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