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शिशु को जुकाम किस वजह से हुआ है?
सर्दी-जुकाम मुंह, नाक और गले का इनफेक्शन है, जो कि बहुत से अलग-अलग विषाणुओं में से किसी एक की वजह से होता है। शिशुओं को जुकाम ज्यादा इसलिए होता है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षण प्रणाली (इम्यून सिस्टम) अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती। वह अभी संक्रमणों से लड़ने की शक्ति विकसित कर रही होती है।

बढ़ता हुआ शिशु नई चीजों को देखने-समझने और उन्हें पकड़ने की कोशिश करता है, ऐसे में किसी सतह से सर्दी-जुकाम का विषाणु (वायरस) उसके हाथों तक पहुंच सकता है। यदि वह इन दूषित उंगलियों को अपने मुंह या नाक में डालें या अपनी आंखों को मसले तो वह बीमार पड़ सकता है।

यदि उसके नजदीक रहने वाले किसी व्यक्ति को सर्दी-जुकाम हो, तो शिशु भी इस वायरस के संपर्क में आ सकता है।

आपका शिशु अक्सर मानसून और सर्दियों के महीनों में ज्यादा बीमार पड़ सकता है क्योंकि सर्दी-जुकाम का वायरस साल के इस समय में ज्यादा फैलता है।
शिशुओं में सर्दी-जुकाम कितने समय तक रहता है?
सर्दी-जुकाम के लक्षण आमतौर पर जुकाम होने के दो से तीन दिन बाद चरम पर होते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे ये 10 दिन से दो हफ्तों के बीच ठीक होते जाते हैं। हालांकि, हल्की खांसी तीन हफ्तों तक बनी रह सकती है।

यदि आपके शिशु में सर्दी-जुकाम के लक्षण कुछ हफ्तों से ज्यादा लंबे चलें या उसके लक्षण सुधरने की बजाय बिगड़ रहे हों तो डॉक्टर से बात करें।
सर्दी-जुकाम का इलाज कैसे किया जाए?
शिशु का जुकाम आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाएगा। मगर, आप उसकी परेशानी को कम करने के लिए कुछ कदम उठा सकती हैं, जैसे कि:

सुनिश्चित करें कि आपके शिशु को पूरा आराम मिले।
शिशु को ज्यादा बार स्तनपान या बोतल से दूध पीने के लिए प्रोत्साहित करें। अगर आपका शिशु फॉर्मूला दूध पीता है या ठोस आहार ले रहा है, तो आप उसे पानी भी दे सकती हैं। यदि शिशु की उम्र छह महीने से कम है तो पहले पानी को उबालकर ठंडा करके ही उसे दें।
अगर शिशु को बुखार हो, और वह तीन महीने से बड़ा है तो आप डॉक्टर के निर्देश पर उसे पैरासिटामोल सिरप भी दे सकती हैं। सर्दी-जुकाम की कोई भी दवा डॉक्टर से बिना पूछे न दें।
जब भी संभव हो शिशु का सीधा बिठाने का प्रयास करें। सीधी अवस्था में होने से उसे सांस लेने में आसानी रहेगी। शिशु के गद्दे को ऊंचा न करें, तकिया न लगाएं या कॉट को ऊंंचा न उठाएं, क्योंकि ऊंचीं अवस्था सोने से शिशु को सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (एसआईडीएस) का खतरा रहता है।
बार-बार ​शिशु की नाक पौंछने की वजह से उसकी नाजुक त्वचा में संवेदनशीलता हो सकती है, इससे बचाव के लिए आप उसके नथुनों के बाहर थोड़ी सी पैट्रोलियम जैली लगा सकती हैं। एक बार में बहुत सारी पैट्रोलियम जैली न लगाएं, क्योंकि क्योंकि इससे यह सांस के जरिये अंदर जा सकती है या शिशु इसे खा भी सकता है।
नाक में लवणयुक्त पानी (सैलाइन ड्रॉप्स) डालने से बंद नाक खोलने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर से पूछें कि क्या शिशु की नाक में सैलाइन ड्रॉप्स डालना सही रहेगा या नहीं और फिर दोनों नथुनों में एक या दो बूंद डाल दें। शिशु को स्तनपान करवाने से 15 मिनट पहले सैलाइन ड्रॉप्स डालने से शिशु को दूध पीने में आसानी रहेगी। सैलाइन ड्रॉप्स के कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं और इन्हें दिन में कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। ।
भाप से भी शिशु की नाक में भरे श्लेम को ढीला करने में मदद मिल सकती है। मगर, शिशु को गर्म, भाप वाले पानी के ज्यादा नजदीक न लाएं, इससे उसके जलने का खतरा रहता है। भाप दिलवाने का एक सुरक्षित तरीका यह है कि उसे अपने साथ बाथरूम में ले जाएं। गर्म पानी का शावर चालू करें, दरवाजे को बंद कर लें और भापयुक्त बाथरूम में कुछ मिनटों तक बैठे रहें। इस तरीके से भाप दिलवाने के बाद शिशु के कपड़े अवश्य बदल दें। यहां और अधिक पढ़ें कि शिशु को भाप दिलाने के सुरक्षित तरीके क्या हैं।

शिशु को ऐसी कोई घरेलू उपचार न दें जिनमें शहद हो। एक साल से कम उम्र के शिशुओं के लिए शहद सुरक्षित नहीं है।

साथ ही, ध्यान रखें कि शिशुओं के डॉक्टर दो साल से कम उम्र के बच्चों पर वेपर रब के इस्तेमाल की सलाह नहीं देते। इससे उन्हें जलन व असहजता हो सकती है। यदि आप अपने थोड़े बड़े बच्चे को वेपर रब लगाना चाहती हैं, तो डॉक्टर से बात करें। वे आपको विशेषतौर पर बच्चों के लिए आने वाले वेपर रब उत्पादों के बारे में सलाह दे सकते हैं।
शिशु को जुकाम पैदा करने वाले कीटाणुओं से मैं किस तरह बचा सकती हूं?
आप शिशु को सर्दी-जुकाम होने से तो नहीं बचा सकतीं, मगर साफ-सफाई का पालन करके आप शायद इसे ज्यादा बार होने से रोक सकती हैं।

शिशु को जुकाम पैदा करने वाले कीटाणुओं के संपर्क में आने से बचाने के लिए आप निम्नांकित उपाय आजमा सकती हैं:

हाथ धोना। सुनिश्चित करें कि शिशु को गोद में लेने से पहले परिवारजन और दोस्त अपने हाथ अच्छी तरह धो लें। नवजात शिशुओं के मामलों में ऐसा करना और भी जरुरी है। और आप भी हाथ धोने का ध्यान रखें - खासतौर पर डाइपर बदलने के बाद और खाना तैयार करने से पहले।
बीमार लोगों से दूर रहें। जितना हो सके अपने शिशु को बीमार बच्चों और बड़ों से दूर रखें।
खांसते या छींकते समय अपना मुंह ढक लें। परिवारजनों को समझाएं कि शिशु के आसपास खांसें या छीकें नहीं और खांसते या छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और ​इसे ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंक दें। बच्चों को अपना मुंह कोहनी में लगाकर खांसने या छींकने के लिए कहें।
शिशु को जलनियोजित रखें। शिशु को समय-समय पर स्तनपान या बोतल से दूध पिलाती रहें। जब शिशु ठोस आहार खाना शुरु कर दे, तो आप उसे थोड़ा पानी भी पिला सकती हैं। शिशु को जूस न दें। दो साल से कम उम्र के बच्चों को जूस न देने की सलाह दी जाती है।
शिशु के खिलौनों और चूसनी (पैसिफायर) को साफ रखें। यदि शिशु के खिलौनों से कोई और बच्चा भी खेलता हो तो यह विशेषतौर पर और भी जरुरी है।
परोक्ष धूम्रपान से बचें। इससे शिशु को ऊपरी श्वसन तंत्र (अपर-रेस्पिरेटरी) से जुड़ी समस्याएं होने का ज्यादा खतरा हो सकता है। इसलिए धूम्रपान करने वालों से दूर रहें और शिशु को ऐसी जगह पर भी न ले जाएं जहां किसी ने धूम्रपान किया हो। जो बच्चे सिगरेट पीने वाले व्यक्तियों के साथ रहते हैं उन्हें ज्यादा सर्दी-जुकाम होता है और धूम्रपान के संपर्क में न आने वाले बच्चों की तुलना में उनका जुकाम भी ज्यादा लंबा चलता है।
जब तक हो सके शिशु को स्तनपान करवाएं। विशेषज्ञों की सलाह है कि स्तनदूध के फायदे पाने के लिए शिशु को एक साल स्तनपान करवाना चाहिए। हालांकि, यह शिशु को इनफेक्शन से बचाने का सुरक्षित उपाय नहीं है, मगर अध्ययन दर्शाते हैं कि स्तनपान करने वाले शिशु फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशुओं की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि स्तनदूध में मौजूद एंटीबॉडीज उसे विभि​न्न तरह के रोगाणुओं से सुर​क्षा देती हैं।
सभी टीके लगवाएं। टीकाकरण से शिशु को जुकाम होने से नहीं बचाया जा सकता, मगर टीके और गंभीर संक्रमणों से बचाव कर सकते हैं।

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