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किस तरह का मल सामान्य नहीं है?
दस्त (डायरिया)
शिशु में निम्नांकित लक्षण दस्त (डायरिया) का संकेत हो सकते हैं, जैसे कि:
आपके शिशु का मल बहुत पतला है
वह ज्यादा बार या सामान्य से अधिक मात्रा में मल त्याग कर रहा है
मल विस्फोटक ढंग से या एकदम फूट के बाहर निकलता है
अगर, आप शिशु को स्तनपान करवाती हैं, तो उसे दस्त होने की संभावना कम होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि आपका दूध दस्त पैदा करने वाले जीवाणुओं को बढ़ने से रोकता है।
बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं को इनफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए यह जरुरी है कि दूध की बोतल व अन्य उपकरणों को कीटाणुमुक्त (स्टेरलाइज) किया जाए। आप अपने हाथ भी हमेशा अच्छी तरह धोएं।
अगर आपके शिशु को डायरिया है, तो इसकी निम्न वजह हो सकती हैं:
कोई इनफेक्शन, जैसे कि गैस्ट्रोएंटेराइटिस
बहुत ज्यादा फल या फलों का रस
किसी दवाई के प्रति प्रतिक्रिया
किसी भोजन के प्रति संवेदनशीलता या एलर्जी
अगर आप शिशु को बोतल से दूध पिलाती हैं, तो हो सकता आप जिस फॉर्मूला दूध के ब्रांड का इस्तेमाल कर रही हैं, वह आपके शिशु के लिए उपयुक्त न हो। मगर, दूध का ब्रांड बदलने से पहले डॉक्टर से बात कर लें, क्योंकि हो सकता है इसकी वजह कुछ ओर ही हो।
यदि आपके शिशु के दांत निकल रहे हैं, तो उसका मल सामान्य से पतला हो सकता है। मगर, इसलिए वजह से डायरिया नहीं हो सकता। अगर, शिशु को डायरिया हो, तो यह न मान लें कि इसकी वजह शिशु के दांत निकलना है, संभवतया यह कोई इनफेक्शन हो सकता है।
बड़े शिशु में डायरिया गंभीर कब्ज का भी संकेत हो सकता है। हो सकता है कड़े मल के अवरोध में से थोड़ा सा ताजा मल लीक होकर बाहर आ रहा हो।
डायरिया 24 घंटों में बिना उपचार के ठीक हो जाना चाहिए। अगर, ऐसा न हो, तो अपने शिशु को डॉक्टर के पास ले जाएं, क्योंकि शिशु को शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) का खतरा रहता है।
अगर शिशु ने पिछले 24 घंटों में छह बार पतला मल त्याग किया है, तो तुंरत अपने डॉक्टर को दिखाएं।
कब्ज
बहुत से शिशुओं की मल त्याग करते हुए चटक लाल रंगत हो जाती है और वे मल को बाहर निकालने के लिए बहुत जोर लगाते हैं। यह सामान्य है। कब्ज तब होता है, जब:
शिशु को मल त्याग करने में बहुत ज्यादा मुश्किल हो रही हो
उसका मल बहुत थोड़ा और सूखा है। कभी-कभी यह ज्यादा और ठोस हो सकता है।
छूने पर उसका पेट काफी कड़ा महसूस होता है
उसके मल में ताजा खून दिखाई देता है। ऐसा कड़ा मल निकालते समय त्वचा के थोड़ा-थोड़ा फटने की वजह से होता है, इसे अंग्रेजी में एनल फिशर कहते हैं।
स्तनपान करने वाले शिशुओं को कब्ज की उतनी शिकायत नहीं रहती, जितनी की फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशुओं को होती है। स्तनदूध में वे सभी जरुरी पोषक तत्व होते हैं, जो शिशु के मल को मुलायम रखते हैं।
फॉर्मूला दूध बनाते समय ज्यादा पाउडर डालने से भी कब्ज हो सकता है। इसलिए दूध तैयार करते समय दिए गए निर्देशों का पालन करें। सुनिश्चित करें कि दूध पाउडर डालने से पहले आप बोतल में बताए गए स्तर तक पानी भर लें।
कब्ज के और भी कारण हो सकते हैं, जैसे कि:
बुखार
शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
तरल पदार्थों के सेवन में बदलाव
आहार में बदलाव
कुछ विशेष दवाएं या उपचार
कई बार बड़े शिशुओं को भी कब्ज हो जाता है, क्योंकि वे दर्द से बचने का प्रयास करते हैं। उदाहरण के तौर पर, हो सकता है उनके गुदा के मुख के आसपास की त्वचा फटी हो (एनल फिशर)। यह एक विषम चक्र साबित हो सकता है। आपका शिशु मल त्याग नहीं करता, जिससे उसे और ज्यादा कब्ज होता जाता है। ऐसे में जब वह मल त्याग करता है, तो दर्द और भी ज्यादा होता है।
अगर शिशु को कब्ज हो, विशेषकर उसके मल में खून दिखाई दे, तो उसे हमेशा डॉक्टर के पास ले जाएं। वे इसके सभी संभावित कारणों की जांच करेंगे।
आपको शायद शिशु को ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ देने के लिए कहा जाएगा। साथ ही, अगर शिशु ठोस आहार खाता है, तो उसके आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाने का सुझाव भी दिया जा सकता है। कुछ माएं शिशु को मुनक्के की प्यूरी या खुबानी देना फायदेमंद समझती हैं।
कब्ज किसी स्वास्थ्य स्थिति की वजह से भी हो सकता है, मगर यह काफी दुर्लभ है।
हरे रंग का मल
यदि आप स्तनपान करवा रही हैं, तो कभी-कभार हरा मल आना चिंता की बात नहीं है।
हरे मल का मतलब है कि शिशु शायद बहुत ज्यादा अग्रदूध पी रहा है (कम वसा वाला स्तनदूध) जो स्तनपान में सबसे पहले आता है। बाद में आने वाला वसायुक्त दूध उसे पर्याप्त नहीं मिल पा रहा। अपनी स्तनपान करवाने की तकनीक में थोड़ा बदलाव करें और सुनिश्चित करें कि एक स्तन से दूध पी लेने के बाद ही आप शिशु को दूसरे स्तन से दूध पिलाना शुरु करें।
मगर यदि आपका शिशु लगातार विस्फोटक हरा मलत्याग कर रहा है, तो इसका कारण हो सकता है कि वह बहुत जल्दी-जल्दी स्तपान कर रहा है। जब दूध का प्रवाह उसके खाली पेट में पहुंचता है, तो यह हवा के बुलबुले बनाता है, जिससे पाचन धीमा हो जाता है।
अर्धलेटी अवस्था में शिशु को स्तनपान करवाएं। यह शिशु को स्तनपान करवाने की आरामदेह अवस्था है और प्रबल लेट-डाउन होने पर भी यह दूध के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करती है।
यदि आप शिशु को फॉर्मूला दूध पिला रही हैं, तो हो सकता है उस ब्रांड के दूध से शिशु का मल हरा आ रहा हो। आप डॉक्टर की सलाह से किसी दूसरे ब्रांड का फॉर्मूला दूध चुन सकती हैं, और देखें कि क्या इससे कुछ असर पड़ता है।
यदि लक्षण 24 घंटें से ज्यादा बने रहें, तो शिशु को डॉक्टर को दिखाएं। इसके निम्नांकित कारण हो सकते हैं:
किसी भोजन के प्रति संवेदनशीलता
दवा का दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट), आयरन के अनुपूरक शिशु के मल को गहरे रंग का बना सकते हैं।
आपके शिशु की दूध पीने की दिनचर्या
पेट का इनफेक्शन
अगर लक्षण 24 घंटों से ज्यादा समय के लिए बने रहें, तो शिशु को डॉक्टर को दिखाएं।
अत्याधिक फीके रंग का मल
बहुत ज्यादा फीके रंग का मल पीलिया होने का संकेत हो सकता है, जो कि नवजात शिशुओं में काफी आम है। पीलिया की वजह से आपके नवजात की त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से में पीलापन आ जाता है। यह आमतौर पर जन्म के कुछ हफ्तों में ठीक हो जाता है।
मगर, यदि शिशु को पीलिया हो तो डॉक्टर को अवश्य बताएं, फिर चाहे वह समाप्त ही होने वाला क्यों न हो।
फीकी रंगत और चूने जैसा सफेद मल आना यकृत (लीवर) की बीमारी का एक महत्वपूर्ण संकेत है, इसलिए चाहे आपको शिशु में पीलिया न लगे फिर भी इस बारे में डॉक्टर को अवश्य बताना चाहिए। बड़े बच्चों में, फीकी रंगत वाले मल का कारण बहुत ज्यादा दूध पीना या कुछ विशिष्ट संक्रमण हो सकता है।
खून के धब्बे
अगर, शिशु को कब्ज हो, तो उसके मल में खून की धारियां/धब्बे दिखाई दे सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जोर लगाने से उसके गुदा के आसपास की त्वचा थोड़ी फट सकती है (एनल फिशर)। जब शिशु मल त्याग करता है, तो इसमें से खून निकलता है।
कई बार यह किसी इनफेक्शन या एलर्जी की वजह से शिशु की आंतों में असहजता होने की वजह से भी हो सकता है। शिशु के मल में खून दिखाई देने पर हमेशा इसकी जांच डॉक्टर से करवाएं।
कई बार शिशु के मल में खून काले रंग का दिख सकता है, जिसका मतलब है कि यह पचाया हुआ है। जब यह पचा हुआ खून शिशु के डायपर में दिखाई दे तो ये आमतौर पर थोड़े बहुत धब्बे जो काले खसखस या तिल के बीज जैसा दिख सकता है। यह अक्सर इसलिए होता है क्योंकि आपके शिशु ने अपनी मां के कटे-फटे निप्पलों से खून निगल लिया है।
हालांकि, यह संकेत है कि आपको चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए और दर्द से राहत के लिए कुछ करना चाहिए, मगर यह शिशु के लिए नुकसानदेह नहीं है। फिर भी यह सुनिश्चित करने के लिए कि कुछ गंभीर बात नहीं है जैसे कि शिशु के उपरी आन्त्र प्राणाली से खून आना आदि, तो आप डॉक्टर से बात कर सकती हैं।
मोटा काला मल अधिकांशत पचाए हुए खून, जिसे अंग्रेजी में मेलेना कहा जाता है, से बना होता है और इसके लिए तुरंत चिकित्सकीय मदद की जरुरत होती है। यह आमतौर पर मिकोनियम की तरह गहरा और तारकोल जैसा हो सकता है, मगर उससे थोड़ा ठोस और कम चिपचिपा होता है।
कई बार आयरन अनुपूरक की वजह से भी मल गहरे रंग का हो सकता है। आप कुछ दिन तक यह अनुपूरक बंद करके देख सकती हैं, कि मल का रंग सामान्य होता है या नहीं। फिर दोबारा ये अनुपूरक लेना शुरु कर दे और देखें कि क्या मल का रंग फिर से गहरा होता है।
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