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आखिर क्यों आपका शिशु नहीं पी रहा बोतल से दूध?
मां अपना दूध निकालकर उसे संभालकर रखे और फिर बच्चे को बाद में ज़रूरत पड़ने पर पिलाए, इसमें काफी मेहनत लगती है। साथ ही, इसकी कई चुनौतियां होती हैं। ज्यादातर वर्किंग मां ऐसा करती हैं। कुल मिलाकर, ये तरीका ऐसी माओं के लिए अच्छा रहता है जो अपने शिशु को ब्रेस्टफीड करवाना चाहती है, लेकिन किसी वजह से उसके लिए ये मुमकिन नहीं हो रहा।
शिशु को इस तरह से दूध पिलाना, ऊपर का दूध पिलाने से बहुत बेहतर विकल्प है। इसमें थोड़ा सा भी शक नहीं है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपका शिशु बोतल से आपका ब्रेस्टमिल्क नहीं पीता बल्कि सीधा ब्रेस्ट से पीना चाहता है। ऐसी स्थिति में न तो आपके शिशु के साथ कोई समस्या है, न ही आप कुछ ऐसा गलत कर रही हैं जिससे बच्चा दूध नहीं पी रहा। बल्कि ऐसा निप्पल की कंफ्यूजन की वजह से हो सकता है। अगर आप ब्रेस्टफीडिंग के बाद ब्रेस्ट मिल्क निकालकर बोतल से पिला रही हैं तो आपका बच्चा इसलिए दूध पीने से इनकार कर सकता है क्योंकि उसे आपकी ब्रेस्ट के निप्पल की आदत पड़ चुकी होती है।
ऐसी स्थिति में चिंता न करें। अपने बच्चे को बोतल से दूध पिलाने की कोशिश करती रहें, साथ ही साथ उसे बीच-बीच में डायरेक्ट ब्रेस्टफीडिंग भी करवाएं। अगर आप इस कशमकश में हैं कि आखिर आपके शिशु के लिए कौन सा विकल्प बेहतर रहेगा तो हमारी लैक्टेशन एक्सपर्ट और प्रीनटल कोच सोनाली शिवलानी के अनुसार इन कारणों से आपके शिशु के लिए डायरेक्ट ब्रेस्टफीडिंग विकल्प ज्यादा अच्छा है –
जब शिशु ब्रेस्ट से दूध पीता है तो उसमें दूध ज्यादा बनने लगता है।
इससे शिशु और मां के संबंध भी गहरे होते हैं।
ब्रेस्टफीडिंग दांतों के विकास के लिए सर्वोत्तम है।
इससे आपका शिशु का पेट जरूरत से ज्यादा नहीं भरेगा क्योंकि वो तब तक ही मुंह लगाए रखेगा जब तक भूख रहेगी।
इससे मां का समय भी बचेगा क्योंकि दूध निकालकर उसे सुरक्षित रखने में समय लगता है।
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