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अगर आप प्रेगनेंट हैं तो आप भी इंतजार कर रही होंगी कि कब आपको अपने बच्‍चे की पहली किक महसूस हो। अमूमन हर बच्‍चा किक मारता है और अगर बच्‍चा किक ना मारे तो इसे किसी समस्‍या का संकेत माना जाता है।

यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि बच्‍चा किक क्‍यों और कब मारता है और इसके क्‍या फायदे होते हैं।

हड्डियां होती हैं मजबूत
भ्रूण के विकास में किक मारना एक अहम हिस्‍सा होता है। गर्भ में ट्विस्टिंग, टर्निंग, रोलिंग करने से शिशु की विकसित हो रही हड्डियों को शेप में आने में मदद मिलती है।

आमतौर पर प्रेग्‍नेंसी के 20वें से 30वें सप्‍ताह के बीच बच्‍चे की किक ज्‍यादा तेज होती है। इस समय शिशु की हड्डियां और जोड़ शेप में आना शुरू ही करते हैं। गर्भावस्‍था के 35वें सप्‍ताह के बाद से किक में कमी आने लगती है।

क्‍या कहती है स्‍टडी
कुछ अध्‍ययनों का मानना है कि बच्‍चे की किक न्‍यूरोलॉजिकल यानी नसों के विकास में मदद करती है। हालांकि, ये बात स्‍पष्‍ट नहीं है कि कम मूवमेंट या किक मारने वाले बच्‍चों की नसों का विकास खराब होता है। अगर आपको अपने बच्‍चे की किक बहुत तेज महसूस हो रही है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है।

बच्‍चा कब मारता है किक

पहली बार मां बनने पर आपको बच्‍चे की किक प्रेग्‍नेंसी के 16वें हफ्ते से 25वें हफ्ते के बीच महसूस हो सकती है। यह प्रेग्‍नेंसी की दूसरी तिमाही होती है। इस समय शिशु के किक मारने पर आपको पेट में गुदगुदी जैसा अजीब सा फील हो सकता है। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है जब महिलाओं को बच्‍चे की किक महसूस ही नहीं होती है। ऐसे में चिंता ना करें, एक बार अपने डॉक्‍टर से बात कर लें।

हिचकी भी होती है महसूस
गर्भवती मां को अपने बच्‍चे की किक के साथ हिचकियां भी महसूस होती हैं। प्रेग्‍नेंसी की तीसरी तिमाही में आने पर आपको बच्‍चे की मूवमेंट ज्‍यादा और नियमित रूप से महसूस होने लगती है।
अब पेट में महसूस हो रही फड़फड़ाहट साफ तौर पर किक के रूप में महसूस होने लगती है। वहीं, इस समय आपको बच्‍चे की हिचकियां भी फील होने लगेंगी। प्रेग्‍नेंसी के 36वें हफ्ते के आसपास बच्‍चे की किक में धीरे-धीरे कमी आ सकती है क्‍योंकि उसे गर्भ में अब जगह कम पड़ रही होती है।

बेबी की किक को करें मॉनिटर
डॉक्‍टरों की राय है कि प्रेग्‍नेंसी के 28वें हफ्ते में और तीसरी तिमाही की शुरुआत में बच्‍चे की रोजाना की किक को गिनना शुरू कर देना चाहिए। अगर एक घंटे में बच्‍चा 10 से कम बार किक मारता है तो तुरंत डॉक्‍टर को बताएं।
आमतौर पर बच्‍चा सुबह और शाम के समय ज्‍यादा एक्टिव होता है। बैठने या लेटने पर आपको सबसे ज्‍यादा किक महसूस हो सकती है। कुछ बच्‍चे नैचुरली कम या ज्‍यादा एक्टिव होते हैं। इ‍सलिए डॉक्‍टर से बात करके यह सुनिश्चित करें कि आपके बच्‍चे की कितनी मवूमेंट सुरक्षित है। अगर आपका बच्‍चा हमेशा सुबह के समय किक मारता है और तीसरी तिमाही में एक सुबह उसकी कोई मूवमेंट महसूस नहीं होती है तो तुरंत डॉक्‍टर को बताएं।

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