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बच्चों में भूख न लगने के 7 कारण और उनसे बचाव के उपाय
बच्चों में भूख न लगने के 7 कारण
दाँत निकालना :
teething
एक बच्चे का जन्म प्रत्येक माता-पिता को अतुलनीय खुशी देता है, उसी प्रकार उसका विकास और बड़ा होना उस खुशी को बढ़ा देता है। अभी आपने अपने नवजात के जन्म के पल को भुला भी नहीं पाये की उसके छोटे से मुंह में नन्हें सफ़ेद दाँत चमकने लगते हैं और उसकी मुस्कुराहट दंत विहीन नहीं रह जाती है। इस अवस्था में बच्चे की भूख पर असर होता है और पहले के मुक़ाबले बच्चे कम भोजन की इच्छा प्रकट करने लगते हैं। इसका मुख्य कारण यह भी होता है की जब बच्चों के दाँत निकलने शुरू होते हैं तो उनके मसूड़ों में बैचेनी और दर्द भी शुरू हो जाता है। सामान्य रूप से बच्चों के 4 से 7 माह की अवस्था के बीच में दाँत निकालने शुरू हो जाते हैं। इस समय बच्चों को मसूड़ों के दर्द में आराम देने के लिए उन्हें वो खिलौने दें, जिन्हें वो मुंह में रख कर चबा सकते हों। उन्हें खाने में ठंडी चीजें जैसे दही और मसले हुए फल दिये जा सकते हैं। स्तनपान और बोतल से दूध पीने में बच्चे तकलीफ महसूस कर सकते हैं इसलिए उन्हें कप और चम्मच से दूध पिलाने का प्रयास करें।
तरल पदार्थ की अधिक मात्रा :
taral padarth ki adik matra
कुछ बच्चे ठोस के स्थान पर तरल पढ़ार्थों जैसे पानी और जूस का सेवन अधिक पसंद करते हैं। ऐसी अवस्था में वो ठोस भोजन के प्रति अरुचि दिखाते हैं। जब आपका बच्चा छह माह का होता है तो उसके शरीर में पानी की कमी, उसके द्वारा लिए जाने वाले दूध से ही पूरी हो जाती है। इसलिए यदि इसके अतिरिक्त पानी या कोई तरल पदार्थ दिया जाता है तो इससे उसके स्तनपान या बोतल के दूध से मिलने वाले पोषण को ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है। इससे बच्चा हर समय भरे पेट की भावना से भरा रहता है और वो ठोस भोजन के लिए अरुचि दिखाता है और इस प्रकार उसकी भूख में कमी हो जाती है।
संक्रमण :
sankraman
हवा (वायरल)या विषाणु (बैक्टीरिया) संक्रमण (इन्फेक्शन) के कारण कभी-कभी बच्चे भोजन करने से मना कर देते हैं। फ्लू, कान का संक्रमण और ब्रोंकाइटिस (छाती में संक्रमण) के कारण दर्द और तेज सांस की परेशानी भी बच्चों को खाने और सोने में तकलीफ देतीं हैं। इसलिए जब आपको लगे की आपका बच्चा खाने में अरुचि दिखा रहा है तो तुरंत शिशु विशेषज्ञ से संपर्क करके यह सुनिश्चित कर लें की सामान्य बीमारियों के ज़रूरी टीकाकरन पूरा हुआ है या नहीं। बच्चों को चुप कवाने के लिए दिये जाने वाले मुंह के खिलौने (Pacifiers) का प्रयोग करने से बचना चाहिए क्यूंकी 33% बच्चों में इसके प्रयोग से कान में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
गरम मौसम:
gharam mausam
गर्मी का मौसम वयस्क व्यक्ति को परेशान कर देता है और छोटे बच्चे भी इसका अपवाद नहीं है। कभी-कभी अत्यधिक गर्मी के कारण बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं, शरीर पर लाल निशान उभर आते हैं और खाने के प्रति अरुचि हो जाती है। अगर यह स्थिति अधिक बढ़ जाती है तो शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है की आप इस बात का ध्यान रखें की आपके बच्चे के शरीर में पानी की मात्रा बराबर बनी रहे और उसे गर्मी से बचाने के लिए उसके कमरे का तापमान ठंडा बना रहे। गर्मी में बच्चों को हल्के और सूती कपड़े पहनाएँ जिससे वो उनके शरीर पर चिपके नहीं। अगर यह सब करने के बाद भी आपका बच्चा खाना खाने में परेशानी कर रहा है तो तुरंत किसी चिकटीसक से सलाह करें।
खाने से एलर्जी:
khane se allergy
कभी-कभी कुछ बच्चों को खाने की कुछ चीजों जैसे दूध, अंडा, मूँगफली, सोया आदि से एलर्जी हो सकती है। जिसके कारण बच्चों में गैस बनने की शिकायत, खुजली, उल्टी होना, दस्त होना या भूख खतम होने की शिकायत हो सकती है। ऐसी स्थिति में आप यह पता करें की आपके बच्चे को खाने की किस चीज से एलर्जी की परेशानी हुई है और उसके बाद उसे पूरी तरह से छोड़ दें। यदि आपके लाडले को दूध से एलर्जी हो गई है तो उसे फार्मूला दूध जो दूध दे एलर्जी वाले बच्चे पी सकते हैं,दे दीजिये। इससे उन्हें दूध वाली एलर्जी में भी आराम आएगा और उनकी भूख भी खुल जाएगी।
खराब गला:
kharab ghala
जब बच्चों का गला खराब हो या किसी प्रकार का इन्फेक्शन हो तो उस स्थिति में भी वो लगातार रोते हैं। इस स्थिति में उन्हें कुछ भी गले की नीचे उतारने में परेशानी हो सकती है और इस कारण उनकी भूख कम हो जाती है। यदि आपके बच्चे के खराब गले के साथ ही बुखार और गले में लिम्फ़ नोड्स सूजे हुए हैं तो तुरंत सलाह के लिए चिकित्सक के पास जाएँ जिससे बच्चे के इन्फेक्शन की परेशानी को दूर किया जा सके और उसकी भूख को बढ़ाने का प्रयत्न किया जा सके।
विकास होना:
vikhas hona
आपको बच्चे के विकास के क्रम के बारे में पता होना चाहिए। क्या आप जानतीं हैं की बच्चे शुरू के छह माह में तेजी से बढ़ते हैं और उसके बाद छह से बारह महीने की अवधि में विकास की गति धीमी हो जाती है। इसके बाद के छह महीने अथार्थ अठारह महीने तक विकास और धीमी गति से होता है। इसीलिए यह हो सकता है की बच्चे की भूख जो उसके दस महीने की आयु में थी वो इस समय न हो, इस समय शरीर की कैलोरी की आवश्यकता में भी अंतर आ जाता है। आप अपने बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतों के लिए समय-समय पर अपने चिकित्सक से सलाह मशविरा करते रहें।
कभी भी बच्चों को जबर्दस्ती खाना खिलाने का या उनके गले के नीचे उतारने का प्रयास न करें। ऐसा करने पर किसी समय स्वास्थ्य संबंधी परेशानी खड़ी हो सकती है। नवजात शिशु को भोजन करवाते समय बहुत धैर्य और नर्म व्यवहार की जरूरत होती है। यहाँ बताई गई बातों को ध्यान में रखें। जैसे-जैसे आपका बच्चा बड़ा होता है उसे भोजन में नयी चीजों का स्वाद धीरे-धीरे ही दें। लेकिन उससे पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरूर कर लें। बच्चों का खाना शुद्ध हो।
आराधना पांडे
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