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हम में से बहुत लोगों को यह जानकारी नहीं होगी कि नवजात शिशु की दृष्टि, सामान्य रूप से कमजोर होती है, और वह दूर की चीजो को साफ-साफ नही देख पाते हैं। जन्म के समय आपके बच्चे की आंखे देखने मे शारीरिक रूप से सक्षम है लेकिन उसका मस्तिष्क अभी बहुत सारी चीजो को देखने के लिये तैयार नहीं है। इसलिये शिशु अभी भी धुंधला ही देख पाता है।

जैसे-जैसे शिशु के मस्तिष्क का विकास होता है वैसे-वैसे शिशु की नजर का विकास भी होने लगता है, जिससे उसमें पर्यावरण की बौद्धिक समझ बढ़ती है। धीरे-धीरे बच्चा कुछ ही चेहरो, आकृतियों, और चीजो को देखना पसंद करता है। बच्चे के लिये सबसे आकर्षक आपकी आंखे और आपका चेहरा होता है। बेबीचक्रा के इस लेख में जानेंगें कि नवजात शिशु की आई साईट (Newborn baby eyesight) कैसे काम करती है?

उम्र के साथ दृष्टि का होता है विकासं

एक नवजात शिशु का मस्तिष्क विकास और नजर विकास कैसे होता है यह आपको यहां जानने को मिलेगा। एक बात हमेशा याद रखें प्रत्येक बच्चा अलग होता है और कभी भी अपने बच्चे की तुलना किसी और बच्चे से ना करे, प्रत्येक बच्चे की दृष्टि का विकास शिशुओ मे अलग-अलग हो सकता है –
दृष्टि विकास: माह 2 और 3

जन्म के समय आपके बच्चे की दृष्टि दो छवियो के बीच अंतर करने या उनकी आंखो को स्थानांतरित करने की क्षमता विकसित नहीं कर पाती है और शिशु केवल 8 से 10 इंच की वस्तुओ को ही देख सकता है। इस अवस्था में आमतौर पर शिशु अलग अलग आकृती और रंगीन और हिलती हुई वस्तुओ को देखना पसंद करते है।

पहले महीने मे शिशु की आंखे एकसाथ काम करना शुरू कर देती है और नजर में सुधार होने लगता है। यदि आपको लगता है कि शिशु की आंख लगातार अंदर या बाहर घुम रही है तो आप बेबी विजन टेस्ट कराये (शिशु की नजर की जांच )। शिशु आमतौर पर तीन महिने की उम्र मे आंखो के साथ चलती वस्तुओ को देखना शुरू कर देते है।
दृष्टि विकास: माह 4 से 6

इन महीनो मे, आंखो की गति और समन्वय मे सुधार होने लगता है। पांच महीने तक शिशु वस्तु को पहचानना, वस्तु दूर है या पास यह समझना, यह सब देखने और समझने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, हो सकता है आपका शिशु किसी भी चीज को पहचानने मे सक्षम हो, वस्तु का एक हिस्सा देख कर ही उसे उसके बारे मे समझ आ जाये। आपका शिशु लुका छिपी खेलना पसंद करता है और साथ ही 7 महीने के अंत तक, आपका शिशु नब्बे प्रतिशत रंगों को देखने लगता है।
दृष्टि विकास: माह 7 से 12

9 महीने की उम्र मे आपके शिशु की दृष्टि एक वयस्क के समान हो जाती है। 11 महीने के अंत तक, ज्यादातर बच्चे रेंगने और चलने की कोशिश कर रहे होते है जो कि बेहतर आंख और हाथ समन्वय विकसित करने में सहायक होते हैं। बच्चे अब दूरियो को बेहतर तरीके से जानते है और वह चीजो को सही तरह से फेंक सकते है ।

दो साल की उम्र तक बच्चों की आंखो का समन्वय अच्छी तरह से विकसित हो चुका होता है, इस उम्र मे बच्चे अपने पर्यावरण को लेकर जिज्ञासु होते है। इस उम्र मे आंखो की समस्या दुर्लभ होती है लेकिन निम्नलिखित कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत बच्चे की नजर की जांच कराये:
शिशुओं की दृष्टि संबंधी समस्याएँ

कई बार अगर शिशु की दृष्टि का विकास सही प्रकार से नहीं हो पाता है तो हो सकता शिशु की आँखों में स्थाई या अस्थायी असमानता हों। आइए, नवजात शिशुओं की आँखों से जुड़ी समस्याओं के विषय में जानते हैं –

शिशु की लाल या पपड़ीदार पलके ,आंखो के संक्रमण का संकेत हो सकती हैं।
लगातार आंखो का फेरना
उजाले के प्रति अधिक संवेदनशीलता
आंखो मे दर्द, खुजली या बेचैनी
सफेद या ग्रेय पुतली की उपस्थिति
गलत दिखने वाली आंख (बाहर निकली हुई या एक साथ फोकस नही हुई)



यदि इनमे से कोई भी संकेत दिखे तो तुरंत बाल रोग या नेत्र रोग चिकित्सक से संपर्क करे। समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओ को आंखो की कुछ समस्याओ जैसे धुंधला दिखना ,मायोपिया ,नेत्र भ्रांती विकसित होने का खतरा अधिक होता है। शिशु की दृष्टि के विकास मे माता-पिता की प्रमुख भूमिका होती है। उन्हे अपने बच्चे को घुटनों के बल चलने , चलने फिरने मे मदद करने का प्रयास कराना चाहिये। रंग बिरंगे खिलौने से उनके साथ खेलना चाहिये, और उनकी बौद्धिक समझ, और आंखो के समन्वय मे सुधार के लिये उन्हे तरह-तरह के आकार की वस्तु दिखानी चाहिए। शोधकर्ताओ ने बताया है कि स्तनपान भी शिशु दृष्टि के विकास के लिये आवश्यक है।

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