Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
मेनिएर रोग (Menier`s disease) अन्तःकर्ण का रोग है जिसके कारण श्रवण शक्ति प्रभावित हो सकती है और संतुलन बनाने की क्षमता का ह्रास हो सकता है। इसका पता पहले फ्रांसीसी चिकित्सक मेनिएर ने 1861 ई0 में लगाया था जिनके नाम पर इस रोग का नाम पड़ा।
इस रोग का आक्रमण अधिकांश युवावस्था में होता है। रोगी को एकाएक चक्कर आने लगता, कानों में झनझनाहट की आवाज होती, उल्टी आती और अंशत: बहरापन हो जाता है। ऐसे रोगी स्वस्थ भाग की ओर लेटे मिलते हैं। दूसरी करवट लेटने से उल्टी आने लगती है, आँखों की काली पुतली विकृत पार्श्व की ओर हो जाती है और रोगी पूर्णतया बेहोश हो जाता है। अच्छे होने पर रोगी के बहरे होने का भय रहता है।
इस कान की बीमारी का सटीक कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन यह विभिन्न कारकों के एकत्रीकरण के कारण होने की संभावना है जो भूलभुलैया (आंतरिक कान) में असामान्य मात्रा में तरल पदार्थ (एंडोलिम्फ) की ओर ले जाते हैं। योगदान करने वाले कुछ कारकों में शामिल हो सकते हैं –
आनुवंशिक प्रवृत्ति (एक आनुवंशिक विशेषता जो किसी व्यक्ति को एक निश्चित बीमारी विकसित करने की संभावना को बढ़ाती है)
असामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया
विषाणुजनित संक्रमण
शारीरिक विकृति के कारण कान में रुकावट
| --------------------------- | --------------------------- |