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मास्टरबेशन के बाद कमजोरी महसूस होती है
मेरी उम्र 28 साल है। 14 साल की उम्र से मास्टरबेशन कर रहा हूं। मास्टरबेशन के बाद कमजोरी महसूस होती है। धड़कन बढ़ना, सांस फूलना, हाथ-पांव में पसीना आना, किसी काम में मन न लगना और जल्दी डिस्चार्ज की समस्या ने घेर लिया है। कहा जाता है कि मास्टरबेशन से कमजोरी नहीं आती, लेकिन मुझे तो महसूस होती है।- एक पाठक

कमजोरी का मतलब
कमजोरी का एक कारण यह भी हो सकता है कि जब सहवास के दौरान आदमी चरमसीमा पर पहुंचता है तो पूरे शरीर की मांसपेशियों में कॉन्ट्रैक्शन या कंपन-सा होने लगता है। शरीर मथ जाता है। कई बार आदमी को कुछ देर के लिए थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है, पर करीब आधे घंटे बाद ताजगी की तरंग का अहसास भी होने लगता है। इसके लिए कुछ करने की जरूरत नहीं है। अगर फिर भी किसी को कमजोरी लगती है, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, आयुर्वेद के मुताबिक यहां रसायन का सेवन कारगर हो सकता है। हर डिस्चार्ज के बाद रसायन का सेवन करना चाहिए। इससे डिस्चार्ज की पूर्ति हो जाती है। यह डिस्चार्ज किसी भी रूप में हो सकता है, चाहे वह नाइटफॉल हो या मास्टरबेशन या सहवास हो। डिस्चार्ज के बाद कमजोरी महसूस करने वालों को अगले दिन रसायन ले लेना चाहिए।क्या होता है रसायन
रसायन का मतलब उन चीजों से होता है जो आदमी की जवानी बरकरार रखें और उसके बुढ़ापे को दूर। आयुर्वेद में गाय के घी को उत्तम रसायन माना गया है। गाय के घी की महिमा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जो ताकत गाय का दूध पी चुके बैल या सांड़ में होती है, वह भैंस का दूध पी चुके भैंसे में नहीं। गाय के घी के कई फायदे होते हैं। इसके सेवन से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है, वीर्य जल्दी बनने लगता है। ऐसा कहा भी गया है - घृतेन: शीघ्र वर्धते वीर्यम् यानी घी का पान करने से वीर्य शीघ्र ही बढ़ता है। आयुर्वेद में जहां भी घी लिखा है, उसका मतलब है गाय का घी और जहां तेल लिखा है, उसका मतलब तिल का तेल। फिर गाय के घी से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता, एसिडिटी कम होती है और जो लोग डिस्चार्ज के बाद कब्ज जैसी महसूस करते हैं, उन्हें कब्ज में राहत मिलती है। गाय के घी का सेवन यूं तो दाल-सब्जी या किसी भी चीज में मिलाकर कर सकते हैं, पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि रात को सोते वक्त एक गिलास दूध में एक चम्मच घी और जरूरत के मुताबिक मिश्री मिलाकर लें। मिश्री पित्तशामक होती है। सबसे बढ़िया घी वही होता है जो दूध में से दही, दही में से छाछ, छाछ में से मक्खन और मक्खन में से घी के रूप में निकाला जाता है। घी बनाने का शास्त्रोक्त तरीका यही है। क्रीम के जरिये निकाले गए घी से फायदा तो होता है, पर कम।बात आपकी समस्याओं कीहाथ-पांव फूलना, धड़कन बढ़ना या पसीने वगैरह की समस्या एंजाइटी की वजह से हो सकती हैं। मास्टरबेशन या सेक्स से इनका ताल्लुक नहीं है। जब भी ऐसे लक्षण दिखें, धीरे-धीरे लंबी व गहरी सांसें लेने की कोशिश करें। लंबी व गहरी सांसें लेने से अक्सर एंजाइटी में कमी आ जाती है। कई बार तो एंजाइटी की समस्या ठीक भी हो जाती है। डिस्चार्ज की समस्या कई बार अति उत्तेजना, प्रोस्टेट के इंफेक्शन, डायबीटीज या शुगर की शुरुआत के कारण या फिर एंजाइटी बढ़ाने वाले दूसरी वजहों से भी हो जाती है। कई बार काफी अरसे बाद सहवास करने पर जब जल्दी डिस्चार्ज हो जाता है तो इस डर से कि कहीं अगली बार भी जल्दी न हो जाए, डिस्चार्ज होने लगता है।आपकीसमस्या के हल के लिए अच्छी तरह जांच करना जरूरी है। वैसे डिपॉक्सिटिन-60 मिलीग्राम की एक गोली सहवास से एक घंटे पहले एक गिलास पानी से ले लेने पर सहवास में रुकावट का समय ज्यादातर बढ़ाया जा सकता है, पर यह एक टेम्पररी इलाज है।परमानेंट इलाज
परमानेंट इलाज के लिए योग में बताई गई वज्रोलि व अश्विनी मुद्रा का अभ्यास करें। यूनानी पद्धति में बताए गए तरीके के अनुसार पेशाब करते वक्त रोक-रोककर पेशाब करें। दरअसल, डिस्चार्ज का सेंटर हमारे ब्रेन में होता है और यूनानी पद्धति के अनुसार ब्रेन यह नहीं जानता कि शरीर पेशाब बाहर निकाल रहा है या सीमेन। ब्रेन को तो बस इतना ही पता है कि कोई लिक्विड बाहर जा रहा है। रोक-रोककर पेशाब की आदत डाल लेने से डिस्चार्ज को कंट्रोल करने वाली मसल्स की कंट्रोल करने की क्षमता बढ़ जाती है, जो सहवास के वक्त काम आती है।

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