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हम चिंता करते है क्योंकि हम किसी स्थिति के केवल सकारात्मक परिणाम को स्वीकार कर सकते है। इसके विपरित प्रतिकूल परिणाम को सहन नही कर सकते है। लेकिन क्या हम चिंता करने का जोखिम उठा सकते हैं यदि हम जानते हो कि चिंता करने से बाधाएं आती हैं और काम में देरी होती है? चिंता करना न केवल व्यक्ति के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि आध्यात्मिक प्रगति मे भी बाधक (हानिकारक) है। यह जीवन की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव ड़ालती है और स्थिति को और बत्तर कर देती है। इसलिए हमे चिंता करना और तनाव लेना बंद कर देना चाहिए। आइए
हम तनाव और चिंता के प्रभावों पर एक नज़र डालें:
मानसिक प्रभाव: मन पर चिंता और तनाव के प्रभाव
चिंता समझ का नाश करने वाली है।
चिंता एक आग है। चिंताग्रस्त व्यक्ति बुरा होने की आशंका से डरता रहता हैं।
चिंता से डिप्रेशन हो सकता है।
चिंता से कम एकाग्रता रहती है।
चिंताग्रस्त व्यक्ति को निर्णय लेने मे ज्यादा समय लगता हैं जो ज्यादातर सही नही होते है।
अत्यधिक चिंता से निराशा घेर लेती है।
चिंताएँ व्यक्ति का ध्यान समस्याओ पर केन्द्रित रखती है नहीं की समाधान की ओर।
शारीरिक प्रभाव: शरीर पर चिंता का प्रभाव
चिंताग्रस्त व्यक्ति का मन काम में हाज़िर नहीं रहता है। यदि सर्जरी करते समय डॉक्टर का मन भटकता रहे तो मरीज़ का क्या होगा? इसी तरह, खाने के दौरान भी हमारे भीतर अगणित कार्य चल रहे है। जब भोजन करते समय ध्यान भोजन में केंद्रित नहीं होता है, तो रक्तवाहिकाएं (ब्लड वेस्सेल्स) कड़क हो जाती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और दिल का दौरा पड़ता है।
जब आप चिंता करते है तो मस्तिष्क तनाव (स्ट्रेस) के हार्मोन छोड़ता है जो रक्त में प्रवाहित होते है। मांसपेशियां अनम्य होजाती है, जिसके परिणामस्वरूप पीठ दर्द, सिरदर्द, कंपकंपी आदि लक्षण प्रगट होते है। चिंता से पाचन तंत्र की सुरक्षात्मक परत घटती है जिससे जठरांत्र विकार की संभावनाएँ बढ़ सकती है।
अन्य शारिरिक प्रभाव जो हमे चिंता ना करने का दृढ़ निश्चय करवाती है वह इस प्रकार है:
इम्यून सिस्टम का कमज़ोर होना।
नींद नहीं आना
वजन बढ़ना या कम होना
बालो का झड़ना
त्वचा से संबंधित बीमारियां
हाथ मे लिए हुए काम पर प्रभाव
चिंता करने से काम पर उल्टा(प्रतिकूल) प्रभाव होता है , यह काम की गुणवत्ता को सौ प्रतिशत से सत्तर प्रतिशत तक कम कर देता है। जब आप गाड़ी चलाते समय अपने गाड़ी चलाने के कौशल के बारे मे विचार करेंगे, तो आपका एक्सीडेंट हो सकता है। व्यापार करते वक्त यदि आप चिंता करेंगे, तो आप गलत निर्णय ले सकते हैं।
चिंता कार्य में बाधा ड़ालती है। जब आपको कोई कार्य पूरा करना है और आप चिंताओं से घिर जाते हो तो आपको खुद पर विश्वास नही रहता है कि आप उस कार्य को पूरा कर पाओगे। और अंत मे आप वह काम करना ही बंद कर देते हो।
जीवन की गुणवत्ता पर चिंता करने से प्रभाव
समय की बर्बादी : चिंता करना समय और शक्ति दोनों की बर्बादी है। यह हमारी सारी सकारात्मक शक्ति को नकारात्मक शक्ति मे बदल देती है और सही समय पर सही कदम उठाने की हमारी क्षमता को भी ख़तम कर देती है।
कार्य क्षमता क्षीण होना : चिंतित व्यक्ति विचारो के भँवर फसा रहता है। इस कारण हर काम में उसे अधिक समय लगता है, जिससे समय की बर्बादी होती है। काम करने की क्षमता कम हो जाती है। चिंता करने में समय व्यतीत करने के बजाय वह रचनात्मक रूप से अन्य काम करने में समय व्यतीत कर सकता था।
चिंताओ के कारण, हम अपनी समझने की क्षमता, बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता ,अन्य लोगो का द्रष्टिकोण समझने की क्षमता को खो देते है। हम अपने धैर्य को पेहले की तुलना में जल्दी खो देते हैं। और इन सब के कारणों से हमारे रिश्तों में टकराव होने लगते है।
हम खुशी के मौके पर भी निरुत्साहित होते है।
चिंताए व्यक्ति को धूम्रपान, शराब जैसे विकारों की तरफ ढकेलती हैं, पेहले तो वह चिंता से निजात पाने के लिए ये सब करता है और फिर धीरे-धीरे वह इन विकारों से घिर जाता हैं।
हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ वक्त नहीं बिताते हैं, जिससे रिश्ते खराब होने लगते हैं। यहाँ तक कि हम शरीर से वहां बैठे होते हैं,पर भावनात्मक रूप से उनसे जुड़ नहीं पाते हैं, जिनकी उन्हें जरुरत होती है।
चिंता करनेवाले अपना धन-संपति खो बैठते हैं।
क्या उपरोक्त बाते, चिंता न करने के निश्चय करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं?
आध्यात्मिक प्रभाव
चिंता करना आर्तध्यान (ऐसी स्थिति या ध्यान जिसका अंत स्वयं को चोट पहुँचे) है। चिंता करने का परिणाम ,अगला जन्म जानवर गति में लायेगा। जब एक पिता अपनी अविवाहित बेटी के बारे में चिंता करते हुए प्रण त्यागता है, तो प्रकृति के नियमानुसार जानवर गति में जन्म लेता है, जहाँ जीवन दुर्व्यवहार से भरा रहता है।
चिंता से अंतराय कर्म बंध जाते है। ऐसे कर्म आपके अगले जन्म में आपकी इच्छाओं की पूर्ति में रूकावट करते है।
परम पूज्य दादा भगवान कहते है, ‘किसी काल में जब कभी संस्कारी मनुष्य होने का सौभाग्य मिलता है और तब अगर चिंता में रहे, तो मनुष्यपना भी चला जाएगा। कितना भारी जोखिम है?’
मुझे कुछ ऐसा बताओ जो मुझे चिंता ना करने मे मदद करे।
जब हम चिंता करना छोड़ते है, तो हम काफी सारी बिमारियों से निजात पाते है।
चिंता करके भीतर से क्यों जलना? चिंता मत करिये। यदि आप अपने कपड़े जला देते हैं, तो आप उन्हें नए ला सकते है। लेकिन अगर आप अपने आपको को जलाते हो तब आप खुद को कहाँ से लाओगे ?
चिंताएं बंधन में डालती है और अनंत जन्मों के लिए हमारा संसार चलते ही रहता हैं। यह पिछले जन्म की चिंताओं के कारण आज हम इस स्थिति में यहां हैं। अब क्यों चिंता करे और अपने जीवन चक्र को खींचे?
जब किसी व्यक्ति को दांत में दर्द होता है, तब क्यों वह ऐसी चिंता नही करता की यह दर्द उसे हमेशा के लिए रहेगा? हर चीज़ का एक समय होता है। समय आने पर दर्द बंद हो जायेगा।
इस दुनिया में कुछ भी चिंता करने के लायक नही हैं, एक क्षण के लिए भी नहीं। वास्तविकता समझे की कोई भी परिस्थिति कायमी नहीं है और वर्तमान में जो आपके पास है उसके साथ जीना शुरू कर दे।
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