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जिन महिलाओ में ये लक्षण नजर आते हैं, उन्हें प्रेगनेंट होने में आती है दिक्कत
जो महिलाएं गर्भधारण की तैयारी कर रही होती हैं उन्हें हर महीने इंतजार रहता है की उनकी प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आ जाए, लेकिन उन्हें ये ही नही पता होता है कि उनके शरीर में एग्स बन रहे हैं या नहीं। गर्भधारण के लिए महिलाओं के शरीर में एग्स और पुरुष के शरीर में हेल्दी स्पर्म का बनना आवश्यक होता है। लेकिन सवाल यह है कि कैसे पता किया जाए की महिला के शरीर में एग्स बन भी रहे हैं या नही, तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
इररेगुलर पीरियड्स
आज के समय में इररेगुलर पीरियड्स बहुत ही सामान्य बात है, यदि पीरियड्स 25 दिनों से कम या 35 दिनों से ज्यादा के साइकिल में आता है तो इसे इररेगुलर पीरियड्स या अनियमित माहवारी कहा जाता है। इस परिस्थिति में महिला के शरीर में गर्भधारण के लिए आवश्यक एग्स नहीं बन पाते।
ब्लीडिंग का फ्लो
ब्लीडिंग फ्लो भी यह दर्शाती है कि महिला के शरीर में एग्स बन रहे हैं या नही, जैसे - अगर किसी को 1 या 2 दिन ही ब्लीडिंग हो रही हो या पीरियड्स के नाम पर हल्की स्पॉटिंग हो रही हो, साथ ही यदि किसी को 7 दिन से ज्यादा तक ब्लीडिंग हो रही है तो ये दोनो ही परिस्थिति सही नहीं है।
ये दर्शाती है कि महिला के शरीर में एग्स नहीं बन रहे हैं। बहुत ज्यादा हैवी ब्लीडिंग होना लो प्रोजेस्टेरोन को दर्शाता है और बहुत कम ब्लीडिंग होना शरीर में पोषण की कमी को दर्शाता है। पोषण की कमी होने की वजह से शरीर में बराबर मात्रा में हारमोंस नहीं बन पाते, जिसकी वजह से महिलाओं में मां नहीं बन पाने की परेशानी आ सकती है।
ब्लीडिंग फ्लो सही करने का उपाय
पीरियड्स के बिल्डिंग फ्लो को सही करने के लिए पोषक तत्वों से युक्त आहार को अपने भोजन में नियमित रूप से शामिल करना चाहिए अगर ब्लीडिंग फ्लो बहुत ज्यादा है तो इस परिस्थिति में सौंफ का इस्तेमाल करना काफी सहायक होता है। क्लीनिकल स्टडीज में यह साबित हुआ है कि सौंफ के पानी का इस्तेमाल करने से पीरियड फ्लो को सही करने में मदद मिलती है।
सर्वाइकल म्यूकस की कमी
सर्वाइकल म्यूकस महिलायो के योनि से जो डिस्चार्ज होता है, जैसे पीरियड्स के पहले या पीरियड्स के बाद में सफेद पानी जैसा चिपचिपा डिस्चार्ज होना बिल्कुल सामान्य है, लेकिन इस तरह के डिस्चार्ज का न होना, ये दर्शाता है कि शरीर में एग्स का निर्माण नहीं हो रहा है।
पीसीओडी
आज के समय में पीसीओडी बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम है, यह एक लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर है , जिसमे महिलाओं में हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ जाता है, जिसकी वजह से वजन बढ़ना, गर्भधारण न कर पाना जैसी समस्या आ सकती है। लाइफ़स्टाइल को सही करके और खान-पान को अच्छा करके पीसीओडी कंट्रोल किया जा सकता है।
ये सभी लक्षण दर्शाते हैं कि गर्भधारण करने के लिए जरूरी एग्स जो हमारे शरीर में बनना चाहिए, वो नहीं बन पा रहे है। अगर इस तरह के लक्षण नजर आए तो चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले लेना चाहिए, साथ ही लाइफस्टाइल को सही करना चाहिए।
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