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कैसे पता चलेगा कि शिशु का बुखार गर्मी की वजह से है या बीमारी से?
सभी अन्य माता-पिता की तरह, शिशु को बुखार होने पर आपका परेशान होना स्वाभाविक है। यदि बुखार के कारण का पता न हो, तो यह और भी ज्यादा चिंता का विषय हो सकता है।
तेज बुखार का सबसे आम कारण वायरल इनफेक्शन है। बचपन में बहुत से अलग-अलग विषाणु होते हैं, जो बुखार पैदा करते हैं। ये कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं।
कुछ अन्य इनफेक्शन, कुछ दीर्घकालीन स्वास्थ्य स्थितियां, दवा और टीकाकरण के प्रति प्रतिक्रिया और गर्मी से जुड़ी बीमारियां भी शिशुओं और छोटे बच्चों में बुखार का कारण हो सकती हैं।
संक्रमणों से होने वाला बुखार गर्मी से होने वाले बुखार से अलग होता है। इनफेक्शन की वजह से बुखार इसलिए होता है, क्योंकि शरीर उस इनफेक्शन से लड़ रहा होता है। गर्मी व तेज तापमान की वजह से होने वाली बीमारियां जैसे कि तापघात (हीट स्ट्रोक) आदि से बुखार हो सकता है, क्योंकि शरीर जरुरत से ज्यादा गर्म हो जाता है और ठंडा नहीं हो पाता।
कारण चाहे कुछ भी हो, छह महीने से छोटे शिशुओं में बुखार अधिक गंभीर हो सकता है। नन्हें शिशुओं में बुखार होना काफी असामान्य है, इसलिए ऐसा होने पर हमेशा डॉक्टर से जांच कराएं। निम्न स्थितियों में शिशु के डॉक्टर से मिलें:
आपके शिशु की उम्र तीन महीने से कम है और उसे 100.4 डिग्री फेहरनहाइट या इससे ज्यादा बुखार है
आपके शिशु की उम्र छह महीने से कम है और उसे 102.2 डिग्री फेहरनहाइट या इससे ज्यादा बुखार है।
इनफेक्शन
बुखार बहुत से संक्रमणों की वजह से हो सकता है। आम संक्रमणों में शामिल हैं:
सर्दी-जुकाम
फ्लू
गले में दर्द
कान का इनफेक्शन
मूत्रमार्ग संक्रमण (यूटीआई)
श्वसन संबंधी बीमारियां जैसे कि निमोनिया
विषाणु (वायरस) जो चिकनपॉक्स जैसे चकत्ते पैदा करे
जीवाणुजनित संक्रमण, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से या दूषित भोजन या पेय पीने से हो सकते हैं। टाइफाइड एक गंभीर जीवाणुजनित इनफेक्शन है, जो कि संक्रमित व्यक्ति के मल या कभी-कभार पेशाब से दूषित भोजन या पेय के जरिये फैलता है।
मलेरिया जैसे इनफेक्शन विषाणुओं या जीवाणुओं की वजह से तो नहीं होते, मगर ये मच्छरों द्वारा वहन करने वाले परजीवियों से फैलता है।
यदि आपके शिशु को कोई संक्रमण है, तो उसे बुखार के साथ-साथ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। कारण को देखते हुए, बुखार के साथ निम्नलिखित लक्षण होना काफी आम है:
खांसी
छींक आना
कंपकंपी होना
नाक बहना या नाक बंद होना
चकत्ते
दस्त (डायरिया)
हालांकि, कई बार यूटीआई, कान के इनफेक्शन या फिर मेनिंजाइटिस या निमोनिया जैसे अधिक गंभीर संक्रमणों का पता लगाना मुश्किल होता है। हो सकता है इनका केवल एक ही लक्षण यानि बुखार ही सामने आए। इसलिए यदि आप संक्रमण को लेकर चिंतित हों, तो हमेशा डॉक्टर को दिखा लें।
मच्छरों द्वारा होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी होना भी जरुरी है, क्योंकि ये गंभीर हो सकती हैं और इनमें बुखार होता है। यदि किसी शिशु को मच्छर काटने के बाद बुखार होता है, तो यह मलेरिया, चिकनगुनिया या डेंगू हो सकता है।
हीट क्रेम्प्स और हीट स्ट्रोक
तापमान बढ़ने के साथ-साथ हमारा शरीर उसके साथ समायोजित होता जाता है। बहुत अधिक गर्मी होने पर शरीर पसीना निकालकर ठंडक पाने का प्रयास करता है। शिशुओं को गर्मी से होने वाला बुखार होने की संभावना अधिक होती है क्योंकि वे बड़े बच्चों और वयस्कों की तरह अपने शरीर के तापमान को निंयत्रित नहीं कर सकते।
हीट स्ट्रोक काफी गंभीर स्थिति है, जो शरीर में गर्मी बढ़ने और इसके ठंडा न हो पाने के कारण होती है। यदि जल्दी इसकी पहचान और उपचार न किया जाए, तो यह जानलेवा हो सकती है।
काफी ज्यादा समय तक धूप में रहने से, गर्म या आर्द्र मौसम में निर्जलीकरण होने से या फिर मौसम के अनुसार ज्यादा गर्म कपड़े पहन लेने से हीट स्ट्रोक हो सकता है। हीट स्ट्रोक के मामले लू के दिनों में अधिक होते हैं।
हीट स्ट्रोक के शुरुआती चरण में शरीर में पानी की कमी, हीट क्रेम्प्स और हीट एक्जॉशन शामिल हैं। हीट स्ट्रोक के शुरुआत में आपके शिशु को 102 डिग्री फेहरनहाइट से कम बुखार हो सकता है।
हीट स्ट्रोक की स्थिति बढ़ जाने पर शिशु को निम्न लक्षण हो सकते हैं:
पसीना न आना, 103 डिग्री फेहरनहाइट या इससे ज्यादा बुखार होने पर भी
त्वचा लाल, शुष्क और गर्म होना
नब्ज तेज होना
बेचैनी
भ्रम की स्थिति या इधर उधर ध्यान भटकना
चक्कर आना
सिरदर्द
तेज, कम गहरी सांसें
थकावट
उल्टी
बेहोशी
यदि शिशु हीट स्ट्रोक के शुरुआती चरण में हो, तो महत्वपूर्ण है कि उसे किसी ठंडक वाली जगह ले जाकर और खूब सारा तरल पिलाकर बुखार कम करने का प्रयास किया जाए। तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
इस बीच, जितनी बार और जितनी भी देर तक शिशु स्तनपान करना चाहे, उसे कराएं। यदि शिशु फॉर्मूला दूध पीता है, तो उसे ज्यादा बार दूध दें और थोड़ी मात्रा में पानी भी दें।
अगर शिशु छह महीने से बड़ा है, तो आप उसे पानी और ओरल रीहाइड्रेशन सोल्यूशन (ओआरएस) भी दे सकती हैं।
बड़े शिशु और बच्चे जो भी चाहें पी सकते हैं, जैसे कि नारियल पानी, नींबू पानी या छाछ आदि। थोड़ी मात्रा में शुरुआत करना बेहतर है। शिशु को लिटाएं, ठंडे पानी से उसे स्पंज स्नान कराएं और हाथ में कोई भी चीज लेकर उसे हवा करें। यदि आप घर पर हों, तो गुनगुने पानी से शिशु को नहलाने से भी फायदा हो सकता है।
हीट स्ट्रोक के लक्षणों और उपचार के बारे में जानने के लिए हमारा यह लेख पढ़ें।
यदि आप शिशु के तेज बुखार का कारण न समझ पा रही हों, तो हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर बुखार के कारण का पता लगा सकेंगे और जरुरी उपचार देंगे। कारण की पुष्टि करने के लिए वे आपसे कुछ जांचें करवाने के लिए भी कह सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखें कि कई बार बुखार बचपन के अज्ञात विषाणुओं की वजह से भी हो जाता है और यह अपने आप ही ठीक हो जाता है।
जीवाण्विक इनफेक्शन के मामले में शिशु को एंटीबायोटिक्स लेने की जरुरत होगी। मगर यदि शिशु को विषाणुजनित संक्रमण है, तो आमतौर पर आराम और तरल पदार्थों का सेवन ही एकमात्र उपचार होता है।
यदि आपका शिशु परेशान हो, तो डॉक्टर इन्फेंट पैरासिटामोल जैसी दवा बता सकते हैं, जिससे उसके लक्षण कम हो सकें और शिशु को आराम मिले। दवा और खुराक के बारे में हमेशा शिशु के डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।
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